8 अक्टूबर 2026
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पीएसीएल फ्रॉड: ईडी ने मुंबई-पुणे में ₹567 करोड़ की 48 संपत्तियाँ जब्त कीं

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पीएसीएल फ्रॉड: ईडी ने मुंबई-पुणे में ₹567 करोड़ की 48 संपत्तियाँ जब्त कीं

सारांश

देश के सबसे बड़े निवेश घोटालों में से एक — पीएसीएल का ₹48,000 करोड़ का फर्जीवाड़ा — अब भी ईडी की जाँच के केंद्र में है। ताज़ा जब्ती ₹567.45 करोड़ की है और कुल आँकड़ा ₹30,235 करोड़ को पार कर गया है, जबकि मुख्य आरोपी प्रतीक कुमार अभी भी गैर-जमानती वारंट के बावजूद अदालत के सामने पेश नहीं हुए।

मुख्य बातें

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने 8 अक्टूबर 2026 को पीएसीएल मामले में मुंबई, पुणे और रायगढ़ में ₹567.45 करोड़ की 48 अचल संपत्तियाँ जब्त कीं।
जब्त संपत्तियाँ प्रतीक कुमार, अंश प्रतीक कुमार तथा बीमिंग इन्फ्राडेवलपर्स, गणराज प्रॉपर्टीज, ग्रीनफील्ड एस्टेट्स लिमिटेड के नाम पर दर्ज थीं।
पीएसीएल मामले में ईडी की अब तक की कुल जब्ती ₹30,235.21 करोड़ तक पहुँच गई है।
पीएसीएल पर आरोप है कि उसने लाखों निवेशकों से कृषि भूमि का झाँसा देकर ₹48,000 करोड़ से अधिक की धोखाधड़ी की।
सीबीआई ने 33 आरोपियों के विरुद्ध चार्जशीट दायर की है; प्रतीक कुमार के खिलाफ 9 अप्रैल 2025 को गैर-जमानती वारंट जारी है।
ईडी ने इस मामले में 2016 में ईसीआईआर दर्ज की और 2022, 2025, 2026 में छह सप्लीमेंट्री चार्जशीट दायर कीं।

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने 8 अक्टूबर 2026 को पर्ल्स एग्रोटेक कॉर्पोरेशन लिमिटेड (पीएसीएल) से जुड़े ₹48,000 करोड़ के सामूहिक निवेश घोटाले में मुंबई, पुणे और रायगढ़ (महाराष्ट्र) में ₹567.45 करोड़ की 48 अचल संपत्तियाँ जब्त की हैं। यह कार्रवाई प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (पीएमएलए), 2002 के प्रावधानों के तहत ईडी के दिल्ली जोनल ऑफिस द्वारा की गई।

जब्त संपत्तियों का विवरण

ईडी ने प्रतीक कुमार, अंश प्रतीक कुमार तथा बीमिंग इन्फ्राडेवलपर्स, गणराज प्रॉपर्टीज और ग्रीनफील्ड एस्टेट्स लिमिटेड के नाम पर दर्ज 48 अचल संपत्तियाँ जब्त की हैं, जिनकी मौजूदा बाज़ार कीमत ₹567.45 करोड़ आँकी गई है। जाँच में सामने आया कि ये संपत्तियाँ पीएसीएल से डायवर्ट किए गए धन से खरीदी गई थीं और इसलिए इन्हें अपराध से अर्जित संपत्ति माना जाएगा।

इन संस्थाओं का मालिकाना हक और नियंत्रण प्रतीक कुमार के पास है। स्पेशल कोर्ट ने 9 अप्रैल 2025 को प्रतीक कुमार के विरुद्ध एक ओपन-एंडेड गैर-जमानती वारंट (एनबीडब्ल्यू) जारी किया है।

अब तक की कुल जब्ती

इस ताज़ा कार्रवाई के साथ ईडी ने पीएसीएल मामले में अब तक ₹30,235.21 करोड़ की चल और अचल संपत्तियाँ जब्त की हैं, जिनमें भारत और विदेश में मौजूद संपत्तियाँ दोनों शामिल हैं। गौरतलब है कि ईडी ने इस मामले में 2016 में एनफोर्समेंट केस इन्फॉर्मेशन रिपोर्ट (ईसीआईआर) दर्ज की थी और 2018 में पहली चार्जशीट दायर की थी। तब से 2022, 2025 और 2026 में छह सप्लीमेंट्री चार्जशीट भी दायर हो चुकी हैं।

घोटाले की पृष्ठभूमि

पीएसीएल मामला देश के सबसे बड़े सामूहिक निवेश घोटालों में से एक है। आरोप है कि पीएसीएल और उससे जुड़ी कंपनियों व व्यक्तियों ने कृषि भूमि की बिक्री और विकास का झाँसा देकर पूरे भारत में लाखों निवेशकों से ₹48,000 करोड़ से अधिक की राशि धोखाधड़ी से जुटाई।

निवेशकों को नकद अग्रिम भुगतान और किश्त योजनाओं का लालच दिया गया तथा उनसे एग्रीमेंट, पावर ऑफ अटॉर्नी और अन्य भ्रामक दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करवाए गए। ईडी के अनुसार, 'ज़्यादातर मामलों में जमीन कभी नहीं दी गई, जिसके परिणामस्वरूप निवेशकों का लगभग ₹48,000 करोड़ का बकाया रह गया।'

सीबीआई की भूमिका और कानूनी कार्रवाई

ईडी की जाँच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) द्वारा नई दिल्ली में भारतीय दंड संहिता (आईपीसी), 1860 की धारा 120-बी (आपराधिक षड्यंत्र) और 420 (धोखाधड़ी) के तहत दर्ज एफआईआर पर आधारित है। सीबीआई ने अब तक अवैध निवेश योजना में भूमिका के लिए 33 आरोपियों के विरुद्ध चार्जशीट और सप्लीमेंट्री चार्जशीट दायर की हैं।

प्रतीक कुमार को 20 अगस्त 2022 को दायर पहली सप्लीमेंट्री चार्जशीट में आरोपी (ए-13) बनाया गया था और स्पेशल कोर्ट ने 19 सितंबर 2022 के आदेश से इसका संज्ञान लिया था।

आगे क्या होगा

यह ताज़ा जब्ती पीएसीएल मामले में ईडी की जाँच के एक लंबे सिलसिले की कड़ी है जो एक दशक से भी अधिक समय से चल रही है। प्रतीक कुमार के विरुद्ध सक्रिय गैर-जमानती वारंट और बढ़ती जब्त संपत्तियों की सूची संकेत देती है कि एजेंसी अभी और भी कार्रवाइयाँ कर सकती है। लाखों ठगे गए निवेशकों को उनके धन की वापसी की प्रक्रिया अदालत की निगरानी में जारी है।

संपादकीय दृष्टिकोण

235 करोड़ की संचित जब्ती प्रभावशाली लगती है, लेकिन यह घोटाले के कुल आकार — ₹48,000 करोड़ — का अभी भी लगभग दो-तिहाई ही है, और लाखों छोटे निवेशकों को अपनी मूल राशि वापस मिलने की प्रतीक्षा एक दशक से जारी है। यह मामला उजागर करता है कि भारत में बड़े वित्तीय घोटालों में त्वरित सम्पत्ति-वसूली और पीड़ित-मुआवजे के बीच की खाई कितनी गहरी है। प्रतीक कुमार के विरुद्ध गैर-जमानती वारंट होने के बावजूद उनकी अनुपस्थिति यह भी रेखांकित करती है कि भगोड़े आरोपियों तक पहुँचने की सीमाएँ अभी भी बरकरार हैं।
RashtraPress
8 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पीएसीएल घोटाला क्या है और यह कितना बड़ा है?
पीएसीएल यानी पर्ल्स एग्रोटेक कॉर्पोरेशन लिमिटेड पर आरोप है कि उसने कृषि भूमि की बिक्री और विकास का झाँसा देकर पूरे भारत में लाखों निवेशकों से ₹48,000 करोड़ से अधिक की अवैध सामूहिक निवेश योजना चलाई। ज़्यादातर मामलों में निवेशकों को जमीन कभी नहीं दी गई।
ईडी ने 8 अक्टूबर 2026 को क्या कार्रवाई की?
ईडी ने पीएमएलए, 2002 के तहत मुंबई, पुणे और रायगढ़ (महाराष्ट्र) में ₹567.45 करोड़ की 48 अचल संपत्तियाँ जब्त कीं। ये संपत्तियाँ प्रतीक कुमार और उनसे जुड़ी कंपनियों के नाम पर थीं और पीएसीएल से डायवर्ट किए गए धन से खरीदी गई बताई जाती हैं।
पीएसीएल मामले में अब तक कुल कितनी संपत्ति जब्त हो चुकी है?
ताज़ा कार्रवाई के बाद पीएसीएल मामले में ईडी की कुल जब्ती ₹30,235.21 करोड़ तक पहुँच गई है, जिसमें भारत और विदेश में मौजूद चल व अचल संपत्तियाँ दोनों शामिल हैं।
प्रतीक कुमार कौन हैं और उनके खिलाफ क्या कार्रवाई हुई है?
प्रतीक कुमार को ईडी की पहली सप्लीमेंट्री चार्जशीट (20 अगस्त 2022) में आरोपी बनाया गया था। स्पेशल कोर्ट ने 9 अप्रैल 2025 को उनके खिलाफ ओपन-एंडेड गैर-जमानती वारंट जारी किया है और ताज़ा जब्त संपत्तियाँ उन्हीं के नियंत्रण वाली संस्थाओं के नाम पर थीं।
पीएसीएल मामले में सीबीआई की क्या भूमिका है?
सीबीआई ने नई दिल्ली में आईपीसी की धारा 120-बी (आपराधिक षड्यंत्र) और 420 (धोखाधड़ी) के तहत एफआईआर दर्ज की थी, जिसके आधार पर ईडी ने अपनी जाँच शुरू की। सीबीआई ने इस मामले में 33 आरोपियों के विरुद्ध चार्जशीट और सप्लीमेंट्री चार्जशीट दायर की हैं।
राष्ट्र प्रेस
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