पीएम मोदी के विदेश दौरों से किसानों की आय बढ़ेगी: पुणे के किसान हाजी नाजिम शेख ने की कृषि विजन की तारीफ

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पीएम मोदी के विदेश दौरों से किसानों की आय बढ़ेगी: पुणे के किसान हाजी नाजिम शेख ने की कृषि विजन की तारीफ

सारांश

पुणे के किसान हाजी नाजिम शेख का कहना है कि पीएम मोदी के विदेश दौरे और मिलेट्स को वैश्विक मंच पर ले जाने के प्रयास किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में निर्णायक कदम हैं। संयुक्त राष्ट्र द्वारा 2023 को अंतर्राष्ट्रीय मिलेट्स वर्ष घोषित करना इसी कृषि कूटनीति का परिणाम बताया जा रहा है।

मुख्य बातें

पुणे के किसान हाजी नाजिम शेख ने 21 मई 2026 को पीएम मोदी के कृषि विजन और विदेश दौरों की सराहना की।
शेख के अनुसार, पीएम के वैश्विक प्रयासों से भविष्य में किसानों की आमदनी बढ़ने की संभावना है।
संयुक्त राष्ट्र ने 2023 को 'अंतर्राष्ट्रीय मिलेट्स वर्ष' घोषित किया — भारत की पहल पर।
बाजरा, ज्वार और रागी जैसे मोटे अनाज अब वैश्विक स्तर पर पहचाने जा रहे हैं।
वैश्विक खाद्य अनिश्चितता के बीच भारत की कृषि कूटनीति को जमीनी स्तर पर समर्थन मिल रहा है।

पुणे के प्रगतिशील किसान हाजी नाजिम शेख ने 21 मई 2026 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के वैश्विक कृषि प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि जब भी पीएम विदेश दौरों पर जाते हैं और भारतीय कृषि उत्पादों की बात करते हैं, तो इससे किसानों की आमदनी बढ़ने का मार्ग प्रशस्त होता है। उनका यह बयान ऐसे समय में आया है जब वैश्विक खाद्य सुरक्षा को लेकर अंतरराष्ट्रीय मंचों पर चर्चा तेज है।

किसान की राय: विदेश दौरों का कृषि पर असर

हाजी नाजिम शेख ने कहा, 'भारत को हमेशा कृषि प्रधान देश माना जाता है। कृषि प्रधान देश के प्रधानमंत्री जब भी दूसरे देशों में जाते हैं, वे कृषि की बात करते हैं और किसानों की फिक्र करते हैं। इससे भविष्य में किसानों को जरूर लाभ मिलेगा और उनकी आय भी बढ़ेगी।' उनका मानना है कि अनाज को लेकर पूरी दुनिया में जो अनिश्चितता बनी रहती है, उस परिस्थिति में प्रधानमंत्री मोदी के प्रयास निश्चित रूप से सफल होंगे।

मिलेट्स को वैश्विक पहचान दिलाने की तारीफ

पुणे के किसान हाजी नाजिम शेख ने मोटे अनाज — यानी मिलेट्स (बाजरा, ज्वार और रागी) — को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रोत्साहित करने के लिए प्रधानमंत्री के विजन की विशेष प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि पीएम मोदी के ठोस प्रयासों के कारण ही भारत का यह पारंपरिक और पौष्टिक आहार आज दुनिया भर की डाइनिंग टेबल तक पहुँच सका है।

संयुक्त राष्ट्र और अंतर्राष्ट्रीय मिलेट्स वर्ष

हाजी नाजिम शेख ने कहा, 'पीएम मोदी ने वैश्विक मंचों पर हमेशा भारत की बात रखी है। इसी प्रयास के परिणामस्वरूप संयुक्त राष्ट्र ने 2023 को 'अंतर्राष्ट्रीय मिलेट्स (मोटा अनाज) वर्ष' घोषित किया। इसका पूरा श्रेय प्रधानमंत्री मोदी को जाता है।' गौरतलब है कि भारत की पहल पर संयुक्त राष्ट्र महासभा ने यह निर्णय लिया था, जिसे वैश्विक कृषि कूटनीति की एक बड़ी उपलब्धि माना जाता है।

ज़मीनी स्तर पर बढ़ती स्वीकार्यता

वैश्विक मंचों पर भारत के बढ़ते प्रभाव और देश के पारंपरिक खान-पान को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने के प्रयासों की सराहना अब जमीनी स्तर पर भी होने लगी है। पुणे जैसे कृषि-समृद्ध क्षेत्र के किसानों का यह नजरिया दर्शाता है कि कृषि कूटनीति का सकारात्मक संदेश ग्रामीण भारत तक पहुँच रहा है। आने वाले समय में यह देखना महत्त्वपूर्ण होगा कि इन वैश्विक प्रयासों का लाभ किस हद तक सीधे किसानों की आमदनी में परिलक्षित होता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि वैश्विक मंचों पर की गई घोषणाएँ सीधे किसानों की आमदनी में कितना और कब परिलक्षित होती हैं। मिलेट्स को अंतरराष्ट्रीय पहचान मिलना निःसंदेह एक कूटनीतिक सफलता है, परंतु निर्यात के आँकड़े और किसानों को मिलने वाला न्यूनतम समर्थन मूल्य इस सफलता की असली कसौटी हैं। कृषि कूटनीति तब ही सार्थक होती है जब उसका लाभ मंडी की कीमतों और किसान की जेब तक पहुँचे — केवल वैश्विक ब्रांडिंग से नहीं।
RashtraPress
21 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

हाजी नाजिम शेख कौन हैं और उन्होंने क्या कहा?
हाजी नाजिम शेख पुणे के एक प्रगतिशील किसान हैं, जिन्होंने पीएम मोदी के विदेश दौरों और कृषि विजन की सराहना की है। उनका कहना है कि प्रधानमंत्री के वैश्विक प्रयासों से भविष्य में किसानों की आमदनी बढ़ेगी।
पीएम मोदी के विदेश दौरों का किसानों की आय से क्या संबंध है?
किसान हाजी नाजिम शेख के अनुसार, पीएम मोदी जब विदेशों में भारतीय कृषि उत्पादों और किसानों की बात करते हैं, तो इससे वैश्विक बाजारों में भारतीय उत्पादों की माँग बढ़ती है, जो अंततः किसानों की आमदनी में वृद्धि का कारण बन सकती है।
संयुक्त राष्ट्र ने 2023 को अंतर्राष्ट्रीय मिलेट्स वर्ष क्यों घोषित किया?
भारत की पहल पर संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 2023 को 'अंतर्राष्ट्रीय मिलेट्स (मोटा अनाज) वर्ष' घोषित किया था। किसान हाजी नाजिम शेख इसका श्रेय पीएम मोदी के वैश्विक मंचों पर किए गए प्रयासों को देते हैं।
मिलेट्स में कौन-कौन से अनाज आते हैं?
मिलेट्स यानी मोटे अनाज में बाजरा, ज्वार और रागी प्रमुख हैं। ये पारंपरिक भारतीय आहार का हिस्सा हैं और अब वैश्विक स्वास्थ्य जागरूकता के चलते अंतरराष्ट्रीय बाजारों में इनकी माँग बढ़ रही है।
पुणे के किसान भारत की कृषि कूटनीति को कैसे देखते हैं?
पुणे के किसान हाजी नाजिम शेख जैसे जमीनी आवाजें भारत की कृषि कूटनीति को सकारात्मक दृष्टि से देखती हैं। उनका मानना है कि वैश्विक खाद्य अनिश्चितता के दौर में पीएम मोदी के प्रयास किसानों के हित में सफल होंगे।
राष्ट्र प्रेस
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