विश्वकर्मा जयंती 2026: PM मोदी ने एक्स पर सुभाषित साझा कर शिल्पकारों को दी शुभकामनाएं
सारांश
मुख्य बातें
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 17 सितंबर 2026 को भगवान विश्वकर्मा जयंती के पावन अवसर पर एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर सुभाषित साझा करते हुए देशभर के शिल्पकारों और कारीगरों को हार्दिक शुभकामनाएं दीं। प्रधानमंत्री ने इस अवसर को 'देवशिल्पी से जुड़ा दिव्य अवसर' बताते हुए निर्माण कार्यों में लगे हुनरमंद साथियों की विशेष सराहना की।
PM मोदी का संदेश
प्रधानमंत्री ने अपनी पोस्ट में लिखा, 'आप सभी को भगवान विश्वकर्मा जयंती की बहुत-बहुत शुभकामनाएं। देवशिल्पी से जुड़े इस दिव्य अवसर पर निर्माण कार्यों में जुटे देशभर के शिल्पकारों एवं हुनरमंद साथियों को मेरा विशेष अभिनंदन।' उन्होंने आगे जोड़ा कि शिल्पकारों का कौशल एवं परिश्रम विकसित और आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को साकार करने में 'अत्यंत महत्वपूर्ण' है।
मोदी ने यह भी कहा कि 'राष्ट्र के नवनिर्माण की दिशा में आपके प्रयासों को हरसंभव प्रोत्साहन मिलता रहे, इसके लिए हम पूरी तरह से प्रतिबद्ध हैं।' यह संदेश विश्वकर्मा जयंती पर प्रधानमंत्री की वार्षिक परंपरा के अनुरूप है, जिसमें वे देश के श्रमिक वर्ग और कारीगर समुदाय से सीधे संवाद करते हैं।
साझा किया गया श्लोक
प्रधानमंत्री ने विश्वकर्मा अष्टकम् (विश्वकर्मा स्तोत्रम्) का एक श्लोक भी साझा किया — 'अनादिरप्रमेयश्च अरूपश्च जयाजयः। लोकरूपो जगन्नाथः विश्वकर्मन्नमो नमः॥' — जिसका अर्थ है कि भगवान विश्वकर्मा अनादि और अप्रमेय हैं, उनका कोई एक निश्चित रूप नहीं है, वे जय-पराजय से परे हैं, यह संपूर्ण जगत उन्हीं का स्वरूप है और वे इसके पालनकर्ता हैं।
इस श्लोक के माध्यम से भगवान विश्वकर्मा को उनकी समग्र दिव्यता में नमन किया गया है — जो अरूप (निराकार), अनादि (जिसकी कोई शुरुआत न हो) और अप्रमेय (तर्क-प्रमाण से परे) हैं। लोकमान्यता में भगवान विश्वकर्मा को सृष्टि के दिव्य शिल्पकार माना जाता है, जिन्होंने देवताओं के नगरों और अस्त्रों का निर्माण किया था।
विश्वकर्मा जयंती का महत्व
भारत में विश्वकर्मा जयंती प्रतिवर्ष 17 सितंबर को मनाई जाती है। इस दिन कारखानों, औद्योगिक प्रतिष्ठानों, इंजीनियरिंग संस्थानों और बढ़ई, लोहार, सुनार जैसे शिल्प समुदायों में विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। यह पर्व भारत के विशाल कारीगर और श्रमिक वर्ग के लिए सांस्कृतिक और धार्मिक रूप से विशेष महत्व रखता है।
गौरतलब है कि केंद्र सरकार ने 2023 में 'पीएम विश्वकर्मा योजना' की शुरुआत की थी, जिसके तहत पारंपरिक शिल्पकारों और कारीगरों को प्रशिक्षण, ऋण और बाज़ार से जुड़ाव का समर्थन दिया जाता है। इस संदर्भ में प्रधानमंत्री की शुभकामनाएं सरकार की उस व्यापक नीति की निरंतरता को भी दर्शाती हैं।
आत्मनिर्भर भारत से जुड़ाव
प्रधानमंत्री का यह संदेश 'आत्मनिर्भर भारत' और 'विकसित भारत' के उनके नीतिगत लक्ष्यों से स्पष्ट रूप से जुड़ा है। शिल्पकारों और हुनरमंद कामगारों को राष्ट्र-निर्माण में 'अत्यंत महत्वपूर्ण' बताकर मोदी ने यह संकेत दिया कि सरकार पारंपरिक कौशल को आधुनिक अर्थव्यवस्था की मुख्यधारा से जोड़ने के प्रयासों को जारी रखेगी। आने वाले दिनों में इस दिशा में नई नीतिगत घोषणाओं की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।