पीएम किसान सम्मान निधि 2030-31 तक बढ़ी, लातेहार के किसानों ने कहा — साहूकारों के कर्ज से मिली मुक्ति
सारांश
मुख्य बातें
केंद्र सरकार द्वारा पीएम किसान सम्मान निधि योजना की अवधि 2030-31 तक बढ़ाए जाने के फैसले से झारखंड के लातेहार जिले के किसानों में उत्साह का माहौल है। 2 अगस्त को जिले के अनेक किसानों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि सीधे बैंक खाते में मिलने वाली आर्थिक सहायता ने उन्हें साहूकारों के चंगुल से बाहर निकाला है।
किसानों की प्रतिक्रिया
लातेहार के किसान शशि भूषण पाठक ने कहा, 'योजना को 2026 से बढ़ाकर 2030-31 तक किया जाना किसानों के लिए बहुत अच्छी व्यवस्था है। पहले यह 2026 तक थी, अब 6 साल और बढ़ गई है। इससे जो किसान कर्ज लेकर खेती करते थे उन्हें मुक्ति मिल गई है। खाद-बीज के लिए अब कर्ज नहीं लेना पड़ता, समय पर पैसे की व्यवस्था हो जा रही है।'
पाठक ने यह भी सुझाव दिया कि यदि एक किस्त में मिलने वाली ₹2,000 की राशि को बढ़ाकर ₹3,000 कर दिया जाए तो किसानों को और अधिक लाभ होगा। उन्होंने खाद की उपलब्धता और मूल्य नियंत्रण की भी माँग की।
खेती में निवेश हुआ आसान
किसान श्याम कुमार ने बताया, 'पहले गाँव में फसल के समय बीज खरीदने के लिए पैसा नहीं होता था और लोग साहूकारों से कर्ज लेते थे। अब योजना से मिलने वाले पैसे से धान, गेहूं और आलू का बीज खरीदा जा रहा है। किसी को कर्ज चुकाना नहीं पड़ता। 2026 से बढ़ाकर 2031 तक करना पीएम का सराहनीय कदम है।'
चंदवा के किसान बैद्यनाथ ने कहा कि योजना से मिलने वाली राशि से उन्हें धान, मकई, अरहर, सरसों की खेती और आलू रोपने में सहायता मिलती है। उन्होंने प्रधानमंत्री के इस कदम की सराहना की।
आम जनता पर असर
लातेहार जिले के कई अन्य किसानों ने भी पुष्टि की कि योजना के अंतर्गत मिलने वाली आर्थिक मदद से वे अब खेती में निवेश कर पा रहे हैं। गौरतलब है कि पहले बीज खरीदने के लिए पैसे न होने की स्थिति में किसान अधिक ब्याज दर पर साहूकारों से कर्ज लेने को मजबूर होते थे, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति और कमज़ोर होती थी। योजना ने इस चक्र को तोड़ने में सहायता की है।
योजना की पृष्ठभूमि
पीएम किसान सम्मान निधि योजना के तहत पात्र किसानों को प्रतिवर्ष ₹6,000 की राशि तीन समान किस्तों में सीधे उनके बैंक खाते में हस्तांतरित की जाती है। केंद्र सरकार के इस निर्णय से झारखंड सहित देशभर के लाखों किसानों को दीर्घकालिक आर्थिक सुरक्षा मिलने की उम्मीद है। यह ऐसे समय में आया है जब ग्रामीण कृषि क्षेत्र में खेती की लागत लगातार बढ़ रही है।
आगे की राह
किसानों की ओर से प्रति किस्त राशि बढ़ाने और खाद की उपलब्धता सुनिश्चित करने की माँगें सामने आई हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि योजना की दीर्घकालिक निरंतरता ग्रामीण कृषि अर्थव्यवस्था को स्थिरता प्रदान करेगी और किसानों की साहूकारों पर निर्भरता को और कम करेगी।