सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद अकाली दल की माँग — पंजाब राज्य चुनाव आयुक्त राज कमल चौधरी को हटाओ
सारांश
मुख्य बातें
शिरोमणि अकाली दल (SAD) ने 8 अक्टूबर 2026 को पंजाब के राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया को ज्ञापन सौंपकर राज्य चुनाव आयुक्त राज कमल चौधरी को तत्काल बर्खास्त करने की माँग की। पार्टी का तर्क है कि सर्वोच्च न्यायालय के हालिया फैसले ने दिसंबर 2024 की नगर निकाय चुनाव प्रक्रिया और नामांकन चरण पर गंभीर संवैधानिक प्रश्न खड़े किए हैं, जिससे चुनाव आयुक्त की भूमिका पर सीधा सवाल उठता है।
मुख्य आरोप और माँगें
SAD के वरिष्ठ नेता दलजीत सिंह चीमा ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि अदालत-नियुक्त तथ्य जाँच आयोग — जिसकी अध्यक्षता पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय की पूर्व न्यायाधीश जस्टिस निर्मलजीत कौर ने की — ने अपनी रिपोर्ट में पाया कि विपक्षी प्रत्याशियों के साथ मारपीट हुई, उन्हें नामांकन पत्र दाखिल करने से रोका गया, नाम वापस लेने के लिए दबाव डाला गया और फर्जी मतदान जैसी गंभीर अनियमितताएँ सामने आईं।
चीमा ने आरोप लगाया कि राज्य चुनाव आयुक्त ने चुनाव के दौरान प्रशासनिक और पुलिस तंत्र के कथित दुरुपयोग से जुड़ी शिकायतों को जानबूझकर नजरअंदाज किया। उन्होंने कहा, 'अब यह पूरी तरह साबित हो चुका है कि राज्य चुनाव आयुक्त के कार्यकाल में जमीनी स्तर के लोकतंत्र की हत्या हुई है। उन्हें पद पर बने रहने का कोई अधिकार नहीं है।'
पार्टी ने यह भी माँग की कि उन सभी अधिकारियों की जवाबदेही तय हो जिन्होंने कथित तौर पर आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार के इशारे पर चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित किया।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले का संदर्भ
गौरतलब है कि सर्वोच्च न्यायालय ने एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में निगरानी समिति गठित कर पटियाला के 28 वार्डों, बाघापुराना के सभी 15 वार्डों और धर्मकोट के 7 वार्डों में पुनर्मतदान कराने का आदेश दिया है। चीमा ने इस आदेश को SAD की जीत बताते हुए कहा कि अदालत का यह निर्णय स्पष्ट संकेत है कि राज्य चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर न्यायपालिका को भरोसा नहीं रहा। यह ऐसे समय में आया है जब पंजाब में शहरी स्थानीय निकायों की विश्वसनीयता पहले से ही विवादों में घिरी है।
पराली विवाद पर भी निशाना
इसी प्रेस वार्ता में चीमा ने मुख्यमंत्री भगवंत मान पर पराली प्रबंधन नीति को लेकर भी हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री ने पहले घोषणा की थी कि पराली जलाने वाले किसानों पर कोई कार्रवाई नहीं होगी और उन्हें ₹1,500 प्रति एकड़ सहायता दी जाएगी, लेकिन अब ड्रोन से निगरानी कर किसानों के खिलाफ मामले दर्ज किए जा रहे हैं।
SAD नेता ने सरकार से पूछा कि ₹1,500 प्रति एकड़ की सहायता राशि के लिए कोई आधिकारिक अधिसूचना जारी हुई है या नहीं, और यदि हाँ, तो यह राशि कब तक किसानों तक पहुँचेगी। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य सरकार न पराली प्रबंधन की मशीनरी मुहैया करा सकी है, न ही आर्थिक सहायता।
आम जनता और लोकतंत्र पर असर
पुनर्मतदान का आदेश पटियाला, बाघापुराना और धर्मकोट के हजारों मतदाताओं के लिए एक नई उम्मीद है, जिनके चुनावी अधिकार कथित तौर पर छीन लिए गए थे। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि पुनर्मतदान पारदर्शी ढंग से नहीं हुआ, तो पंजाब में स्थानीय निकाय चुनावों की विश्वसनीयता पर दीर्घकालिक असर पड़ सकता है।
आगे क्या होगा
राज्यपाल कार्यालय की ओर से अभी तक SAD की बर्खास्तगी माँग पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। AAP सरकार ने भी इस विशेष माँग पर अभी कोई बयान जारी नहीं किया है। सुप्रीम कोर्ट-नियुक्त निगरानी समिति के मार्गदर्शन में पुनर्मतदान की तिथि शीघ्र घोषित होने की संभावना है, जो इस पूरे विवाद की अगली अहम कड़ी होगी।