14 अक्टूबर 2026
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ओडिशा SI भर्ती पेपर लीक: ED ने 12 ठिकानों पर छापे, सिलिकॉन टेकलैब समेत 3 कंपनियाँ जाँच के घेरे में

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ओडिशा SI भर्ती पेपर लीक: ED ने 12 ठिकानों पर छापे, सिलिकॉन टेकलैब समेत 3 कंपनियाँ जाँच के घेरे में

सारांश

ओडिशा SI भर्ती पेपर लीक कोई साधारण कदाचार नहीं — यह ITI लिमिटेड से STPL, और वहाँ से पंचसॉफ्ट तक फैली ठेकेदारी की ऐसी श्रृंखला है जिसमें हर कड़ी ने जवाबदेही से पल्ला झाड़ा। ₹15-30 लाख प्रति उम्मीदवार की दर से हुई यह अवैध कमाई बताती है कि यह महज लापरवाही नहीं, सुनियोजित लूट थी।

मुख्य बातें

ED ने 9, 10 और 12 अक्टूबर 2026 को ओडिशा और पश्चिम बंगाल में 12 ठिकानों पर PMLA के तहत तलाशी ली।
जाँच के घेरे में सिलिकॉन टेकलैब प्राइवेट लिमिटेड , पंचसॉफ्ट टेक्नोलॉजीज और PSIL इंटरनेशनल लिमिटेड — तीनों कंपनियाँ शामिल हैं।
परीक्षार्थियों से प्रति उम्मीदवार ₹15 से ₹30 लाख नकद लेकर 5-6 अक्टूबर 2025 की SI परीक्षा का पेपर लीक किया गया था।
30 सितंबर 2025 को इच्छापुरम सीमा पर 114 अभ्यर्थियों को बस से पकड़ा गया था; मामला बाद में CBI को सौंपा गया।
STPL और पंचसॉफ्ट के बीच परीक्षा से पूर्व हुए वित्तीय लेन-देन साजिश की पुष्टि करते हैं; PSIL का शेयर खरीद समझौता कभी रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज के पास दाखिल नहीं हुआ।
ED के अनुसार मामले में धन शोधन की जाँच जारी है; आगे और कार्रवाई संभव।

प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने ओडिशा सब-इंस्पेक्टर भर्ती परीक्षा-2024 के प्रश्नपत्र लीक मामले में बड़ी प्रवर्तन कार्रवाई करते हुए 9, 10 और 12 अक्टूबर 2026 को ओडिशा और पश्चिम बंगाल में 12 ठिकानों पर तलाशी अभियान चलाया। ED के भुवनेश्वर जोनल ऑफिस ने यह कार्रवाई धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA), 2002 के तहत की, जिसमें कई आपत्तिजनक दस्तावेज, डिजिटल डिवाइस और वित्तीय अभिलेख जब्त किए गए। यह मामला भारत में परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर उठते सवालों के बीच एक और गंभीर अध्याय बन गया है।

किन कंपनियों पर पड़ी तलाशी

ED ने जिन परिसरों की जाँच की उनमें मेसर्स सिलिकॉन टेकलैब प्राइवेट लिमिटेड (STPL), मेसर्स पंचसॉफ्ट टेक्नोलॉजीज प्राइवेट लिमिटेड और मेसर्स PSIL इंटरनेशनल लिमिटेड के दफ्तर तथा उनके निदेशकों व संबद्ध व्यक्तियों के आवास शामिल हैं। तीनों कंपनियाँ परीक्षा प्रक्रिया की विभिन्न कड़ियों में शामिल रही हैं, और जाँचकर्ताओं के अनुसार इनके बीच आपसी वित्तीय लेन-देन के साक्ष्य मिले हैं।

मुख्य घटनाक्रम: पेपर लीक की पूरी कड़ी

30 सितंबर 2025 को ओडिशा पुलिस ने आंध्र प्रदेश-ओडिशा सीमा पर इच्छापुरम के पास तीन बसों को रोका, जिनमें 114 अभ्यर्थी सवार थे। आरोप है कि 5 और 6 अक्टूबर 2025 को निर्धारित SI भर्ती परीक्षा का प्रश्नपत्र प्रति उम्मीदवार ₹15 से ₹30 लाख नकद के बदले लीक किया गया था। अभ्यर्थियों के असली शैक्षणिक प्रमाणपत्र गारंटी के रूप में भी ले लिए गए थे। ओडिशा पुलिस द्वारा दर्ज एफआईआर के बाद यह मामला बाद में सीबीआई (CBI) को सौंपा गया।

गौरतलब है कि मार्च 2025 में भी इसी परीक्षा का एक संस्करण आयोजित होने वाला था, लेकिन अनियमितताओं के चलते ओडिशा पुलिस भर्ती बोर्ड (OPRB) ने उसे रद्द कर दिया था। सीबीआई की चार्जशीट में इन दोनों अवसरों पर हुई गड़बड़ियों का विवरण दिया गया है।

ठेकेदारी की श्रृंखला और अनधिकृत उपठेका

जाँच में सामने आया कि OPRB ने परीक्षा संचालन का दायित्व केंद्र सरकार के सार्वजनिक उपक्रम ITI लिमिटेड को सौंपा था। ITI लिमिटेड ने यह जिम्मेदारी आगे भुवनेश्वर स्थित सिलिकॉन टेकलैब प्राइवेट लिमिटेड (STPL) को दे दी। हालाँकि, STPL के निदेशक सुरेश चंद्र नायक ने ITI लिमिटेड की लिखित अनुमति के बिना ही अभ्यर्थियों की संवेदनशील जानकारी के प्रबंधन हेतु तीसरी पार्टी — पंचसॉफ्ट टेक्नोलॉजीज प्राइवेट लिमिटेड — को उपठेका दे दिया।

ED के अनुसार पंचसॉफ्ट के निदेशक शंकर प्रुस्टी की इस प्रक्रिया में पूरी मिलीभगत थी। परीक्षा प्रक्रिया शुरू होने से पहले ही STPL और पंचसॉफ्ट के बीच कई संदिग्ध वित्तीय लेन-देन का पता चला है, जो जाँचकर्ताओं के अनुसार उनकी सुनियोजित साजिश की ओर इशारा करते हैं।

PSIL की भूमिका और शेयर हस्तांतरण का रहस्य

ED की जाँच में एक और अहम खुलासा हुआ है। PSIL इंटरनेशनल लिमिटेड के निदेशक समीर रथ और उनकी पत्नी शाश्वती मिश्रा ने 5 अगस्त 2023 के एक शेयर खरीद समझौते के तहत STPL की अधिकांश हिस्सेदारी अपने नाम कर ली थी। जाँचकर्ताओं के अनुसार यह समझौता कभी रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज के पास दाखिल ही नहीं किया गया — जो कंपनी कानून का स्पष्ट उल्लंघन है।

PSIL के निदेशकों द्वारा नियंत्रण लेने के बावजूद सुरेश चंद्र नायक STPL में निदेशक बने रहे और बिना वैध अधिकार के ITI लिमिटेड के साथ संवाद कर प्रश्नपत्र तक पहुँच बना ली। यह संस्थागत विफलता की एक बड़ी परत उजागर करता है।

आगे क्या होगा

ED ने पुष्टि की है कि यह पेपर लीक एक सुनियोजित आपराधिक षड्यंत्र था और इसमें बड़े पैमाने पर नकद अवैध आय अर्जित की गई। मामले में धन शोधन के पहलुओं की गहन जाँच जारी है और आगे और गिरफ्तारियाँ या संपत्ति कुर्की की कार्रवाई से इनकार नहीं किया जा सकता। यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में भर्ती परीक्षाओं की पारदर्शिता और तकनीकी सुरक्षा को लेकर जोरदार बहस चल रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

ITI ने STPL को, और STPL ने बिना अनुमति के पंचसॉफ्ट को — हर चरण पर निगरानी शून्य रही। गंभीर सवाल यह है कि केंद्र सरकार के PSU ने उपठेकेदार की पृष्ठभूमि जाँच क्यों नहीं की। जब तक भर्ती परीक्षाओं में तकनीकी आपूर्तिकर्ताओं के लिए अनिवार्य ऑडिट और वास्तविक समय में निगरानी नहीं होगी, ऐसी साजिशें बार-बार सामने आती रहेंगी।
RashtraPress
14 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ओडिशा SI भर्ती पेपर लीक मामला क्या है?
यह ओडिशा सब-इंस्पेक्टर भर्ती परीक्षा-2024 के प्रश्नपत्र लीक से जुड़ा मामला है, जिसमें 5-6 अक्टूबर 2025 की परीक्षा से पहले प्रति अभ्यर्थी ₹15 से ₹30 लाख नकद लेकर पेपर बेचे जाने का आरोप है। 30 सितंबर 2025 को इच्छापुरम सीमा पर 114 अभ्यर्थियों को पकड़े जाने के बाद मामला CBI को सौंपा गया और अब ED PMLA के तहत जाँच कर रही है।
ED ने किन-किन जगहों पर छापे मारे?
ED के भुवनेश्वर जोनल ऑफिस ने 9, 10 और 12 अक्टूबर 2026 को ओडिशा और पश्चिम बंगाल में 12 ठिकानों पर तलाशी ली। इनमें सिलिकॉन टेकलैब, पंचसॉफ्ट टेक्नोलॉजीज और PSIL इंटरनेशनल के दफ्तर तथा उनके निदेशकों के आवास शामिल हैं।
सिलिकॉन टेकलैब की इस मामले में क्या भूमिका है?
OPRB ने परीक्षा का काम ITI लिमिटेड को सौंपा था, जिसने आगे सिलिकॉन टेकलैब (STPL) को दिया। STPL के निदेशक सुरेश चंद्र नायक ने ITI की मंजूरी के बिना पंचसॉफ्ट को उपठेका दिया और बाद में बिना अधिकार के ITI के साथ संवाद कर प्रश्नपत्र तक पहुँच बनाई।
PSIL इंटरनेशनल लिमिटेड का इस घोटाले से क्या संबंध है?
PSIL इंटरनेशनल के निदेशक समीर रथ और उनकी पत्नी शाश्वती मिश्रा ने 5 अगस्त 2023 के एक शेयर खरीद समझौते के तहत STPL की अधिकांश हिस्सेदारी ली थी। ED के अनुसार यह समझौता कभी रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज के पास दाखिल नहीं किया गया, और इसके बावजूद PSIL-संबद्ध लोग STPL के कामकाज को प्रभावित करते रहे।
आगे इस मामले में क्या कार्रवाई हो सकती है?
ED ने पुष्टि की है कि धन शोधन के पहलुओं की जाँच जारी है। जब्त दस्तावेजों और वित्तीय लेन-देन के विश्लेषण के बाद आरोपियों की संपत्ति कुर्की और अतिरिक्त गिरफ्तारियाँ संभव हैं। CBI पहले ही आपराधिक मामले में चार्जशीट दाखिल कर चुकी है।
राष्ट्र प्रेस
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