पाकिस्तानी वायुसेना ने अफगानिस्तान के कुनार और पक्तिका पर बमबारी की, तीन की मौत
सारांश
मुख्य बातें
पाकिस्तान की वायुसेना ने सोमवार तड़के अफगानिस्तान के कुनार और पक्तिका प्रांतों पर हवाई हमले किए, जिनमें कम से कम तीन लोगों की मौत हो गई और कई अन्य घायल हुए। अफगान मीडिया संस्थान टोलो न्यूज़ ने अफगानिस्तान के सरकारी अधिकारियों के हवाले से यह जानकारी दी। यह घटना उत्तर-पश्चिम पाकिस्तान में एक पुलिस चौकी पर हमले के ठीक दो दिन बाद सामने आई है।
कुनार प्रांत में हमले का विवरण
कुनार प्रांत के सूचना और संस्कृति विभाग के प्रमुख नजीबुल्लाह हनीफ ने बताया कि नूरगल जिले में स्थानीय समय के अनुसार तड़के तीन बजे हवाई हमला हुआ। उनके अनुसार इस हमले में तीन लोगों की जान गई, कई अन्य घायल हुए और एक इमारत भी पूरी तरह नष्ट हो गई। कुनार प्रांत पाकिस्तान की सीमा से सटा हुआ है, जो इस क्षेत्र को सीमापार तनाव का केंद्र बनाता है।
पक्तिका में भी हुए दो हमले
पक्तिका प्रांत के बरमल जिले में तड़के करीब चार बजे दो अलग-अलग हवाई हमले किए गए। अधिकारियों के अनुसार, फिलहाल इन हमलों में किसी के हताहत होने की पुष्टि नहीं हुई है। पक्तिका भी पाकिस्तान की सीमा से लगा प्रांत है और इस क्षेत्र में पहले भी तनातनी की घटनाएँ हो चुकी हैं।
पाक-अफगान तनाव की पृष्ठभूमि
यह हमला उत्तर-पश्चिम पाकिस्तान में एक पुलिस ठिकाने पर हमले के दो दिन बाद हुआ है। गौरतलब है कि फरवरी में दोनों देशों के बीच वर्षों में सबसे भीषण सैन्य संघर्ष हो चुका है। विश्लेषकों का मानना है कि ताज़ा हमलों से एक बार फिर दोनों पड़ोसी देशों के बीच बड़े सशस्त्र टकराव का खतरा उत्पन्न हो गया है। पाकिस्तान कथित तौर पर अफगानिस्तान की धरती का उपयोग कर रहे आतंकवादी समूहों के खिलाफ ये कार्रवाइयाँ करता रहा है, जबकि तालिबान सरकार इन हमलों को अपनी संप्रभुता का उल्लंघन बताती आई है।
क्षेत्रीय स्थिरता पर असर
यह ऐसे समय में आया है जब दक्षिण एशिया में पहले से ही कई मोर्चों पर तनाव बना हुआ है। पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच बिगड़ते संबंध न केवल दोनों देशों की जनता को प्रभावित करते हैं, बल्कि व्यापक क्षेत्रीय सुरक्षा समीकरण पर भी दबाव डालते हैं। सीमावर्ती प्रांतों में नागरिक आबादी इन हमलों की सबसे बड़ी शिकार बनती है।
आगे क्या होगा
अफगान अधिकारियों की ओर से अब तक कोई आधिकारिक कूटनीतिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। क्षेत्र के जानकार मानते हैं कि यदि दोनों पक्षों के बीच बातचीत का कोई रास्ता नहीं निकला, तो ये हमले और बड़े संघर्ष की भूमिका बन सकते हैं। अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नज़रें अब इस बात पर होंगी कि तालिबान प्रशासन इस पर कैसी प्रतिक्रिया देता है।