ई20 ईंधन गुणवत्ता निगरानी: 87,000 पेट्रोल पंपों पर रोज़ाना 12 बार तक जल-मिलावट परीक्षण, सरकार ने दी जानकारी
सारांश
मुख्य बातें
पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय (MoPNG) ने 4 अगस्त 2026 को स्पष्ट किया कि देश भर के 87,000 से अधिक पेट्रोल पंपों पर ईंधन में जल-मिलावट (वॉटर इंग्रेस) की जाँच अब रोज़ाना 8 से 12 बार की जा रही है। मंत्रालय के अनुसार, तेल विपणन कंपनियों (OMC) ने निगरानी व्यवस्था को पहले की तुलना में काफी सख्त बना दिया है और ई20 पेट्रोल की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए बहुस्तरीय परीक्षण प्रणाली लागू है।
मुख्य घटनाक्रम
यह स्पष्टीकरण ऐसे समय में आया है जब कुछ मीडिया रिपोर्टों में चुनिंदा पेट्रोल पंपों पर ईंधन की गुणवत्ता और संभावित मिलावट को लेकर सवाल उठाए गए थे। मंत्रालय ने बताया कि अब तक 2,000 से अधिक ईंधन नमूनों की क्लोराइड और सल्फाइड प्रदूषण के लिए जाँच की जा चुकी है। पूरे देश में क्लोराइड प्रदूषण के केवल दो मामले सामने आए, और जैसे ही इनका पता चला, संबंधित पेट्रोल पंपों पर ईंधन की बिक्री तत्काल प्रभाव से रोक दी गई।
ई20 और एथेनॉल गुणवत्ता मानक
मंत्रालय ने बताया कि पेट्रोल में मिलाए जाने वाले एथेनॉल को भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) के IS 15464 मानकों का पालन करना अनिवार्य है और उसकी शुद्धता कम से कम 99.6 प्रतिशत होनी चाहिए। प्रत्येक खेप के साथ प्रमाणित गुणवत्ता रिपोर्ट जारी की जाती है। एथेनॉल की हर खेप को स्वीकार करने से पहले उसके ऊपरी और निचले हिस्से से नमूने लेकर जाँच की जाती है।
गौरतलब है कि जुलाई 2024 से जून 2026 के बीच निर्धारित मानकों पर खरा न उतरने के कारण 302 टैंकरों को अस्वीकार किया गया। इन टैंकरों में करीब 10,500 किलोलीटर एथेनॉल मौजूद था — यह आँकड़ा दर्शाता है कि अस्वीकृति तंत्र सक्रिय रूप से काम कर रहा है।
सुरक्षा व्यवस्थाएँ और आपूर्ति श्रृंखला निगरानी
मंत्रालय के अनुसार, ईंधन में किसी भी तरह की मिलावट रोकने के लिए समर्पित भंडारण सुविधाएँ, नियमित गुणवत्ता परीक्षण और एथेनॉल टैंकरों से नमूने लेने जैसी कई सुरक्षा व्यवस्थाएँ लागू की गई हैं। तेल कंपनियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे पूरे ईंधन आपूर्ति तंत्र की लगातार निगरानी करें ताकि किसी भी प्रकार के प्रदूषण या मिलावट की संभावना को समय रहते रोका जा सके।
उपभोक्ताओं पर असर और सरकार का रुख
मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि यदि किसी भी पेट्रोल पंप पर ईंधन में मिलावट या प्रदूषण पाया जाता है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। उपभोक्ताओं को गुणवत्तापूर्ण ईंधन उपलब्ध कराना मंत्रालय की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। यह ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब भारत में ई20 ईंधन का विस्तार तेज़ी से हो रहा है और करोड़ों वाहन-चालक इस पर निर्भर हैं।
आगे क्या
मंत्रालय ने संकेत दिया है कि निगरानी तंत्र को और मज़बूत किया जाएगा। OMC को निर्देश दिए गए हैं कि वे किसी भी गड़बड़ी की स्थिति में तत्काल सुधारात्मक कदम उठाएँ और रिपोर्ट करें। उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि इस स्तर की निगरानी से ई20 कार्यक्रम में उपभोक्ता विश्वास बनाए रखने में मदद मिलेगी।