8 अक्टूबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद अकाली दल की माँग — पंजाब राज्य चुनाव आयुक्त राज कमल चौधरी को हटाओ

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद अकाली दल की माँग — पंजाब राज्य चुनाव आयुक्त राज कमल चौधरी को हटाओ

सारांश

सर्वोच्च न्यायालय ने पंजाब के तीन शहरों में पुनर्मतदान का आदेश देकर राज्य चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर अप्रत्यक्ष सवाल उठाए — अब SAD ने राज्यपाल से चुनाव आयुक्त को हटाने की माँग कर मामले को सीधे संवैधानिक टकराव की दिशा में धकेल दिया है।

मुख्य बातें

शिरोमणि अकाली दल (SAD) ने 8 अक्टूबर 2026 को राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया से राज्य चुनाव आयुक्त राज कमल चौधरी को बर्खास्त करने की माँग की।
अदालत-नियुक्त तथ्य जाँच आयोग की रिपोर्ट में मारपीट, नामांकन बाधा, दबाव और फर्जी मतदान जैसी अनियमितताएँ दर्ज हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने पटियाला के 28 , बाघापुराना के 15 और धर्मकोट के 7 वार्डों में पुनर्मतदान का आदेश दिया है।
SAD नेता दलजीत सिंह चीमा ने AAP सरकार पर प्रशासनिक और पुलिस तंत्र के दुरुपयोग का आरोप लगाया।
चीमा ने मुख्यमंत्री भगवंत मान पर पराली नीति में वादाखिलाफी का भी आरोप लगाया — ₹1,500 प्रति एकड़ सहायता और कार्रवाई न करने के वादे से पलटने का।

शिरोमणि अकाली दल (SAD) ने 8 अक्टूबर 2026 को पंजाब के राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया को ज्ञापन सौंपकर राज्य चुनाव आयुक्त राज कमल चौधरी को तत्काल बर्खास्त करने की माँग की। पार्टी का तर्क है कि सर्वोच्च न्यायालय के हालिया फैसले ने दिसंबर 2024 की नगर निकाय चुनाव प्रक्रिया और नामांकन चरण पर गंभीर संवैधानिक प्रश्न खड़े किए हैं, जिससे चुनाव आयुक्त की भूमिका पर सीधा सवाल उठता है।

मुख्य आरोप और माँगें

SAD के वरिष्ठ नेता दलजीत सिंह चीमा ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि अदालत-नियुक्त तथ्य जाँच आयोग — जिसकी अध्यक्षता पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय की पूर्व न्यायाधीश जस्टिस निर्मलजीत कौर ने की — ने अपनी रिपोर्ट में पाया कि विपक्षी प्रत्याशियों के साथ मारपीट हुई, उन्हें नामांकन पत्र दाखिल करने से रोका गया, नाम वापस लेने के लिए दबाव डाला गया और फर्जी मतदान जैसी गंभीर अनियमितताएँ सामने आईं।

चीमा ने आरोप लगाया कि राज्य चुनाव आयुक्त ने चुनाव के दौरान प्रशासनिक और पुलिस तंत्र के कथित दुरुपयोग से जुड़ी शिकायतों को जानबूझकर नजरअंदाज किया। उन्होंने कहा, 'अब यह पूरी तरह साबित हो चुका है कि राज्य चुनाव आयुक्त के कार्यकाल में जमीनी स्तर के लोकतंत्र की हत्या हुई है। उन्हें पद पर बने रहने का कोई अधिकार नहीं है।'

पार्टी ने यह भी माँग की कि उन सभी अधिकारियों की जवाबदेही तय हो जिन्होंने कथित तौर पर आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार के इशारे पर चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित किया।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले का संदर्भ

गौरतलब है कि सर्वोच्च न्यायालय ने एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में निगरानी समिति गठित कर पटियाला के 28 वार्डों, बाघापुराना के सभी 15 वार्डों और धर्मकोट के 7 वार्डों में पुनर्मतदान कराने का आदेश दिया है। चीमा ने इस आदेश को SAD की जीत बताते हुए कहा कि अदालत का यह निर्णय स्पष्ट संकेत है कि राज्य चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर न्यायपालिका को भरोसा नहीं रहा। यह ऐसे समय में आया है जब पंजाब में शहरी स्थानीय निकायों की विश्वसनीयता पहले से ही विवादों में घिरी है।

पराली विवाद पर भी निशाना

इसी प्रेस वार्ता में चीमा ने मुख्यमंत्री भगवंत मान पर पराली प्रबंधन नीति को लेकर भी हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री ने पहले घोषणा की थी कि पराली जलाने वाले किसानों पर कोई कार्रवाई नहीं होगी और उन्हें ₹1,500 प्रति एकड़ सहायता दी जाएगी, लेकिन अब ड्रोन से निगरानी कर किसानों के खिलाफ मामले दर्ज किए जा रहे हैं।

SAD नेता ने सरकार से पूछा कि ₹1,500 प्रति एकड़ की सहायता राशि के लिए कोई आधिकारिक अधिसूचना जारी हुई है या नहीं, और यदि हाँ, तो यह राशि कब तक किसानों तक पहुँचेगी। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य सरकार न पराली प्रबंधन की मशीनरी मुहैया करा सकी है, न ही आर्थिक सहायता।

आम जनता और लोकतंत्र पर असर

पुनर्मतदान का आदेश पटियाला, बाघापुराना और धर्मकोट के हजारों मतदाताओं के लिए एक नई उम्मीद है, जिनके चुनावी अधिकार कथित तौर पर छीन लिए गए थे। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि पुनर्मतदान पारदर्शी ढंग से नहीं हुआ, तो पंजाब में स्थानीय निकाय चुनावों की विश्वसनीयता पर दीर्घकालिक असर पड़ सकता है।

आगे क्या होगा

राज्यपाल कार्यालय की ओर से अभी तक SAD की बर्खास्तगी माँग पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। AAP सरकार ने भी इस विशेष माँग पर अभी कोई बयान जारी नहीं किया है। सुप्रीम कोर्ट-नियुक्त निगरानी समिति के मार्गदर्शन में पुनर्मतदान की तिथि शीघ्र घोषित होने की संभावना है, जो इस पूरे विवाद की अगली अहम कड़ी होगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो पहले से ही AAP सरकार के साथ तनावपूर्ण संबंधों में हैं, इस माँग पर कोई ठोस संवैधानिक कार्रवाई करेंगे या यह केवल दबाव की राजनीति तक सीमित रहेगी। पराली विवाद को इसी प्रेस वार्ता में उठाना यह भी दिखाता है कि SAD किसान मुद्दे को शहरी चुनाव विवाद से जोड़कर AAP के खिलाफ एक व्यापक आख्यान बना रही है — जो 2027 के विधानसभा चुनाव की पूर्वपीठिका हो सकती है।
RashtraPress
8 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अकाली दल ने पंजाब राज्य चुनाव आयुक्त को हटाने की माँग क्यों की?
SAD का कहना है कि सर्वोच्च न्यायालय ने दिसंबर 2024 के नगर निकाय चुनावों में गड़बड़ियों की पुष्टि करते हुए तीन शहरों में पुनर्मतदान का आदेश दिया है, जो चुनाव आयुक्त राज कमल चौधरी की विफलता का प्रमाण है। पार्टी का तर्क है कि ऐसे अधिकारी को पद पर रहने का अधिकार नहीं है।
सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब नगर निकाय चुनावों पर क्या फैसला दिया?
सर्वोच्च न्यायालय ने पटियाला के 28 वार्डों, बाघापुराना के सभी 15 वार्डों और धर्मकोट के 7 वार्डों में पुनर्मतदान का आदेश दिया है। एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में निगरानी समिति इस प्रक्रिया की देखरेख करेगी।
तथ्य जाँच आयोग की रिपोर्ट में क्या पाया गया?
पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय की पूर्व न्यायाधीश जस्टिस निर्मलजीत कौर की अध्यक्षता वाले आयोग ने पाया कि विपक्षी प्रत्याशियों के साथ मारपीट की गई, नामांकन दाखिल करने से रोका गया, नाम वापस लेने का दबाव बनाया गया और फर्जी मतदान हुआ।
पराली जलाने पर अकाली दल का भगवंत मान सरकार पर क्या आरोप है?
SAD नेता दलजीत सिंह चीमा के अनुसार मुख्यमंत्री भगवंत मान ने पहले वादा किया था कि पराली जलाने वाले किसानों पर कोई कार्रवाई नहीं होगी और ₹1,500 प्रति एकड़ सहायता दी जाएगी। लेकिन अब ड्रोन से निगरानी कर किसानों पर मामले दर्ज किए जा रहे हैं और सहायता राशि को लेकर कोई आधिकारिक अधिसूचना नहीं आई।
पुनर्मतदान से प्रभावित क्षेत्रों के मतदाताओं पर क्या असर होगा?
पटियाला, बाघापुराना और धर्मकोट के कुल 50 वार्डों के मतदाताओं को दोबारा मतदान का अवसर मिलेगा। सुप्रीम कोर्ट-नियुक्त निगरानी समिति की देखरेख में यह प्रक्रिया होगी, जिससे पारदर्शिता सुनिश्चित होने की उम्मीद जताई जा रही है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 8 घंटे पहले
  2. कल
  3. 2 सप्ताह पहले
  4. 2 सप्ताह पहले
  5. 1 महीना पहले
  6. 4 महीने पहले
  7. 10 महीने पहले
  8. 10 महीने पहले