17 सितंबर 2026
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पद्मश्री खेमराज सुंदरियाल बोले — मोदी सरकार ने हथकरघा बुनकरों को राष्ट्रीय पहचान दिलाई

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पद्मश्री खेमराज सुंदरियाल बोले — मोदी सरकार ने हथकरघा बुनकरों को राष्ट्रीय पहचान दिलाई

सारांश

60 वर्षों की साधना के बाद पद्मश्री से सम्मानित पानीपत के बुनकर खेमराज सुंदरियाल ने PM मोदी के जन्मदिन पर कहा — सरकार ने कारीगरों को वह पहचान दी जो दशकों तक उनसे दूर रही। हुनर को मिलती प्रतिष्ठा की यह कहानी पूरे हस्तशिल्प क्षेत्र के लिए प्रेरणा बन रही है।

मुख्य बातें

पद्मश्री खेमराज सुंदरियाल पिछले 60 वर्षों से पानीपत, हरियाणा में हथकरघा क्षेत्र में सक्रिय हैं।
उन्होंने 17 सितंबर 2026 को PM नरेंद्र मोदी के जन्मदिवस पर उन्हें शुभकामनाएं देते हुए पद्मश्री का श्रेय मोदी सरकार की नीतियों को दिया।
उनके पुत्र अजय सुंदरियाल ने बताया कि केंद्र सरकार ने स्वयं फोन कर पद्मश्री चयन की सूचना दी, जो परिवार के लिए गर्व का क्षण था।
वर्ष 1975 में हथकरघा उद्योग के ठहराव के बाद भारत सरकार द्वारा स्थापित प्रशिक्षण केंद्र ने बुनकरों को नई दिशा दी।
सुंदरियाल के अनुसार मोदी सरकार ने कारीगरों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

पानीपत के वयोवृद्ध हथकरघा शिल्पकार और पद्मश्री सम्मान प्राप्त खेमराज सुंदरियाल ने 17 सितंबर 2026 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिवस के अवसर पर उन्हें शुभकामनाएं देते हुए कहा कि केंद्र सरकार ने देश के हथकरघा बुनकरों और कारीगरों को वह पहचान दिलाई है जो दशकों तक उनसे दूर रही। हरियाणा में करीब 60 वर्षों से इस क्षेत्र में सक्रिय सुंदरियाल ने अपने पद्मश्री सम्मान का श्रेय सीधे प्रधानमंत्री मोदी की नीतियों को दिया।

छह दशकों की साधना, फिर राष्ट्रीय सम्मान

खेमराज सुंदरियाल के अनुसार वर्ष 1975 के आसपास हथकरघा उद्योग गंभीर ठहराव के दौर से गुज़र रहा था। इस स्थिति को सुधारने के लिए भारत सरकार ने पानीपत में एक प्रशिक्षण केंद्र स्थापित किया, जिसके ज़रिए बुनकरों और उद्योग से जुड़े लोगों को तकनीकी प्रशिक्षण मिला। सुंदरियाल ने उसी केंद्र के माध्यम से इस उद्योग को पुनर्जीवित करने में अहम भूमिका निभाई।

उन्होंने कहा कि लंबे समय तक देश के अनेक कारीगरों का हुनर सीमित दायरे में ही सिमटा रहा और उन्हें व्यापक पहचान नहीं मिल पाई। उनके अनुसार मोदी सरकार के कार्यकाल में यह स्थिति बदली है और अब ऐसे शिल्पकार राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय मंचों पर सम्मानित हो रहे हैं।

परिवार के लिए गर्व का क्षण

खेमराज सुंदरियाल के पुत्र अजय सुंदरियाल ने बताया कि उनके पिता 60 वर्षों से हथकरघा क्षेत्र में अथक परिश्रम कर रहे थे, परंतु उनके हुनर को उतनी व्यापक पहचान नहीं मिल पाई थी जितनी वह हकदार थे। जब केंद्र सरकार की ओर से स्वयं फोन कर पद्मश्री के लिए चयन की सूचना दी गई, तो पूरे परिवार के लिए वह क्षण अत्यंत हर्ष और गौरव का था।

अजय ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भारत सरकार के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह सम्मान न केवल उनके पिता के लिए, बल्कि देशभर के उन तमाम कारीगरों के लिए प्रेरणा है जो चुपचाप अपनी कला को जीवित रखे हुए हैं।

हथकरघा क्षेत्र और सरकारी नीतियाँ

यह ऐसे समय में उल्लेखनीय है जब केंद्र सरकार 'वोकल फॉर लोकल' और 'आत्मनिर्भर भारत' जैसी पहलों के तहत स्थानीय शिल्पकारों को प्रोत्साहन दे रही है। गौरतलब है कि स्वनिधि योजना जैसे कार्यक्रमों के ज़रिए छोटे कारोबारियों को औपचारिक वित्तीय ढाँचे से जोड़ने की कोशिश भी हो रही है।

खेमराज सुंदरियाल का मानना है कि दशकों तक हुनर को साधने वाले कारीगरों को राष्ट्रीय सम्मान मिलने से आम परिवारों में यह संदेश जाता है कि मेहनत और स्वरोज़गार को अब वह प्रतिष्ठा मिल रही है जिसके वे हकदार हैं।

आगे की राह

पानीपत का हथकरघा उद्योग देश के सबसे बड़े कपड़ा केंद्रों में से एक माना जाता है। खेमराज सुंदरियाल जैसे शिल्पकारों को राष्ट्रीय सम्मान मिलने से क्षेत्र के युवाओं में पारंपरिक हस्तशिल्प को व्यवसाय के रूप में अपनाने की प्रेरणा मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। यह देखना अहम होगा कि नीतिगत मान्यता के साथ-साथ बुनकरों को बाज़ार तक पहुँच और उचित मूल्य भी सुनिश्चित हो पाता है या नहीं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह सवाल भी उठता है कि क्या पद्मश्री जैसे सम्मान महज़ प्रतीकात्मक मान्यता हैं या इनके साथ बुनकरों की आर्थिक स्थिति में ठोस बदलाव भी आता है। हथकरघा क्षेत्र दशकों से पावरलूम की प्रतिस्पर्धा और बाज़ार तक सीमित पहुँच से जूझ रहा है। सरकारी योजनाओं और सम्मानों की घोषणाएं तब तक अधूरी हैं जब तक कारीगरों को उचित मूल्य, स्थिर बाज़ार और सामाजिक सुरक्षा की गारंटी नहीं मिलती। सुंदरियाल की 60 वर्षों की मेहनत को जो देर से मिली पहचान मिली, वह इस बात का भी संकेत है कि व्यवस्था में प्रतिभा को समय पर पहचानने का तंत्र अभी और मज़बूत होना बाकी है।
RashtraPress
17 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

खेमराज सुंदरियाल कौन हैं और उन्हें पद्मश्री क्यों मिला?
खेमराज सुंदरियाल हरियाणा के पानीपत में पिछले 60 वर्षों से हथकरघा क्षेत्र में कार्यरत एक वयोवृद्ध शिल्पकार हैं। भारत सरकार ने हथकरघा उद्योग में उनके दीर्घकालिक योगदान और बुनकरों को प्रशिक्षण देने के कार्य के लिए उन्हें पद्मश्री सम्मान से नवाज़ा।
खेमराज सुंदरियाल ने PM मोदी के बारे में क्या कहा?
उन्होंने कहा कि मोदी सरकार ने हथकरघा बुनकरों और कारीगरों को राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर वह पहचान दिलाई है जो पहले उन्हें नहीं मिल पाती थी। उन्होंने अपने पद्मश्री सम्मान का श्रेय सीधे प्रधानमंत्री मोदी को दिया।
पानीपत का हथकरघा उद्योग कब से संकट में था?
खेमराज सुंदरियाल के अनुसार वर्ष 1975 के आसपास हथकरघा उद्योग पिछड़ रहा था। इसके बाद भारत सरकार ने पानीपत में एक प्रशिक्षण केंद्र स्थापित किया जिसने बुनकरों को नई दिशा देने में मदद की।
खेमराज के बेटे अजय सुंदरियाल ने पद्मश्री चयन पर क्या कहा?
अजय सुंदरियाल ने बताया कि जब केंद्र सरकार ने स्वयं फोन कर पद्मश्री के लिए उनके पिता के चयन की सूचना दी, तो यह पूरे परिवार के लिए खुशी और गर्व का क्षण था। उन्होंने PM मोदी और भारत सरकार के प्रति आभार व्यक्त किया।
हथकरघा कारीगरों को सरकारी मान्यता से क्या फर्क पड़ता है?
सरकारी सम्मान और योजनाओं से कारीगरों को राष्ट्रीय पहचान मिलती है और युवाओं में पारंपरिक शिल्प को अपनाने की प्रेरणा जागती है। खेमराज सुंदरियाल के अनुसार इससे आम परिवारों की जिंदगी में बड़ा बदलाव आ सकता है, बशर्ते पहचान के साथ बाज़ार तक पहुँच भी सुनिश्चित हो।
राष्ट्र प्रेस
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