1662 ईस्वी में निर्मित अद्वितीय लक्ष्मी नारायण मंदिर: गर्भगृह में मूर्ति का अभाव, पर वास्तुकला की अद्भुत छटा
सारांश
मुख्य बातें
ओरछा, 16 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। अक्षय तृतीया का पर्व, जो हमेशा रहनुमा तिथि मानी जाती है, इस वर्ष 19 अप्रैल को मनाया जाएगा। इस दिन विशेष रूप से भगवान नारायण और माता लक्ष्मी की पूजा का महत्व है। देशभर में लक्ष्मी नारायण को समर्पित अनेक मंदिर हैं, और मध्य प्रदेश के प्रसिद्ध पर्यटन स्थल ओरछा में स्थित लक्ष्मी नारायण मंदिर, अपनी अद्वितीय वास्तुकला और समृद्ध विरासत के लिए जाना जाता है।
इस भव्य मंदिर का निर्माण 1662 ईस्वी में राजा बीर सिंह देव द्वारा किया गया था। इसकी किले जैसी संरचना, दीवारों पर सजाए गए रंगीन भित्ति चित्र, और बुंदेली कला के अद्भुत नमूने इसे खास बनाते हैं। खास बात यह है कि इस मंदिर के गर्भगृह में कोई भी मूर्ति नहीं है, फिर भी यह बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं और पर्यटकों को आकर्षित करता है।
लक्ष्मी नारायण मंदिर, बुंदेला राजवंश की गौरव की प्रतीक है। इसे केवल पूजा स्थल नहीं, बल्कि एक मजबूती से बने किले की तरह देखा जाता है। इसके चारों कोनों पर ऊंचे स्तंभ हैं, जिन पर बारीक नक्काशी की गई है। मुख्य शिखर पर विघ्न विनाशन भगवान श्री गणेश की प्रतिमा स्थापित है।
मंदिर की दीवारों पर बुंदेली और मुगल कला का अनूठा मिश्रण देखने को मिलता है। इन पर रामायण के प्रसंग, भगवान कृष्ण के जीवन के दृश्य, और युद्ध की घटनाओं को दर्शाने वाले चित्र बने हैं। इन चित्रों के रंग आज भी जीवंत हैं, जो पर्यटकों को मंत्रमुग्ध कर देते हैं। एक खास चित्र में विशाल पौराणिक पक्षी ‘शुंगी चिड़िया’ को दर्शाया गया है, जो अपनी नुकीली चोंच से हाथियों को उठाकर उड़ जाता है।
राजा बीर सिंह देव ने इस मंदिर का निर्माण 1662 में किया था, और बाद में 1793 में राजा पृथ्वी सिंह ने इसका जीर्णोद्धार कराया। यहां देवी लक्ष्मी की पूजा की जाती है। कहा जाता है कि पहले यहां सोने और रत्नों से जड़ी लक्ष्मी की एक सुंदर मूर्ति थी, जिसे किसी शासक ने चुरा लिया था, तभी से गर्भगृह खाली है। मंदिर राम राजा मंदिर से जुड़ा हुआ है, जिसका मार्ग सुंदर पत्थरों से बना है।
सुबह की सुनहरी रोशनी में मंदिर की नक्काशी और चित्र और भी अद्भुत दिखते हैं। यहां आने वाले पर्यटक न केवल इतिहास और कला का आनंद लेते हैं, बल्कि एक शांत और दिव्य वातावरण का अनुभव भी करते हैं। लक्ष्मी नारायण मंदिर, बुंदेलखंड की सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा है, जहां दीपावली और होली जैसे त्योहारों पर शोभायात्राएं निकाली जाती हैं और यह सामाजिक-सांस्कृतिक गतिविधियों का केंद्र बन जाता है।
ओरछा पहुंचने पर, स्थानीय ऑटो, ई-रिक्शा या टैक्सी के माध्यम से आसानी से लक्ष्मी नारायण मंदिर पहुंचा जा सकता है। यह मंदिर पूरे दिन खुला रहता है और यहां प्रवेश निःशुल्क है। ओरछा के नजदीकी रेलवे स्टेशन वीरांगना लक्ष्मीबाई रेलवे स्टेशन, जो लगभग 15 किलोमीटर दूर है, से यहां पहुंचा जा सकता है। सड़क मार्ग से भी बस और टैक्सी की सुविधा उपलब्ध है।