नीट-यूजी को कंप्यूटर आधारित परीक्षा बनाने की सिफारिश, संसदीय समिति ने एनटीए सुधार पर सौंपी 382वीं रिपोर्ट
सारांश
मुख्य बातें
राज्यसभा सदस्य मुकुल वासनिक की अध्यक्षता वाली शिक्षा, महिला, बाल, युवा और खेल संबंधी संसदीय स्थायी समिति ने 9 अक्टूबर 2026 को अपनी 382वीं रिपोर्ट राज्यसभा के सभापति को सौंपी, जिसमें नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) में व्यापक सुधार की सिफारिशें की गई हैं। रिपोर्ट का सबसे अहम सुझाव यह है कि राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट-यूजी) को पेन-पेपर के बजाय कंप्यूटर आधारित परीक्षा (CBT) में बदला जाए। यह सिफारिश ऐसे समय में आई है जब 2024 के प्रश्नपत्र लीक विवाद के बाद एनटीए की विश्वसनीयता पर गहरे सवाल खड़े हो गए थे।
मुख्य सिफारिशें
समिति ने कहा कि एनटीए हर वर्ष लगभग 1.2 करोड़ छात्रों की परीक्षाएँ आयोजित करती है, इसलिए उसकी जवाबदेही और संसाधन उसी अनुपात में होने चाहिए। रिपोर्ट के अनुसार, देशभर में 1,000 सुरक्षित सरकारी परीक्षा केंद्र समयबद्ध तरीके से बनाए जाएँ और हर जिले में कम से कम एक परीक्षा केंद्र उपलब्ध कराया जाए। छोटे शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों में भी ऐसे केंद्र स्थापित करने पर विशेष जोर दिया गया है।
समिति ने सुझाव दिया कि स्कूलों और कॉलेजों में 100 से 200 कंप्यूटर वाली प्रयोगशालाएँ बनाने के लिए एजेंसी आर्थिक सहायता दे, जिनका उपयोग परीक्षा केंद्रों के रूप में हो सके। परीक्षा केंद्रों का संचालन केंद्र या राज्य सरकारों के पास होना चाहिए — निजी संस्थानों को उप-ठेके पर केंद्र चलाने देने से सुरक्षा जोखिम पैदा होते हैं।
प्रश्नपत्र लीक रोकने के उपाय
समिति ने सुझाया कि नीट-यूजी सहित प्रमुख परीक्षाओं के लिए एक बड़ा और लगातार अद्यतन होने वाला प्रश्न बैंक तैयार किया जाए। प्रश्नपत्र परीक्षा तिथि के काफी करीब तैयार किए जाएँ ताकि लीक की आशंका कम हो। प्रश्न बैंक तैयार करने और अनुवाद के लिए IIT, AIIMS और IIM जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों के विशेषज्ञों की मदद लेने की भी सिफारिश की गई है।
गौरतलब है कि विशेषज्ञों की नियुक्ति से पहले उनकी विश्वसनीयता और हितों के टकराव की स्वतंत्र जाँच अनिवार्य की जाए। जहाँ इंटरनेट और कंप्यूटर की सुविधा अपर्याप्त हो, वहाँ प्रश्नपत्र सीधे परीक्षा केंद्र पर भेजकर वहीं प्रिंट करने की अस्थायी व्यवस्था अपनाई जा सकती है।
एनटीए में स्टाफ की कमी और जवाबदेही
रिपोर्ट में एक चिंताजनक तथ्य सामने आया है — एनटीए में स्वीकृत 39 पदों में से केवल 23 पर अधिकारी तैनात हैं, यानी लगभग 41 प्रतिशत पद रिक्त हैं। समिति ने स्थायी विशेषज्ञ कर्मचारियों की भर्ती और परीक्षा सुरक्षा, डेटा विश्लेषण, डिजिटल प्रबंधन तथा परीक्षा संचालन जैसे क्षेत्रों में विशेषज्ञता विकसित करने की सिफारिश की है।
समिति ने यह भी कहा कि एनटीए परीक्षा अनियमितताओं से जुड़े सभी मामलों — प्राथमिकी, जाँच और अभियोजन — का सार्वजनिक अभिलेख बनाए। इसके अलावा, प्रतिबंधित कंपनियों और उनसे जुड़े व्यक्तियों की एक राष्ट्रीय सूची तैयार हो, जो सार्वजनिक रूप से उपलब्ध हो और जिन्हें सरकारी परीक्षा संस्थाएँ ठेका न दें।
छात्रों को राहत और नीट की संरचना में बदलाव
छात्रों की सुविधा के लिए समिति ने परीक्षा के दौरान हस्ताक्षर और दस्तावेज़ जाँच जैसी औपचारिकताओं के लिए अलग से 15 मिनट आवंटित करने का सुझाव दिया है। कुछ मिनट देर से पहुँचने वाले अभ्यर्थियों को लिखित घोषणा देकर परीक्षा में बैठने की अनुमति दी जाए, हालाँकि उन्हें अतिरिक्त समय नहीं मिलेगा।
समिति ने नीट-यूजी में दो चरणों वाली परीक्षा की संभावना तलाशने का भी सुझाव दिया है — सभी चिकित्सा पाठ्यक्रमों के लिए एक प्रारंभिक परीक्षा और अलग-अलग पाठ्यक्रमों के लिए विशेष मुख्य परीक्षा। रिपोर्ट में छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य, निशुल्क परामर्श, दिव्यांग अभ्यर्थियों के लिए सुलभ केंद्र और मजबूत शिकायत निवारण व्यवस्था पर भी जोर दिया गया है।
एजेंसी के भीतर साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों की टीम बनाने और प्रशासनिक कारणों से परीक्षा रद्द होने पर प्रभावित छात्रों को मुआवजे की व्यवस्था पर भी विचार करने को कहा गया है। इन सिफारिशों के क्रियान्वयन पर सरकार का रुख अब देश भर के लाखों परीक्षार्थियों की नज़रों में होगा।