ओडिशा एसआई भर्ती पेपर लीक: ईडी की ओडिशा-बंगाल में 10 ठिकानों पर छापेमारी, दो कंपनियाँ जाँच के घेरे में
सारांश
मुख्य बातें
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की भुवनेश्वर जोन टीम ने 9 अक्टूबर 2026 को ओडिशा एसआई भर्ती परीक्षा-2024 के प्रश्न पत्र लीक मामले में ओडिशा और पश्चिम बंगाल में स्थित 10 परिसरों पर एक साथ तलाशी अभियान शुरू किया। इस कार्रवाई में परीक्षा आयोजन से जुड़ी दो निजी कंपनियों और उनके निदेशकों की भूमिका की जाँच की जा रही है।
मामले की पृष्ठभूमि
30 सितंबर 2025 को ओडिशा पुलिस ने आंध्र प्रदेश और ओडिशा के सीमावर्ती शहर इछापुरम के पास तीन बसें रोकीं, जिनमें 114 उम्मीदवार सवार थे। इन पर आरोप था कि उन्हें 5 और 6 अक्टूबर 2025 को निर्धारित एसआई भर्ती परीक्षा के प्रश्न पत्र पहले से उपलब्ध कराए गए थे। इसके एवज़ में प्रत्येक उम्मीदवार से कथित तौर पर ₹15 लाख से ₹30 लाख तक की नकद राशि वसूली जा रही थी।
इस मामले में ओडिशा पुलिस ने अक्टूबर 2025 में एफआईआर दर्ज की। बाद में यह मामला केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) को सौंप दिया गया। अब ईडी ने धन शोधन के पहलू की जाँच के लिए मोर्चा खोल लिया है।
मुख्य आरोप और जाँच का दायरा
जाँच एजेंसियों के अनुसार, प्रश्न पत्र उन संस्थाओं से जुड़े व्यक्तियों द्वारा लीक किया गया था, जिन्हें परीक्षा संचालन का दायित्व सौंपा गया था। आरोप है कि इन व्यक्तियों ने उम्मीदवारों से संपर्क किया, पैसे के बदले प्रश्न पत्र देने का प्रलोभन दिया और गारंटी के रूप में उनके मूल प्रमाण पत्र अपने पास रख लिए।
मौजूदा तलाशी के दायरे में मेसर्स सिलिकॉन टेकलैब प्राइवेट लिमिटेड और मेसर्स पंचसॉफ्ट टेक्नोलॉजी प्राइवेट लिमिटेड के साथ-साथ उनके निदेशकों और अन्य संबद्ध व्यक्तियों को लिया गया है। यह ऐसे समय में आया है जब देश भर में परीक्षा पारदर्शिता को लेकर सवाल उठ रहे हैं, और सरकार पर प्रतियोगी भर्ती प्रक्रियाओं की विश्वसनीयता बहाल करने का दबाव है।
पीएसीएल मामले में ईडी की अलग कार्रवाई
इसी बीच ईडी ने एक अलग मामले में 8 अक्टूबर 2026 को पर्ल्स एग्रोटेक कॉर्पोरेशन लिमिटेड (पीएसीएल) से जुड़ी ₹567.45 करोड़ की अचल संपत्तियाँ जब्त कीं। यह कार्रवाई मुंबई, पुणे और रायगढ़ (महाराष्ट्र) में की गई। पीएसीएल पर आरोप है कि उसने कृषि भूमि विकास के नाम पर ₹48,000 करोड़ की सामूहिक निवेश योजना चलाई।
ईडी के दिल्ली जोनल ऑफिस ने प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (पीएमएलए), 2002 के तहत यह कार्रवाई की। जब्त की गई 48 अचल संपत्तियाँ प्रतीक कुमार, अंश प्रतीक कुमार और बीमिंग इन्फ्राडेवलपर्स, गणराज प्रॉपर्टीज तथा ग्रीनफील्ड एस्टेट्स लिमिटेड के नाम पर दर्ज थीं, जिनकी मौजूदा बाजार कीमत ₹567.45 करोड़ आंकी गई है।
आम अभ्यर्थियों पर असर
इस पेपर लीक ने उन हज़ारों ईमानदार उम्मीदवारों के भविष्य पर संकट खड़ा कर दिया, जिन्होंने वैध तरीके से परीक्षा दी थी। गौरतलब है कि एसआई भर्ती जैसी परीक्षाओं में लाखों युवा शामिल होते हैं और एक-एक अंक निर्णायक होता है। कथित तौर पर मूल प्रमाण पत्र गिरवी रख चुके उम्मीदवारों की स्थिति और अधिक जटिल बनी हुई है।
आगे की जाँच और संभावित कदम
ईडी का यह अभियान दर्शाता है कि एजेंसी अब धन के प्रवाह की जड़ तक पहुँचने की कोशिश कर रही है — यानी किसने लीक से कितनी कमाई की और वह राशि कहाँ गई। सीबीआई की समानांतर जाँच जारी है और दोनों एजेंसियों के निष्कर्ष मिलकर अदालत में आरोप-पत्र की नींव बन सकते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यह मामला राज्यों में परीक्षा-संचालन एजेंसियों के नियमन और जवाबदेही पर नीतिगत बहस को नई धार दे सकता है।