विश्व संस्कृत दिवस 2025: PM मोदी ने संस्कृत को बताया भारत के ज्ञान और चिंतन की वाहक, दर्जनों नेताओं ने दी शुभकामनाएं
सारांश
मुख्य बातें
28 अगस्त 2025 को विश्व संस्कृत दिवस (श्रावण पूर्णिमा) के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला, अनेक केंद्रीय मंत्रियों और कई राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने संस्कृत भाषा के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त की और इसके संरक्षण व प्रचार-प्रसार का आह्वान किया। नेताओं ने एक स्वर में संस्कृत को भारत की ज्ञान-परंपरा, दर्शन और सांस्कृतिक विरासत की आधारशिला बताया।
प्रधानमंत्री मोदी का संदेश
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर संस्कृत में पोस्ट करते हुए लिखा कि यह भाषा भारत के ज्ञान, चिंतन और रचनात्मकता की निरंतर वाहक रही है और इसका सकारात्मक प्रभाव आज भी अनेक क्षेत्रों में देखा जा सकता है। उन्होंने भारत और विश्व भर में संस्कृत पढ़ने, पढ़ाने और इसकी कालजयी धरोहर को अगली पीढ़ी तक पहुँचाने में जुटे सभी लोगों की सराहना की।
लोकसभा अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्रियों की प्रतिक्रिया
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला ने एक्स पर लिखा कि संस्कृत केवल संवाद की भाषा नहीं, बल्कि भारत के ज्ञान, चिंतन, दर्शन और संस्कृति की जीवंत धरोहर है। उन्होंने वेदों से उपनिषदों तक, श्रीमद्भगवद्गीता से रामायण-महाभारत तक और आयुर्वेद, गणित, खगोल तथा साहित्य में संस्कृत के योगदान को रेखांकित किया। बिड़ला ने 'वसुधैव कुटुम्बकम्' और 'सर्वे भवन्तु सुखिनः' जैसे सार्वभौमिक विचारों का उल्लेख करते हुए कहा कि संस्कृत ने समस्त मानवता को प्रेम, शांति और कल्याण का संदेश दिया है।
केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल और केंद्रीय कानून एवं न्याय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने एक्स पर संस्कृत को 'सर्वविद्यानां जननी' अर्थात सभी विद्याओं की जननी बताया। दोनों ने इस भाषा को वैज्ञानिक, मधुर और प्राचीन बताते हुए कहा कि देश के साथ-साथ विदेशों में भी संस्कृत के प्रति आकर्षण बढ़ रहा है।
केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के मार्गदर्शन में भारत संस्कृत को आधुनिक युग में जीवंत और जन-जन तक पहुँचाने के लिए निरंतर प्रयासरत है।
मुख्यमंत्रियों का आह्वान
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एक्स पर 'भारतस्य प्रतिष्ठे द्वे संस्कृतं संस्कृतिस्तथा' उद्धृत करते हुए संस्कृत को भारत की सनातन ज्ञान-परंपरा, दर्शन, विज्ञान और संस्कृति की दिव्य अभिव्यक्ति बताया। उन्होंने सभी से देवभाषा के संरक्षण और प्रचार-प्रसार का संकल्प लेने का आग्रह किया।
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने संस्कृत को भारत की ज्ञान, संस्कृति और गौरवशाली परंपरा की आधारशिला बताया। राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने संस्कृत को सनातन संस्कृति, ज्ञान-विज्ञान और आध्यात्मिक परंपरा की नींव कहा। बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने इसे समृद्ध संस्कृति और गौरवशाली विरासत की अमूल्य धरोहर बताया।
दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने एक्स पर 'जयतु संस्कृतम्, जयतु भारतम्' के उद्घोष के साथ संस्कृत को महान सभ्यता और सांस्कृतिक चेतना की अमूल्य धरोहर बताया।
विश्व संस्कृत दिवस का महत्व
गौरतलब है कि विश्व संस्कृत दिवस प्रत्येक वर्ष श्रावण पूर्णिमा को मनाया जाता है। संस्कृत को विश्व की प्राचीनतम व्याकरणिक रूप से सुव्यवस्थित भाषाओं में गिना जाता है और यह वेदों, उपनिषदों, पुराणों सहित भारतीय गणित, खगोल और आयुर्वेद के अनगिनत ग्रंथों की भाषा है। यह दिवस संस्कृत के प्रति जागरूकता बढ़ाने और युवा पीढ़ी को इस भाषा से जोड़ने के उद्देश्य से मनाया जाता है।
आगे की राह
केंद्र और राज्य सरकारों के स्तर पर संस्कृत शिक्षा को बढ़ावा देने की दिशा में विभिन्न कार्यक्रम संचालित हैं। नेताओं के इस व्यापक संदेश से स्पष्ट है कि संस्कृत को केवल धार्मिक संदर्भ तक सीमित न रखकर इसे आधुनिक शिक्षा, विज्ञान और तकनीक के साथ जोड़ने की पहल जारी रहेगी।