सुप्रीम कोर्ट का आदेश: पटियाला नगर निगम के वार्ड 15 और 58 में फिर होंगे चुनाव
सारांश
मुख्य बातें
सर्वोच्च न्यायालय ने पंजाब के पटियाला नगर निगम के वार्ड नंबर 15 और वार्ड नंबर 58 में नए सिरे से चुनाव कराने का निर्देश दिया है। मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की पीठ ने यह आदेश 28 सितंबर को दिए गए पूर्व निर्देश में संशोधन करते हुए पारित किया। इसके साथ ही, कोर्ट ने धर्मकोट नगर परिषद के वार्ड नंबर 10 और 11 को पुनर्मतदान के दायरे में लाने की माँग वाली याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया।
मुख्य घटनाक्रम
पीठ ने अपने पूर्व आदेश के पैराग्राफ 11 और 12 में संशोधन करते हुए स्पष्ट किया कि पटियाला नगर निगम के वार्ड नंबर 15 और 58 को भी नए सिरे से चुनाव कराने वाले वार्डों की सूची में शामिल किया जाता है। कोर्ट ने आदेश में कहा, 'परिणामस्वरूप, पटियाला नगर निगम के वार्ड नंबर 15 और 58 में नए सिरे से चुनाव कराए जाएंगे।' यह निर्देश उन याचिकाओं की सुनवाई के दौरान आया जिनमें 28 सितंबर के आदेश पर स्पष्टीकरण और अतिरिक्त निर्देश माँगे गए थे।
धर्मकोट नगर परिषद पर कोर्ट का रुख
धर्मकोट नगर परिषद के वार्ड नंबर 10 और 11 को पुनर्मतदान सूची में जोड़ने की माँग वाली याचिका को सर्वोच्च न्यायालय ने स्वीकार करने से मना कर दिया। पीठ ने कहा, 'नए सिरे से चुनाव कराने के निर्देश जस्टिस निर्मलजीत कौर द्वारा सौंपी गई रिपोर्ट को पूरी तरह स्वीकार करते हुए दिए गए हैं, इसलिए हम धर्मकोट नगर परिषद के वार्ड नंबर 10 और 11 को शामिल करने की माँग वाली इस याचिका पर विचार नहीं कर सकते।' कोर्ट ने स्पष्ट किया कि ये दोनों वार्ड जस्टिस निर्मलजीत कौर की फैक्ट फाइंडिंग रिपोर्ट में शामिल नहीं थे, इसलिए उन्हें इस आदेश के दायरे में नहीं लाया जा सकता।
पृष्ठभूमि: 50 वार्डों में चुनाव का मूल आदेश
गौरतलब है कि 28 सितंबर को सर्वोच्च न्यायालय ने पंजाब के नगर निकायों के 50 वार्डों में नए सिरे से चुनाव कराने का आदेश दिया था। इनमें पटियाला जिले के 28 वार्ड और मोगा जिले के 22 वार्ड शामिल थे। यह आदेश पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय की पूर्व न्यायाधीश जस्टिस निर्मलजीत कौर के नेतृत्व में गठित जाँच आयोग की सिफारिशों पर आधारित था। आयोग ने नगर निकाय चुनावों की नामांकन-प्रक्रिया के दौरान बड़े पैमाने पर बाधा डालने के आरोपों की जाँच की थी।
धाँधली के गंभीर आरोप
आयोग की जाँच में सामने आया कि चुनाव प्रक्रिया के दौरान नामांकन पत्र छीने गए, फाड़े गए या नष्ट किए गए। इसके अलावा उम्मीदवारों के साथ मारपीट, उन्हें हिरासत में लेने और धमकाने जैसी घटनाएँ भी दर्ज की गईं। विशेष रूप से पटियाला नगर निगम के वार्ड नंबर 15 और 58 में फर्जी मतदान, एक से अधिक बार वोट डालने और मतदाताओं को डराने-धमकाने के गंभीर साक्ष्य मिले, जो इन चुनावों की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े करते थे।
निगरानी और प्रक्रिया के निर्देश
सर्वोच्च न्यायालय ने पुनर्मतदान की पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए कई महत्त्वपूर्ण निर्देश दिए हैं। पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय के एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में निगरानी समिति गठित करने का आदेश दिया गया है। बार के वरिष्ठ सदस्यों को पर्यवेक्षक नियुक्त करने, नामांकन-प्रक्रिया से लेकर मतदान तक वीडियोग्राफी कराने और पूरी चुनाव-प्रक्रिया को छह सप्ताह के भीतर पूरा करने का निर्देश भी दिया गया है। यह आदेश पंजाब में नगर निकाय चुनावों की विश्वसनीयता बहाल करने की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।