सुप्रीम कोर्ट का बड़ा आदेश: पटियाला नगर निगम के 28 समेत कुल 50 वार्डों में फिर होंगे चुनाव
सारांश
मुख्य बातें
सर्वोच्च न्यायालय ने 7 अक्टूबर 2026 को पंजाब नगर निकाय चुनावों के संदर्भ में एक ऐतिहासिक आदेश सुनाते हुए पटियाला नगर निगम के 28 वार्डों और मोगा जिले की बाघापुराना व धर्मकोट नगर परिषदों के कुल 22 वार्डों में नए सिरे से मतदान कराने का निर्देश दिया है। इस प्रकार पंजाब के कुल 50 वार्डों में चुनाव प्रक्रिया फिर से आयोजित की जाएगी। यह आदेश दिसंबर 2024 के निकाय चुनावों में नामांकन प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं की जांच रिपोर्ट के आधार पर आया है।
मामले की पृष्ठभूमि
दिसंबर 2024 में पंजाब में हुए नगर निकाय चुनावों के दौरान कई उम्मीदवारों ने आरोप लगाया था कि उन्हें नामांकन पत्र दाखिल करने से जबरन रोका गया और नामांकन-पत्रों के साथ हस्तक्षेप किया गया। ये शिकायतें पहले पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय पहुँचीं और वहाँ से मामला सर्वोच्च न्यायालय तक आया।
शीर्ष अदालत ने मार्च 2025 में विवादित तथ्यों की जांच के लिए एक फैक्ट-फाइंडिंग कमीशन गठित किया था। इस कमीशन की अध्यक्षता पूर्व पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय की न्यायाधीश न्यायमूर्ति निर्मलजीत कौर को सौंपी गई थी।
जांच रिपोर्ट के निष्कर्ष
न्यायमूर्ति निर्मलजीत कौर की अध्यक्षता वाले फैक्ट-फाइंडिंग कमीशन की रिपोर्ट को सर्वोच्च न्यायालय ने रिकॉर्ड पर लिया। रिपोर्ट में पटियाला नगर निगम के 28 वार्डों, बाघापुराना नगर परिषद के सभी 15 वार्डों और धर्मकोट नगर परिषद के 7 वार्डों में चुनाव प्रक्रिया प्रभावित होने तथा उम्मीदवारों को नामांकन से रोके जाने के निष्कर्ष सामने आए।
इन निष्कर्षों के आधार पर अदालत ने संबंधित वार्डों की संपूर्ण चुनाव प्रक्रिया को निरस्त कर दोबारा चुनाव कराने का आदेश दिया। गौरतलब है कि यह ऐसा दुर्लभ मामला है जिसमें शीर्ष अदालत ने नामांकन स्तर पर कथित अनियमितताओं के आधार पर पूरी चुनाव प्रक्रिया रद्द की है।
न्यायिक निगरानी व्यवस्था
सर्वोच्च न्यायालय ने नए सिरे से होने वाले चुनावों की निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए कड़ी न्यायिक निगरानी का ढाँचा तैयार किया है। नामांकन दाखिल करने से लेकर मतदान तक की पूरी प्रक्रिया की वीडियोग्राफी अनिवार्य की गई है।
इसके अलावा एक सेवानिवृत्त उच्च न्यायालय न्यायाधीश की अध्यक्षता में मॉनिटरिंग कमेटी गठित की जाएगी जो पूरी चुनाव प्रक्रिया की देखरेख करेगी। अदालत ने स्पष्ट किया कि यह पूरी प्रक्रिया छह सप्ताह के भीतर संपन्न की जानी चाहिए।
आदेश की सीमाएँ और महत्व
सर्वोच्च न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि यह आदेश इन मामलों की विशेष परिस्थितियों और तथ्यों को देखते हुए दिया गया है। अदालत ने कहा कि इसे भविष्य के उपचुनावों या अन्य मामलों के लिए सामान्य मिसाल नहीं माना जाएगा।
यह फैसला ऐसे समय में आया है जब पंजाब में नगर निकाय प्रशासन और स्थानीय चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता को लेकर सवाल उठते रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह निर्णय भविष्य में निकाय चुनावों के दौरान प्रशासनिक जवाबदेही सुनिश्चित करने में एक महत्वपूर्ण संदेश देता है।
आगे की राह
अब पंजाब राज्य चुनाव आयोग को सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशानुसार छह सप्ताह के भीतर इन 50 वार्डों में चुनाव प्रक्रिया पूरी करनी होगी। मॉनिटरिंग कमेटी के गठन और वीडियोग्राफी की व्यवस्था को लेकर जल्द ही विस्तृत दिशानिर्देश जारी होने की उम्मीद है। पटियाला और मोगा के इन वार्डों के मतदाता अब नए सिरे से अपना जनप्रतिनिधि चुन सकेंगे।