पेरिस में विक्रम मिस्री और जीन-नोएल बैरोट की द्विपक्षीय बैठक: वैश्विक चुनौतियों पर चर्चा
सारांश
मुख्य बातें
पेरिस, १३ अप्रैल (राष्ट्रीय संवाद)। विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने पेरिस में फ्रांस के यूरोप और विदेश मामलों के मंत्री जीन-नोएल बैरोट से एक महत्वपूर्ण बैठक की। इस द्विपक्षीय वार्ता में पारस्परिक सहयोग और मध्य पूर्व की वर्तमान स्थिति के साथ-साथ वैश्विक चुनौतियों पर चर्चा की गई।
फ्रांस में भारतीय दूतावास ने एक्स पोस्ट पर लिखा, “विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने फ्रांस के यूरोप और विदेश मामलों के मंत्री एच.ई. जीन-नोएल बैरोट से मुलाकात की। दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय सहयोग के विभिन्न महत्वपूर्ण क्षेत्रों, मध्य पूर्व की मौजूदा स्थिति और वैश्विक चुनौतियों पर गहन चर्चा की।”
यह बैठक अमेरिका-ईरान की इस्लामाबाद वार्ता के बेनतीजा रहने के बाद मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच हुई है।
इससे पहले, विक्रम मिस्री ने पेरिस स्थित स्वामी विवेकानंद सांस्कृतिक केंद्र (एसवीसीसी) का दौरा किया और वहां “लार द लांन्द: ओझूरदुई” प्रदर्शनी का अवलोकन किया। दूतावास के अनुसार, इस प्रदर्शनी में ४० भारतीय कलाकारों की ८० कलाकृतियां प्रदर्शित की गईं, जो भारत की समकालीन और जीवंत कलात्मक परंपराओं को उजागर करती हैं।
मिस्री रविवार को भारत-फ्रांस विदेशी कार्यालय परामर्श (एफओसी) के लिए पेरिस पहुंचे। विदेश मंत्रालय (एमईए) के अनुसार, वे फ्रांस के विदेश मंत्रालय के महासचिव मार्टिन ब्रिएन्स के साथ इस परामर्श मंडल की सह-अध्यक्षता करेंगे। दोनों पक्ष रक्षा, सिविल न्यूक्लियर ऊर्जा, अंतरिक्ष, साइबर एवं डिजिटल सुरक्षा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), नवाचार, लोगों के बीच संबंध और सांस्कृतिक सहयोग जैसे कई महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा करेंगे। इसके साथ ही, नवीनतम वैश्विक और क्षेत्रीय घटनाक्रमों पर भी विचार किया जाएगा।
फ्रांस यात्रा के बाद, विक्रम मिस्री जर्मनी जाएंगे, जहां वे जर्मन विदेश कार्यालय के स्टेट सेक्रेटरी गेजा एंड्रियास वॉन गेयर के साथ भारत-जर्मनी विदेशी कार्यालय परामर्श की सह-अध्यक्षता करेंगे।
विदेश मंत्रालय की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि यह दौरा जनवरी-फरवरी २०२६ में जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज और फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के भारत दौरे के बाद हो रहा है। यह भारत-यूरोप के बीच नियमित उच्च-स्तरीय संवाद की निरंतरता को दर्शाता है और दोनों देशों के साथ द्विपक्षीय संबंधों की समीक्षा और सहयोग को आगे बढ़ाने का एक महत्वपूर्ण अवसर प्रदान करेगा।