28 अगस्त 2026
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विश्व संस्कृत दिवस 2025: PM मोदी ने संस्कृत को बताया भारत के ज्ञान और चिंतन की वाहक, दर्जनों नेताओं ने दी शुभकामनाएं

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विश्व संस्कृत दिवस 2025: PM मोदी ने संस्कृत को बताया भारत के ज्ञान और चिंतन की वाहक, दर्जनों नेताओं ने दी शुभकामनाएं

सारांश

श्रावण पूर्णिमा पर मनाए जाने वाले विश्व संस्कृत दिवस पर PM मोदी से लेकर कई राज्यों के मुख्यमंत्रियों तक — सभी ने एक स्वर में संस्कृत को भारत की ज्ञान-परंपरा की आत्मा बताया और इसे नई पीढ़ी तक पहुँचाने का संकल्प दोहराया।

मुख्य बातें

28 अगस्त 2025 को विश्व संस्कृत दिवस (श्रावण पूर्णिमा) पर PM नरेंद्र मोदी ने संस्कृत को भारत के ज्ञान, चिंतन और रचनात्मकता की वाहक बताया।
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला ने वेद, उपनिषद, गणित, खगोल और आयुर्वेद में संस्कृत के योगदान को रेखांकित किया।
केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल और अर्जुन राम मेघवाल ने संस्कृत को 'सर्वविद्यानां जननी' बताते हुए विदेशों में बढ़ते आकर्षण का उल्लेख किया।
UP CM योगी आदित्यनाथ , MP CM मोहन यादव , राजस्थान CM भजनलाल शर्मा , बिहार CM सम्राट चौधरी और दिल्ली CM रेखा गुप्ता ने संस्कृत संरक्षण का संकल्प दोहराया।
केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि PM मोदी के मार्गदर्शन में संस्कृत को आधुनिक युग में जीवंत रखने के प्रयास जारी हैं।

28 अगस्त 2025 को विश्व संस्कृत दिवस (श्रावण पूर्णिमा) के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला, अनेक केंद्रीय मंत्रियों और कई राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने संस्कृत भाषा के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त की और इसके संरक्षण व प्रचार-प्रसार का आह्वान किया। नेताओं ने एक स्वर में संस्कृत को भारत की ज्ञान-परंपरा, दर्शन और सांस्कृतिक विरासत की आधारशिला बताया।

प्रधानमंत्री मोदी का संदेश

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर संस्कृत में पोस्ट करते हुए लिखा कि यह भाषा भारत के ज्ञान, चिंतन और रचनात्मकता की निरंतर वाहक रही है और इसका सकारात्मक प्रभाव आज भी अनेक क्षेत्रों में देखा जा सकता है। उन्होंने भारत और विश्व भर में संस्कृत पढ़ने, पढ़ाने और इसकी कालजयी धरोहर को अगली पीढ़ी तक पहुँचाने में जुटे सभी लोगों की सराहना की।

लोकसभा अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्रियों की प्रतिक्रिया

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला ने एक्स पर लिखा कि संस्कृत केवल संवाद की भाषा नहीं, बल्कि भारत के ज्ञान, चिंतन, दर्शन और संस्कृति की जीवंत धरोहर है। उन्होंने वेदों से उपनिषदों तक, श्रीमद्भगवद्गीता से रामायण-महाभारत तक और आयुर्वेद, गणित, खगोल तथा साहित्य में संस्कृत के योगदान को रेखांकित किया। बिड़ला ने 'वसुधैव कुटुम्बकम्' और 'सर्वे भवन्तु सुखिनः' जैसे सार्वभौमिक विचारों का उल्लेख करते हुए कहा कि संस्कृत ने समस्त मानवता को प्रेम, शांति और कल्याण का संदेश दिया है।

केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल और केंद्रीय कानून एवं न्याय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने एक्स पर संस्कृत को 'सर्वविद्यानां जननी' अर्थात सभी विद्याओं की जननी बताया। दोनों ने इस भाषा को वैज्ञानिक, मधुर और प्राचीन बताते हुए कहा कि देश के साथ-साथ विदेशों में भी संस्कृत के प्रति आकर्षण बढ़ रहा है।

केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के मार्गदर्शन में भारत संस्कृत को आधुनिक युग में जीवंत और जन-जन तक पहुँचाने के लिए निरंतर प्रयासरत है।

मुख्यमंत्रियों का आह्वान

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एक्स पर 'भारतस्य प्रतिष्ठे द्वे संस्कृतं संस्कृतिस्तथा' उद्धृत करते हुए संस्कृत को भारत की सनातन ज्ञान-परंपरा, दर्शन, विज्ञान और संस्कृति की दिव्य अभिव्यक्ति बताया। उन्होंने सभी से देवभाषा के संरक्षण और प्रचार-प्रसार का संकल्प लेने का आग्रह किया।

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने संस्कृत को भारत की ज्ञान, संस्कृति और गौरवशाली परंपरा की आधारशिला बताया। राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने संस्कृत को सनातन संस्कृति, ज्ञान-विज्ञान और आध्यात्मिक परंपरा की नींव कहा। बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने इसे समृद्ध संस्कृति और गौरवशाली विरासत की अमूल्य धरोहर बताया।

दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने एक्स पर 'जयतु संस्कृतम्, जयतु भारतम्' के उद्घोष के साथ संस्कृत को महान सभ्यता और सांस्कृतिक चेतना की अमूल्य धरोहर बताया।

विश्व संस्कृत दिवस का महत्व

गौरतलब है कि विश्व संस्कृत दिवस प्रत्येक वर्ष श्रावण पूर्णिमा को मनाया जाता है। संस्कृत को विश्व की प्राचीनतम व्याकरणिक रूप से सुव्यवस्थित भाषाओं में गिना जाता है और यह वेदों, उपनिषदों, पुराणों सहित भारतीय गणित, खगोल और आयुर्वेद के अनगिनत ग्रंथों की भाषा है। यह दिवस संस्कृत के प्रति जागरूकता बढ़ाने और युवा पीढ़ी को इस भाषा से जोड़ने के उद्देश्य से मनाया जाता है।

आगे की राह

केंद्र और राज्य सरकारों के स्तर पर संस्कृत शिक्षा को बढ़ावा देने की दिशा में विभिन्न कार्यक्रम संचालित हैं। नेताओं के इस व्यापक संदेश से स्पष्ट है कि संस्कृत को केवल धार्मिक संदर्भ तक सीमित न रखकर इसे आधुनिक शिक्षा, विज्ञान और तकनीक के साथ जोड़ने की पहल जारी रहेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि एक्स पोस्ट से परे संस्कृत शिक्षा की ज़मीनी स्थिति क्या है। केंद्रीय विद्यालयों और विश्वविद्यालयों में संस्कृत के विद्यार्थियों की संख्या लगातार घट रही है, जबकि संस्कृत में दक्ष शिक्षकों की कमी एक पुरानी समस्या बनी हुई है। राजनीतिक इच्छाशक्ति और व्यावहारिक क्रियान्वयन के बीच की यह खाई तब तक नहीं पटेगी, जब तक पाठ्यक्रम सुधार, शिक्षक प्रशिक्षण और डिजिटल संस्कृत संसाधनों में ठोस निवेश नहीं होगा।
RashtraPress
28 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

विश्व संस्कृत दिवस कब और क्यों मनाया जाता है?
विश्व संस्कृत दिवस प्रत्येक वर्ष श्रावण पूर्णिमा को मनाया जाता है — 2025 में यह 28 अगस्त को पड़ा। यह दिवस संस्कृत भाषा के प्रति जागरूकता बढ़ाने और इसे युवा पीढ़ी से जोड़ने के उद्देश्य से मनाया जाता है।
PM मोदी ने विश्व संस्कृत दिवस पर क्या कहा?
PM मोदी ने एक्स पर संस्कृत में पोस्ट करते हुए कहा कि यह भाषा भारत के ज्ञान, चिंतन और रचनात्मकता की निरंतर वाहक रही है। उन्होंने संस्कृत को पढ़ने-पढ़ाने और इसकी कालजयी धरोहर को अगली पीढ़ी तक पहुँचाने में जुटे सभी लोगों की सराहना की।
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला ने संस्कृत दिवस पर क्या संदेश दिया?
ओम बिड़ला ने संस्कृत को भारत की ज्ञान, चिंतन, दर्शन और संस्कृति की जीवंत धरोहर बताया। उन्होंने 'वसुधैव कुटुम्बकम्' और 'सर्वे भवन्तु सुखिनः' जैसे विचारों का उल्लेख करते हुए कहा कि संस्कृत ने समस्त मानवता को प्रेम, शांति और कल्याण का संदेश दिया है।
किन राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने विश्व संस्कृत दिवस पर शुभकामनाएं दीं?
उत्तर प्रदेश के CM योगी आदित्यनाथ, मध्य प्रदेश के CM मोहन यादव, राजस्थान के CM भजनलाल शर्मा, बिहार के CM सम्राट चौधरी और दिल्ली की CM रेखा गुप्ता ने एक्स पर शुभकामनाएं देते हुए संस्कृत संरक्षण का संकल्प दोहराया।
संस्कृत को 'देव भाषा' क्यों कहा जाता है और इसका महत्व क्या है?
संस्कृत को 'देव भाषा' इसलिए कहा जाता है क्योंकि वेद, उपनिषद, पुराण और अनगिनत धार्मिक ग्रंथ इसी भाषा में रचे गए हैं। इसके अलावा, भारतीय गणित, खगोल, आयुर्वेद और व्याकरण की समृद्ध परंपरा भी संस्कृत में ही सुरक्षित है, जिसे विश्व की सर्वाधिक व्याकरणिक रूप से सुव्यवस्थित भाषाओं में माना जाता है।
राष्ट्र प्रेस
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