26 सितंबर 2026
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पिनाराई विजयन का चेन्निथला पर हमला: लोकायुक्त बैठक 'लोकतंत्र विरोधी', कार्यपालिका-न्यायपालिका पृथक्करण का उल्लंघन

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पिनाराई विजयन का चेन्निथला पर हमला: लोकायुक्त बैठक 'लोकतंत्र विरोधी', कार्यपालिका-न्यायपालिका पृथक्करण का उल्लंघन

सारांश

केरल में गृह मंत्री चेन्निथला की लोकायुक्त बैठक ने राज्य की राजनीति में नया भूचाल ला दिया है। विपक्ष के नेता विजयन ने इसे संविधान की आत्मा पर हमला बताया और चेन्निथला के अपने पुराने रुख का दर्पण दिखाकर यूडीएफ सरकार को कटघरे में खड़ा कर दिया।

मुख्य बातें

विपक्ष के नेता पिनाराई विजयन ने 26 सितंबर 2026 को गृह मंत्री रमेश चेन्निथला द्वारा लोकायुक्त व उप-लोकायुक्तों के साथ बुलाई गई बैठक को 'लोकतंत्र विरोधी' करार दिया।
बैठक में लोकायुक्त, उप-लोकायुक्त, अभियोजन महानिदेशक आसफ अली , गृह विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव और विधि सचिव उपस्थित थे।
विजयन ने कहा कि किसी मंत्री का लोकायुक्त को सीधे बुलाना कार्यपालिका-न्यायपालिका पृथक्करण के विरुद्ध है और केरल लोकायुक्त अधिनियम की भावना का उल्लंघन है।
विजयन ने चेन्निथला के पुराने रुख का हवाला दिया, जिन्होंने खुद केरल उच्च न्यायालय में लोकायुक्त संशोधनों के विरुद्ध याचिका दायर की थी।
इस विवाद से एलडीएफ और यूडीएफ के बीच लोकायुक्त की स्वायत्तता को लेकर नए राजनीतिक संघर्ष के संकेत मिल रहे हैं।

केरल में विपक्ष के नेता पिनाराई विजयन ने शनिवार, 26 सितंबर 2026 को तिरुवनंतपुरम में गृह मंत्री रमेश चेन्निथला द्वारा लोकायुक्त और उप-लोकायुक्तों के साथ बुलाई गई बैठक को 'बेहद गंभीर' और 'लोकतंत्र विरोधी' करार देते हुए कड़ी आलोचना की। विजयन ने आरोप लगाया कि संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा (यूडीएफ) सरकार एक स्वतंत्र संवैधानिक संस्था को कार्यपालिका की मुट्ठी में लाने का प्रयास कर रही है।

बैठक में कौन-कौन था मौजूद

विवादास्पद बैठक में लोकायुक्त, उप-लोकायुक्त के अलावा अभियोजन महानिदेशक आसफ अली, गृह विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव और विधि सचिव भी उपस्थित थे। विजयन ने वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों और अभियोजन प्रमुख की एक साथ उपस्थिति पर सवाल उठाते हुए कहा कि इस तरह की सभा लोकायुक्त की निष्पक्षता पर गंभीर संदेह उत्पन्न कर सकती है।

विजयन का मुख्य तर्क: पृथक्करण का सिद्धांत

विजयन ने स्पष्ट शब्दों में कहा, 'किसी मंत्री द्वारा लोकायुक्त और उप-लोकायुक्तों को सीधे बुलाना कार्यपालिका और न्यायपालिका के पृथक्करण के मूल सिद्धांत के विरुद्ध है।' उन्होंने कहा कि यह कदम संविधान और केरल लोकायुक्त अधिनियम की मूल भावना को कमज़ोर करता है। उनके अनुसार, गृह मंत्री को एक स्वतंत्र रूप से कार्यरत संस्था के प्रमुखों को इस तरह तलब करने का कोई अधिकार नहीं है।

लोकायुक्त की शक्तियाँ और दायरा

केरल लोकायुक्त को लोक सेवकों के विरुद्ध भ्रष्टाचार, भाई-भतीजावाद और सत्ता के दुरुपयोग सहित अनेक प्रकार के आरोपों की स्वतंत्र जाँच का अधिकार प्राप्त है। इसके दायरे में मुख्यमंत्री, मंत्री, विधायक और वरिष्ठ सरकारी अधिकारी सभी आते हैं। संस्था के पास साक्ष्य प्राप्त करने, गवाहों को तलब करने, जाँच करने और लोक सेवकों के विरुद्ध रिपोर्ट प्रस्तुत करने की व्यापक शक्तियाँ हैं।

यूडीएफ का पुराना रुख और विरोधाभास

विजयन ने यूडीएफ के पूर्व रुख की याद दिलाते हुए तीखा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि जब वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (एलडीएफ) सरकार लोकायुक्त अधिनियम में संशोधन लाई थी, तब यूडीएफ के नेताओं ने उसका पुरज़ोर विरोध करते हुए संस्था की स्वायत्तता का बचाव किया था। उन्होंने यहाँ तक कि तत्कालीन राज्यपाल से संपर्क कर यह आरोप लगाया था कि ये बदलाव संस्था को कमज़ोर कर देंगे। गौरतलब है कि गृह मंत्री रमेश चेन्निथला ने स्वयं उन संशोधनों के विरुद्ध केरल उच्च न्यायालय में याचिका दायर की थी, जिसमें तर्क दिया गया था कि ये लोकायुक्त की न्यायिक शक्तियों का अतिक्रमण हैं। उच्च न्यायालय ने बाद में वह याचिका खारिज कर दी थी।

आगे क्या होगा

विजयन ने सरकार को स्पष्ट चेतावनी दी कि 'ऐसा कदम नहीं दोहराया जाना चाहिए जिससे लोकायुक्त की विश्वसनीयता को ठेस पहुँचे।' उन्होंने माँग की कि इस संस्था को बिना किसी हस्तक्षेप के स्वतंत्र रूप से कार्य करने की अनुमति दी जाए। यह टकराव एलडीएफ विपक्ष और यूडीएफ सरकार के बीच लोकायुक्त की स्वायत्तता को लेकर एक नई और तीखी राजनीतिक लड़ाई की शुरुआत का संकेत देता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि कार्यपालिका के स्पष्ट दूरी बनाए रखने से आती है।
RashtraPress
26 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

लोकायुक्त बैठक विवाद क्या है?
केरल के गृह मंत्री रमेश चेन्निथला ने लोकायुक्त और उप-लोकायुक्तों के साथ एक बैठक बुलाई, जिसमें वरिष्ठ सरकारी अधिकारी भी शामिल थे। विपक्ष के नेता पिनाराई विजयन ने इसे कार्यपालिका-न्यायपालिका पृथक्करण के विरुद्ध और संविधान तथा केरल लोकायुक्त अधिनियम की भावना का उल्लंघन बताया।
पिनाराई विजयन ने इस बैठक पर आपत्ति क्यों जताई?
विजयन का तर्क है कि किसी मंत्री द्वारा एक स्वतंत्र न्यायिक संस्था के प्रमुखों को सीधे तलब करना कार्यपालिका के हस्तक्षेप का संकेत है। उन्होंने कहा कि इस तरह की सभा लोकायुक्त की निष्पक्षता पर संदेह उत्पन्न कर सकती है और संस्था की विश्वसनीयता को नुकसान पहुँचाती है।
केरल लोकायुक्त क्या होता है और इसके क्या अधिकार हैं?
केरल लोकायुक्त एक स्वतंत्र संवैधानिक संस्था है जिसे लोक सेवकों के विरुद्ध भ्रष्टाचार, भाई-भतीजावाद और सत्ता के दुरुपयोग की जाँच का अधिकार है। इसके दायरे में मुख्यमंत्री, मंत्री, विधायक और वरिष्ठ सरकारी अधिकारी सभी आते हैं, और इसे साक्ष्य प्राप्त करने तथा गवाहों को तलब करने की शक्ति प्राप्त है।
चेन्निथला और लोकायुक्त को लेकर उनका पुराना रुख क्या था?
रमेश चेन्निथला ने विपक्ष में रहते हुए पिछली एलडीएफ सरकार द्वारा लाए गए लोकायुक्त संशोधनों के विरुद्ध केरल उच्च न्यायालय में याचिका दायर की थी। उन्होंने तर्क दिया था कि वे संशोधन लोकायुक्त की न्यायिक शक्तियों का अतिक्रमण हैं, हालाँकि उच्च न्यायालय ने याचिका खारिज कर दी थी।
इस विवाद का केरल की राजनीति पर क्या असर होगा?
यह विवाद एलडीएफ विपक्ष और यूडीएफ सरकार के बीच लोकायुक्त की स्वायत्तता को लेकर एक नई राजनीतिक लड़ाई की शुरुआत का संकेत देता है। विजयन ने सरकार को चेतावनी दी है कि ऐसे कदम दोहराने से संस्था की विश्वसनीयता को ठेस पहुँचेगी।
राष्ट्र प्रेस
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