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पटना में शराबबंदी की धज्जियाँ: नशे में पकड़ा गया पुलिसकर्मी विनोद राम, मेडिकल जाँच के बाद FIR दर्ज

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पटना में शराबबंदी की धज्जियाँ: नशे में पकड़ा गया पुलिसकर्मी विनोद राम, मेडिकल जाँच के बाद FIR दर्ज

सारांश

बिहार में शराबबंदी लागू कराने वाले पुलिस विभाग का ही एक जवान नशे में धुत पकड़ा गया। पटना के खेमनीचक में ड्यूटी के बाद संदिग्ध हालत में मिले विनोद राम के खिलाफ मेडिकल जाँच की पुष्टि के बाद FIR दर्ज कर न्यायालय भेजा गया — विभागीय जवाबदेही पर बड़ा सवाल।

मुख्य बातें

पटना के खेमनीचक टीओपी में तैनात पुलिसकर्मी विनोद राम को 11 जुलाई 2025 को शराब के नशे में संदिग्ध अवस्था में पाया गया।
सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो के बाद रामकृष्णानगर थाना पुलिस ने त्वरित कार्रवाई की और डायल-112 टीम ने उन्हें थाने पहुँचाया।
मेडिकल जाँच में शराब सेवन की पुष्टि होने पर FIR दर्ज कर विनोद राम को न्यायालय में पेश किया गया।
बिहार में 2016 से पूर्ण शराबबंदी लागू है; कानून का उल्लंघन सभी के लिए दंडनीय है।
अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी रंजन कुमार ने स्पष्ट किया कि नियम उल्लंघन पर किसी को छूट नहीं दी जाएगी।

बिहार की राजधानी पटना में 12 जुलाई 2025 को एक चौंकाने वाला मामला सामने आया, जब रामकृष्णानगर थाना क्षेत्र के खेमनीचक इलाके में तैनात पुलिसकर्मी विनोद राम को कथित तौर पर शराब के नशे में पाया गया। यह तब और गंभीर हो जाता है जब ध्यान आता है कि बिहार में 2016 से पूर्ण शराबबंदी लागू है — और कानून लागू कराने की जिम्मेदारी उसी विभाग पर है जिसका यह कर्मचारी हिस्सा है।

मामले का घटनाक्रम

11 जुलाई को सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हुआ जिसमें एक पुलिसकर्मी संदिग्ध अवस्था में घूमता दिख रहा था। वीडियो की जानकारी मिलते ही रामकृष्णानगर थाना पुलिस ने त्वरित कार्रवाई की और संबंधित जवान की पहचान विनोद राम के रूप में की। डायल-112 की टीम उन्हें थाने लेकर पहुँची, जहाँ से उनकी मेडिकल जाँच कराई गई।

मेडिकल जाँच और कानूनी कार्रवाई

मेडिकल परीक्षण में शराब सेवन की पुष्टि होने के बाद विनोद राम के विरुद्ध प्राथमिकी (FIR) दर्ज की गई। इसके बाद उन्हें अग्रिम कानूनी कार्रवाई के लिए न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया गया। अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी रंजन कुमार ने बताया कि विनोद राम की ड्यूटी खेमनीचक टीओपी में लगी थी और ड्यूटी समाप्त होने के बाद वे संदिग्ध अवस्था में पाए गए।

शराबबंदी कानून और विभागीय गंभीरता

बिहार में वर्ष 2016 से लागू पूर्ण शराबबंदी कानून के तहत शराब का निर्माण, बिक्री और सेवन सभी दंडनीय अपराध हैं। राज्य सरकार और पुलिस विभाग समय-समय पर इस कानून के उल्लंघन के खिलाफ विशेष अभियान चलाते रहे हैं। ऐसे में खुद पुलिस विभाग के एक कर्मचारी का इस कानून को तोड़ते पकड़ा जाना विभाग की साख पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

पुलिस का रुख

पुलिस अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि शराबबंदी कानून के पालन में किसी भी प्रकार की लापरवाही या उल्लंघन को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा — चाहे वह किसी भी विभाग का कर्मचारी क्यों न हो। यह मामला विभागीय अनुशासन और जवाबदेही की कसौटी पर एक अहम परीक्षण बन गया है।

आगे क्या होगा

न्यायालय में पेश किए जाने के बाद विनोद राम के खिलाफ बिहार मद्यनिषेध और उत्पाद अधिनियम के तहत आगे की कार्रवाई अपेक्षित है। साथ ही विभागीय जाँच की भी संभावना है, जिसमें उनकी सेवा पर भी निर्णय लिया जा सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

फिर भी उल्लंघन की खबरें आम हैं; लेकिन जब उल्लंघनकर्ता खुद पुलिसकर्मी हो, तो विभागीय विश्वसनीयता पर सवाल उठना स्वाभाविक है। सोशल मीडिया वीडियो के दबाव में की गई कार्रवाई यह भी दर्शाती है कि सार्वजनिक निगरानी के बिना जवाबदेही कितनी कमज़ोर हो सकती है। असली परीक्षा यह है कि विभागीय जाँच में पारदर्शिता बरती जाती है या यह मामला भी न्यायालय की औपचारिकता तक सिमट कर रह जाता है।
RashtraPress
12 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पटना में पुलिसकर्मी के शराब पीने का मामला क्या है?
पटना के खेमनीचक टीओपी में तैनात पुलिसकर्मी विनोद राम को 11 जुलाई 2025 को ड्यूटी के बाद शराब के नशे में संदिग्ध अवस्था में पाया गया। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो के बाद मेडिकल जाँच हुई और पुष्टि होने पर FIR दर्ज कर उन्हें न्यायालय भेजा गया।
बिहार में शराबबंदी कानून कब से लागू है और क्या प्रावधान हैं?
बिहार में वर्ष 2016 से पूर्ण शराबबंदी कानून लागू है, जिसके तहत शराब का निर्माण, बिक्री और सेवन तीनों दंडनीय अपराध हैं। यह कानून सरकारी कर्मचारियों सहित सभी पर समान रूप से लागू होता है।
विनोद राम के खिलाफ क्या कार्रवाई की गई?
मेडिकल जाँच में शराब सेवन की पुष्टि के बाद विनोद राम के विरुद्ध रामकृष्णानगर थाने में प्राथमिकी (FIR) दर्ज की गई और उन्हें अग्रिम कानूनी कार्रवाई के लिए न्यायालय में पेश किया गया। विभागीय कार्रवाई की भी संभावना है।
इस मामले की जानकारी पुलिस को कैसे मिली?
11 जुलाई को सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हुआ जिसमें एक पुलिसकर्मी संदिग्ध अवस्था में दिख रहा था। अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी रंजन कुमार के अनुसार, वीडियो का संज्ञान लेते हुए रामकृष्णानगर थाना पुलिस ने त्वरित कार्रवाई की और डायल-112 टीम ने विनोद राम को थाने पहुँचाया।
क्या बिहार में पुलिसकर्मियों द्वारा शराबबंदी उल्लंघन के मामले पहले भी आए हैं?
बिहार में शराबबंदी लागू होने के बाद से आम नागरिकों के साथ-साथ कभी-कभी सरकारी कर्मचारियों पर भी उल्लंघन के आरोप लगते रहे हैं। पुलिसकर्मी का इस तरह पकड़ा जाना विभाग के लिए विशेष रूप से संवेदनशील माना जाता है क्योंकि उन्हीं पर कानून लागू कराने की जिम्मेदारी है।
राष्ट्र प्रेस
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