9 अक्टूबर 2026
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ओडिशा एसआई भर्ती पेपर लीक: ईडी की ओडिशा-बंगाल में 10 ठिकानों पर छापेमारी, दो कंपनियाँ जाँच के घेरे में

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ओडिशा एसआई भर्ती पेपर लीक: ईडी की ओडिशा-बंगाल में 10 ठिकानों पर छापेमारी, दो कंपनियाँ जाँच के घेरे में

सारांश

ओडिशा एसआई भर्ती पेपर लीक में ईडी का शिकंजा — 9 अक्टूबर को ओडिशा-बंगाल में 10 ठिकानों पर एक साथ छापे। परीक्षा संचालन से जुड़ी दो कंपनियाँ निशाने पर, जबकि 114 उम्मीदवारों से ₹15-30 लाख प्रति सीट के बदले पेपर देने का आरोप है। सीबीआई के बाद अब ईडी ने मनी ट्रेल खँगालना शुरू किया।

मुख्य बातें

ईडी ने 9 अक्टूबर 2026 को ओडिशा और पश्चिम बंगाल में 10 परिसरों पर एक साथ तलाशी अभियान चलाया।
मामला ओडिशा एसआई भर्ती परीक्षा-2024 के प्रश्न पत्र लीक से जुड़ा है, जिसमें 114 उम्मीदवारों को ₹15 लाख से ₹30 लाख प्रति सीट में पेपर देने का आरोप है।
जाँच के दायरे में मेसर्स सिलिकॉन टेकलैब प्राइवेट लिमिटेड और मेसर्स पंचसॉफ्ट टेक्नोलॉजी प्राइवेट लिमिटेड तथा उनके निदेशक शामिल।
30 सितंबर 2025 को इछापुरम के पास बसों को रोककर उम्मीदवारों को पकड़ा गया था; मामला बाद में सीबीआई को सौंपा गया।
ईडी ने एक अलग पीएसीएल मामले में 8 अक्टूबर 2026 को मुंबई, पुणे, रायगढ़ में ₹567.45 करोड़ की 48 संपत्तियाँ जब्त कीं।

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की भुवनेश्वर जोन टीम ने 9 अक्टूबर 2026 को ओडिशा एसआई भर्ती परीक्षा-2024 के प्रश्न पत्र लीक मामले में ओडिशा और पश्चिम बंगाल में स्थित 10 परिसरों पर एक साथ तलाशी अभियान शुरू किया। इस कार्रवाई में परीक्षा आयोजन से जुड़ी दो निजी कंपनियों और उनके निदेशकों की भूमिका की जाँच की जा रही है।

मामले की पृष्ठभूमि

30 सितंबर 2025 को ओडिशा पुलिस ने आंध्र प्रदेश और ओडिशा के सीमावर्ती शहर इछापुरम के पास तीन बसें रोकीं, जिनमें 114 उम्मीदवार सवार थे। इन पर आरोप था कि उन्हें 5 और 6 अक्टूबर 2025 को निर्धारित एसआई भर्ती परीक्षा के प्रश्न पत्र पहले से उपलब्ध कराए गए थे। इसके एवज़ में प्रत्येक उम्मीदवार से कथित तौर पर ₹15 लाख से ₹30 लाख तक की नकद राशि वसूली जा रही थी।

इस मामले में ओडिशा पुलिस ने अक्टूबर 2025 में एफआईआर दर्ज की। बाद में यह मामला केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) को सौंप दिया गया। अब ईडी ने धन शोधन के पहलू की जाँच के लिए मोर्चा खोल लिया है।

मुख्य आरोप और जाँच का दायरा

जाँच एजेंसियों के अनुसार, प्रश्न पत्र उन संस्थाओं से जुड़े व्यक्तियों द्वारा लीक किया गया था, जिन्हें परीक्षा संचालन का दायित्व सौंपा गया था। आरोप है कि इन व्यक्तियों ने उम्मीदवारों से संपर्क किया, पैसे के बदले प्रश्न पत्र देने का प्रलोभन दिया और गारंटी के रूप में उनके मूल प्रमाण पत्र अपने पास रख लिए।

मौजूदा तलाशी के दायरे में मेसर्स सिलिकॉन टेकलैब प्राइवेट लिमिटेड और मेसर्स पंचसॉफ्ट टेक्नोलॉजी प्राइवेट लिमिटेड के साथ-साथ उनके निदेशकों और अन्य संबद्ध व्यक्तियों को लिया गया है। यह ऐसे समय में आया है जब देश भर में परीक्षा पारदर्शिता को लेकर सवाल उठ रहे हैं, और सरकार पर प्रतियोगी भर्ती प्रक्रियाओं की विश्वसनीयता बहाल करने का दबाव है।

पीएसीएल मामले में ईडी की अलग कार्रवाई

इसी बीच ईडी ने एक अलग मामले में 8 अक्टूबर 2026 को पर्ल्स एग्रोटेक कॉर्पोरेशन लिमिटेड (पीएसीएल) से जुड़ी ₹567.45 करोड़ की अचल संपत्तियाँ जब्त कीं। यह कार्रवाई मुंबई, पुणे और रायगढ़ (महाराष्ट्र) में की गई। पीएसीएल पर आरोप है कि उसने कृषि भूमि विकास के नाम पर ₹48,000 करोड़ की सामूहिक निवेश योजना चलाई।

ईडी के दिल्ली जोनल ऑफिस ने प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (पीएमएलए), 2002 के तहत यह कार्रवाई की। जब्त की गई 48 अचल संपत्तियाँ प्रतीक कुमार, अंश प्रतीक कुमार और बीमिंग इन्फ्राडेवलपर्स, गणराज प्रॉपर्टीज तथा ग्रीनफील्ड एस्टेट्स लिमिटेड के नाम पर दर्ज थीं, जिनकी मौजूदा बाजार कीमत ₹567.45 करोड़ आंकी गई है।

आम अभ्यर्थियों पर असर

इस पेपर लीक ने उन हज़ारों ईमानदार उम्मीदवारों के भविष्य पर संकट खड़ा कर दिया, जिन्होंने वैध तरीके से परीक्षा दी थी। गौरतलब है कि एसआई भर्ती जैसी परीक्षाओं में लाखों युवा शामिल होते हैं और एक-एक अंक निर्णायक होता है। कथित तौर पर मूल प्रमाण पत्र गिरवी रख चुके उम्मीदवारों की स्थिति और अधिक जटिल बनी हुई है।

आगे की जाँच और संभावित कदम

ईडी का यह अभियान दर्शाता है कि एजेंसी अब धन के प्रवाह की जड़ तक पहुँचने की कोशिश कर रही है — यानी किसने लीक से कितनी कमाई की और वह राशि कहाँ गई। सीबीआई की समानांतर जाँच जारी है और दोनों एजेंसियों के निष्कर्ष मिलकर अदालत में आरोप-पत्र की नींव बन सकते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यह मामला राज्यों में परीक्षा-संचालन एजेंसियों के नियमन और जवाबदेही पर नीतिगत बहस को नई धार दे सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

यह स्पष्ट हो रहा है कि इसमें महज कुछ बिचौलिए नहीं, बल्कि परीक्षा आयोजन से सीधे जुड़ी कंपनियाँ संलिप्त हो सकती हैं — जो सरकारी ठेका पारदर्शिता पर गहरे सवाल खड़े करता है। ईडी और सीबीआई की समानांतर जाँच दबाव बढ़ाती है, लेकिन असली परीक्षा यह है कि क्या कार्रवाई सिर्फ निचले स्तर के दलालों तक सीमित रहेगी या आरोप-पत्र संस्थागत विफलताओं तक पहुँचेगा। ₹15-30 लाख प्रति सीट की दर से व्यापार और प्रमाण पत्र गिरवी रखने की प्रथा बताती है कि यह एक सुव्यवस्थित नेटवर्क था — न कि स्वतःस्फूर्त घटना। जब तक परीक्षा-एजेंसियों के चयन और निगरानी में संरचनात्मक सुधार नहीं होता, ऐसे मामले दोहराते रहेंगे।
RashtraPress
9 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ओडिशा एसआई पेपर लीक मामला क्या है?
यह ओडिशा एसआई भर्ती परीक्षा-2024 के प्रश्न पत्र लीक का मामला है। 30 सितंबर 2025 को पुलिस ने इछापुरम के पास 114 उम्मीदवारों को ऐसी बसों में पकड़ा, जिन पर आरोप था कि उन्होंने ₹15 लाख से ₹30 लाख के बदले परीक्षा से पहले पेपर हासिल किया था।
ईडी की छापेमारी 9 अक्टूबर 2026 को किन-किन जगहों पर हुई?
ईडी की भुवनेश्वर जोन टीम ने 9 अक्टूबर 2026 को ओडिशा और पश्चिम बंगाल में स्थित 10 परिसरों पर एक साथ तलाशी अभियान चलाया। इस दौरान मेसर्स सिलिकॉन टेकलैब प्राइवेट लिमिटेड, मेसर्स पंचसॉफ्ट टेक्नोलॉजी प्राइवेट लिमिटेड और उनके निदेशकों के ठिकाने जाँच के दायरे में आए।
इस मामले की जाँच सीबीआई को क्यों सौंपी गई?
ओडिशा पुलिस ने अक्टूबर 2025 में एफआईआर दर्ज करने के बाद मामले की संवेदनशीलता और व्यापकता को देखते हुए इसे सीबीआई को सौंप दिया। अब ईडी ने धन शोधन के कोण की जाँच के लिए स्वतंत्र रूप से मोर्चा खोला है।
पीएसीएल मामले में ईडी ने कितनी संपत्ति जब्त की?
ईडी ने 8 अक्टूबर 2026 को मुंबई, पुणे और रायगढ़ (महाराष्ट्र) में पीएसीएल से जुड़ी 48 अचल संपत्तियाँ जब्त कीं, जिनकी मौजूदा बाजार कीमत ₹567.45 करोड़ बताई गई है। यह कार्रवाई ₹48,000 करोड़ की कथित सामूहिक निवेश योजना से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में की गई।
इस पेपर लीक से उम्मीदवारों पर क्या असर पड़ा?
पेपर लीक की वजह से उन हज़ारों ईमानदार उम्मीदवारों के भविष्य पर अनिश्चितता के बादल छाए हैं जिन्होंने वैध तरीके से परीक्षा दी। जिन उम्मीदवारों से मूल प्रमाण पत्र गारंटी के रूप में ले लिए गए थे, उनकी स्थिति विशेष रूप से जटिल बनी हुई है।
राष्ट्र प्रेस
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