16 साल से कम बच्चों पर सोशल मीडिया बैन हो: पीएमके अध्यक्ष अंबुमणि रामदास की केंद्र से माँग
सारांश
मुख्य बातें
पट्टाली मक्कल काची (पीएमके) के अध्यक्ष डॉ. अंबुमणि रामदास ने 26 जुलाई 2026 को केंद्र सरकार से आग्रह किया कि वह 16 साल से कम उम्र के बच्चों के सोशल मीडिया उपयोग पर प्रतिबंध लगाने के लिए एक देशव्यापी कानून बनाए। उनका तर्क है कि बच्चों की शारीरिक सेहत, मानसिक स्वास्थ्य और शैक्षणिक भविष्य की रक्षा के लिए यह कदम अपरिहार्य है।
माँग की पृष्ठभूमि
अंबुमणि ने अपने बयान में फ्रांस के उस हालिया फैसले का स्वागत किया, जिसमें 15 साल से कम उम्र के बच्चों के सोशल मीडिया उपयोग पर पाबंदी लगाई गई है। फ्रांसीसी संसद द्वारा मंजूर इस कानून के तहत सितंबर से नए अकाउंट बनाने पर रोक लगेगी, और जनवरी से मौजूदा अकाउंट भी निलंबित कर दिए जाएंगे। उन्होंने बताया कि फ्रांस यूरोपीय संघ का पहला देश बना है जिसने इस तरह की पाबंदी लागू की है।
इससे पहले ऑस्ट्रेलिया ने दिसंबर 2025 में देशव्यापी प्रतिबंध लागू किया था — यह विश्व में ऐसा करने वाला पहला देश था। कनाडा, ब्राजील और इंडोनेशिया ने भी इसी दिशा में कदम उठाए हैं, जबकि यूनाइटेड किंगडम, स्पेन, ग्रीस, जर्मनी और डेनमार्क सहित 50 से अधिक देश ऐसे उपायों पर विचार कर रहे हैं।
बच्चों पर सोशल मीडिया के दुष्प्रभाव
पीएमके नेता ने 2025-26 के आर्थिक सर्वेक्षण का हवाला दिया, जिसमें बच्चों की मानसिक और शारीरिक सेहत पर सोशल मीडिया के अत्यधिक उपयोग के नकारात्मक प्रभाव रेखांकित किए गए हैं। सर्वेक्षण के अनुसार, लंबे समय तक इसके संपर्क में रहने से एंग्जायटी, तनाव, आत्मविश्वास में कमी और साइबर बुलिंग जैसी समस्याएं सामने आती हैं। इसमें 16 से 24 साल के युवाओं को सर्वाधिक जोखिम वाला वर्ग माना गया है।
अंबुमणि ने यह भी बताया कि शिक्षकों और विश्वविद्यालय प्रशासकों ने आगाह किया है कि सोशल मीडिया की लत से छात्रों की एकाग्रता, पठन-आदतें और शैक्षणिक प्रदर्शन प्रभावित हो रहे हैं। अध्ययनों के अनुसार, कई युवा उपयोगकर्ता आठ सेकंड के भीतर ही वीडियो में रुचि खो देते हैं — जो ध्यान केंद्रित करने की घटती क्षमता का संकेत है।
उन्होंने यह भी चिंता जताई कि बच्चे क्रिकेट और कबड्डी जैसे मैदानी खेलों की जगह ऑनलाइन गेमिंग को प्राथमिकता दे रहे हैं, जिससे मोटापा और विटामिन डी की कमी बढ़ रही है।
राज्य बनाम केंद्र: संवैधानिक पहलू
कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और गोवा ने बच्चों के सोशल मीडिया उपयोग को नियंत्रित करने की योजनाएं घोषित की हैं। हालाँकि, अंबुमणि का तर्क है कि 'संचार' संविधान की यूनियन लिस्ट (केंद्र सूची) के अंतर्गत आता है, इसलिए राज्यों के पास ऐसी पाबंदियाँ लगाने का संवैधानिक अधिकार नहीं हो सकता। उन्होंने आगाह किया कि राज्य स्तर पर लागू किसी भी प्रतिबंध को कानूनी चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है।
केंद्र से ठोस कदम उठाने का आग्रह
पीएमके अध्यक्ष ने केंद्र सरकार से आग्रह किया कि वह फ्रांस और ऑस्ट्रेलिया के उदाहरण का अनुसरण करते हुए एक राष्ट्रीय कानून लाए, जिससे पूरे भारत में 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया का उपयोग प्रतिबंधित हो। उनका मानना है कि यह कदम बच्चों की सेहत, शिक्षा और समग्र विकास की बेहतर सुरक्षा सुनिश्चित करेगा। यह माँग ऐसे समय में आई है जब वैश्विक स्तर पर बच्चों के डिजिटल उपयोग को लेकर नीतिगत बहस तेज हो रही है।