एनटीए सुधार: केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट को बताया — फंक्शनल-वर्टिकल स्ट्रक्चर लागू, नीट-यूजी सीबीटी मोड पर विचार
सारांश
मुख्य बातें
केंद्र सरकार ने 22 सितंबर 2026 को सर्वोच्च न्यायालय में दायर एक अतिरिक्त हलफनामे में बताया कि नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) को फंक्शनल-वर्टिकल स्ट्रक्चर, वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों की तैनाती और विशेष पेशेवर पदों के निर्माण के ज़रिए व्यापक रूप से पुनर्गठित किया जा रहा है। साथ ही, नीट-यूजी परीक्षा को पेन-एंड-पेपर से कंप्यूटर-बेस्ड टेस्टिंग (सीबीटी) मोड में स्थानांतरित करने की संभावना पर सक्रिय रूप से विचार चल रहा है।
एनटीए में नई संरचना: क्या बदला
केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय के हलफनामे के अनुसार, अगस्त 2026 में एनटीए में कुल 14 अधिकारियों को तैनात किया गया — जिनमें एक संयुक्त सचिव, चार निदेशक, एक संयुक्त निदेशक, दो उप सचिव, दो अवर सचिव, दो अनुभाग अधिकारी और दो सहायक अनुभाग अधिकारी शामिल हैं। एनटीए के शीर्ष नेतृत्व की ज़िम्मेदारी अब भारत सरकार के सचिव स्तर के अधिकारी के पास है, जो महानिदेशक (डीजी) के रूप में कार्यरत हैं।
हलफनामे में कहा गया कि डीजी पद को संयुक्त सचिव स्तर से अतिरिक्त सचिव स्तर तक अपग्रेड करने और पाँच वरिष्ठ संयुक्त सचिव-स्तर के पद सृजित करने के प्रस्तावों पर विचार जारी है। एनटीए के वरिष्ठ नेतृत्व में अब भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS), भारतीय पुलिस सेवा (IPS), भारतीय राजस्व सेवा (IRS) और भारतीय सांख्यिकी सेवा (ISS) के अधिकारी शामिल हैं।
गौरतलब है कि पुरानी व्यवस्था में कर्मचारियों को परीक्षा-वार वर्टिकल में तैनात किया जाता था, जिसके कारण तकनीकी और प्रशासनिक जवाबदेही में बिखराव देखा गया था। नई फंक्शनल-वर्टिकल संरचना प्रत्येक मुख्य क्षेत्र — टेक्नोलॉजी, मानव संसाधन, परीक्षा सुरक्षा, सूचना सुरक्षा और उम्मीदवार अनुभव — में केंद्रित विशेषज्ञता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से लाई गई है।
राधाकृष्णन समिति की 101 सिफारिशें और एचपीटीएफ की भूमिका
यह हलफनामा सर्वोच्च न्यायालय के उस आदेश के अनुपालन में दायर किया गया, जिसमें इसरो के पूर्व चेयरमैन के. राधाकृष्णन की अध्यक्षता वाली उच्च-स्तरीय विशेषज्ञ समिति (एचएलसीई) की सिफारिशों को लागू करने की प्रगति रिकॉर्ड पर रखने का निर्देश दिया गया था। राधाकृष्णन समिति ने कुल 101 सिफारिशें की थीं, जिनमें नेशनल कॉमन एंट्रेंस टेस्ट में सुधार, दीर्घकालिक संस्थागत बदलाव और डिजिटल शिक्षा परीक्षण से जुड़े मुद्दे शामिल हैं।
पूर्व यूआईडीएआई चेयरमैन नंदन नीलेकणि की अध्यक्षता में 27 जुलाई को गठित हाई-पावर्ड टास्क फोर्स (एचपीटीएफ) ने एनटीए के महानिदेशक, उच्च शिक्षा विभाग और विभिन्न स्टेकहोल्डर्स के साथ बातचीत शुरू कर दी है। एचपीटीएफ ने राधाकृष्णन की अगुवाई वाली स्टीयरिंग कमेटी से भी परामर्श किया है।
भौतिक बुनियादी ढाँचे में सुधार और सुरक्षा इंतज़ाम
नई दिल्ली के मिंटो रोड स्थित भारत सरकार प्रेस बिल्डिंग में एनटीए को 55,524.53 वर्ग फीट का समर्पित कार्यालय स्थान आवंटित किया गया है। बिल्डिंग की पाँचवीं मंजिल तथा चौथी एवं छठी मंजिल के कुछ हिस्से एनटीए को दिए गए हैं। पिछले महीने एनटीए का गोपनीय कामकाज इस नई सरकारी इमारत में स्थानांतरित कर दिया गया।
मिंटो रोड परिसर में सुरक्षा के लिए केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) के 39 जवान तैनात किए गए हैं। सुरक्षा उपायों में तलाशी, सामान की एक्स-रे स्क्रीनिंग और एंट्री-एग्जिट पॉइंट पर डोर फ्रेम मेटल डिटेक्टर (डीएफएमडी) शामिल हैं।
नीट-यूजी सीबीटी में बदलाव: ग्रामीण और दूरदराज़ उम्मीदवारों की चिंता
हलफनामे में स्पष्ट किया गया कि एचपीटीएफ नीट-यूजी को पेन-एंड-पेपर मोड से सीबीटी मोड में बदलने की संभावना का अध्ययन कर रहा है। इस बदलाव के डिज़ाइन, अनुक्रम, आवश्यक बुनियादी ढाँचे और विशेष रूप से ग्रामीण, महिला तथा कम कनेक्टिविटी वाले ज़िलों के उम्मीदवारों पर पड़ने वाले असर का आकलन किया जा रहा है। यह बदलाव स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय और नेशनल मेडिकल कमीशन के साथ सहमति के बाद ही लागू होगा।
यह ऐसे समय में आया है जब 2024 के नीट-यूजी पेपर लीक प्रकरण ने देशभर में लाखों छात्रों और अभिभावकों के विश्वास को गहरी चोट पहुँचाई थी और सर्वोच्च न्यायालय ने एनटीए की कार्यप्रणाली की समीक्षा का आदेश दिया था। अदालत ने हाल ही में यह भी कहा था कि वह एनटीए कार्यालय का स्वयं दौरा कर सकती है, ताकि सुधारों की ज़मीनी स्थिति का आकलन किया जा सके।
सर्वोच्च न्यायालय की पीठ और आगे की सुनवाई
जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की पीठ ने ज़ोर दिया है कि संस्थागत सुधारों की सिफारिशें केवल कागज़ों तक सीमित न रहें, बल्कि उन्हें धरातल पर लागू किया जाए। अदालत ने एचपीटीएफ से समन्वय करने वाले संयुक्त सचिव को प्रगति-विवरण हलफनामे के साथ एनटीए की आधिकारिक वेबसाइट पर अपलोड करने का निर्देश भी दिया है। इस मामले की अगली सुनवाई 9 अक्टूबर को निर्धारित है।