पीएसीएल फ्रॉड: ईडी ने मुंबई-पुणे में ₹567 करोड़ की 48 संपत्तियाँ जब्त कीं
सारांश
मुख्य बातें
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने 8 अक्टूबर 2026 को पर्ल्स एग्रोटेक कॉर्पोरेशन लिमिटेड (पीएसीएल) से जुड़े ₹48,000 करोड़ के सामूहिक निवेश घोटाले में मुंबई, पुणे और रायगढ़ (महाराष्ट्र) में ₹567.45 करोड़ की 48 अचल संपत्तियाँ जब्त की हैं। यह कार्रवाई प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (पीएमएलए), 2002 के प्रावधानों के तहत ईडी के दिल्ली जोनल ऑफिस द्वारा की गई।
जब्त संपत्तियों का विवरण
ईडी ने प्रतीक कुमार, अंश प्रतीक कुमार तथा बीमिंग इन्फ्राडेवलपर्स, गणराज प्रॉपर्टीज और ग्रीनफील्ड एस्टेट्स लिमिटेड के नाम पर दर्ज 48 अचल संपत्तियाँ जब्त की हैं, जिनकी मौजूदा बाज़ार कीमत ₹567.45 करोड़ आँकी गई है। जाँच में सामने आया कि ये संपत्तियाँ पीएसीएल से डायवर्ट किए गए धन से खरीदी गई थीं और इसलिए इन्हें अपराध से अर्जित संपत्ति माना जाएगा।
इन संस्थाओं का मालिकाना हक और नियंत्रण प्रतीक कुमार के पास है। स्पेशल कोर्ट ने 9 अप्रैल 2025 को प्रतीक कुमार के विरुद्ध एक ओपन-एंडेड गैर-जमानती वारंट (एनबीडब्ल्यू) जारी किया है।
अब तक की कुल जब्ती
इस ताज़ा कार्रवाई के साथ ईडी ने पीएसीएल मामले में अब तक ₹30,235.21 करोड़ की चल और अचल संपत्तियाँ जब्त की हैं, जिनमें भारत और विदेश में मौजूद संपत्तियाँ दोनों शामिल हैं। गौरतलब है कि ईडी ने इस मामले में 2016 में एनफोर्समेंट केस इन्फॉर्मेशन रिपोर्ट (ईसीआईआर) दर्ज की थी और 2018 में पहली चार्जशीट दायर की थी। तब से 2022, 2025 और 2026 में छह सप्लीमेंट्री चार्जशीट भी दायर हो चुकी हैं।
घोटाले की पृष्ठभूमि
पीएसीएल मामला देश के सबसे बड़े सामूहिक निवेश घोटालों में से एक है। आरोप है कि पीएसीएल और उससे जुड़ी कंपनियों व व्यक्तियों ने कृषि भूमि की बिक्री और विकास का झाँसा देकर पूरे भारत में लाखों निवेशकों से ₹48,000 करोड़ से अधिक की राशि धोखाधड़ी से जुटाई।
निवेशकों को नकद अग्रिम भुगतान और किश्त योजनाओं का लालच दिया गया तथा उनसे एग्रीमेंट, पावर ऑफ अटॉर्नी और अन्य भ्रामक दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करवाए गए। ईडी के अनुसार, 'ज़्यादातर मामलों में जमीन कभी नहीं दी गई, जिसके परिणामस्वरूप निवेशकों का लगभग ₹48,000 करोड़ का बकाया रह गया।'
सीबीआई की भूमिका और कानूनी कार्रवाई
ईडी की जाँच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) द्वारा नई दिल्ली में भारतीय दंड संहिता (आईपीसी), 1860 की धारा 120-बी (आपराधिक षड्यंत्र) और 420 (धोखाधड़ी) के तहत दर्ज एफआईआर पर आधारित है। सीबीआई ने अब तक अवैध निवेश योजना में भूमिका के लिए 33 आरोपियों के विरुद्ध चार्जशीट और सप्लीमेंट्री चार्जशीट दायर की हैं।
प्रतीक कुमार को 20 अगस्त 2022 को दायर पहली सप्लीमेंट्री चार्जशीट में आरोपी (ए-13) बनाया गया था और स्पेशल कोर्ट ने 19 सितंबर 2022 के आदेश से इसका संज्ञान लिया था।
आगे क्या होगा
यह ताज़ा जब्ती पीएसीएल मामले में ईडी की जाँच के एक लंबे सिलसिले की कड़ी है जो एक दशक से भी अधिक समय से चल रही है। प्रतीक कुमार के विरुद्ध सक्रिय गैर-जमानती वारंट और बढ़ती जब्त संपत्तियों की सूची संकेत देती है कि एजेंसी अभी और भी कार्रवाइयाँ कर सकती है। लाखों ठगे गए निवेशकों को उनके धन की वापसी की प्रक्रिया अदालत की निगरानी में जारी है।