बीजू पटनायक को इंडोनेशिया संसद में मोदी की श्रद्धांजलि, धर्मेंद्र प्रधान ने बताया ओडिशा का गौरव
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने 8 जुलाई 2026 को भुवनेश्वर में मीडिया से बातचीत में कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने इंडोनेशिया दौरे के दौरान वहाँ की संसद को संबोधित करते हुए ओडिशा के पूर्व मुख्यमंत्री बीजू पटनायक के ऐतिहासिक योगदान को याद किया, जो राज्य के लिए गर्व का क्षण है। उन्होंने कहा कि इस उल्लेख से न केवल भारत का मान बढ़ा, बल्कि ओडिशा की वैश्विक पहचान भी और सुदृढ़ हुई।
बीजू पटनायक और इंडोनेशिया का ऐतिहासिक संबंध
बीजू पटनायक ने इंडोनेशिया की स्वतंत्रता संग्राम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी, जिसके कारण वहाँ की जनता के मन में उनके प्रति विशेष सम्मान और स्नेह आज भी जीवित है। धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने इंडोनेशिया की संसद के मंच से इस ऐतिहासिक संबंध को रेखांकित कर भारत और ओडिशा दोनों का गौरव बढ़ाया है। गौरतलब है कि बीजू पटनायक और इंडोनेशिया के बीच यह संबंध दशकों पुराना है और दोनों देशों की साझी स्मृति का हिस्सा है।
इंडोनेशिया सरकार का सर्वोच्च सम्मान
धर्मेंद्र प्रधान ने यह भी बताया कि इंडोनेशिया सरकार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपने देश के सर्वोच्च राष्ट्रीय सम्मान से नवाज़ा। उन्होंने इसे भारत और इंडोनेशिया के बीच मज़बूत होते द्विपक्षीय संबंधों तथा दोनों देशों की गहरी ऐतिहासिक मित्रता का प्रमाण बताया। ओडिशा की जनता की ओर से उन्होंने प्रधानमंत्री का आभार व्यक्त किया कि उन्होंने अंतरराष्ट्रीय मंच पर राज्य की गौरवशाली विरासत को सम्मान दिया।
आईआईएम बेंगलुरु को इंडोनेशिया में विदेशी परिसर की मंजूरी
शिक्षा के क्षेत्र में एक अहम घोषणा करते हुए धर्मेंद्र प्रधान ने बताया कि शिक्षा मंत्रालय ने भारतीय प्रबंधन संस्थान बेंगलुरु (IIM Bengaluru) को इंडोनेशिया में अपना पहला विदेशी परिसर स्थापित करने की अनुमति प्रदान की है। उन्होंने इसे भारत की ज्ञान परंपरा और आधुनिक शिक्षा मॉडल की वैश्विक स्वीकार्यता का प्रमाण बताया, न कि केवल किसी एक संस्थान का विस्तार।
भारतीय उच्च शिक्षा का वैश्विक विस्तार
धर्मेंद्र प्रधान ने रेखांकित किया कि भारतीय उच्च शिक्षा संस्थानों की अंतरराष्ट्रीय उपस्थिति लगातार बढ़ रही है। IIM का परिसर दुबई में स्थापित हो चुका है, IIT अबू धाबी में अपनी पहचान दर्ज करा चुका है और अफ्रीकी देशों में भी भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों के विस्तार की दिशा में काम जारी है। यह ऐसे समय में आया है जब भारत अपनी राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत वैश्विक शैक्षिक केंद्र बनने की महत्वाकांक्षा रखता है।
आगे की राह
इंडोनेशिया में IIM बेंगलुरु के विदेशी परिसर की स्थापना भारत-इंडोनेशिया शैक्षिक सहयोग को नई दिशा देगी। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के संस्थागत विस्तार से दोनों देशों के बीच लोगों से लोगों के संपर्क और आर्थिक साझेदारी को भी बल मिलेगा। भारत की यह शैक्षिक कूटनीति आने वाले वर्षों में और विस्तृत रूप लेती दिखेगी।