14 अक्टूबर 2026
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पॉलीकैब इंडिया एफएंडओ से बाहर, शेयर 5% गिरकर ₹7,845 पर; 30 दिसंबर से नए कॉन्ट्रैक्ट बंद

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पॉलीकैब इंडिया एफएंडओ से बाहर, शेयर 5% गिरकर ₹7,845 पर; 30 दिसंबर से नए कॉन्ट्रैक्ट बंद

सारांश

पॉलीकैब इंडिया के लिए यह सिर्फ बाज़ार की गिरावट नहीं — NSE ने 30 दिसंबर से F&O में नए कॉन्ट्रैक्ट बंद करने का फैसला किया है। 1 जनवरी 2027 से IBC फ्रेमवर्क के तहत प्राइस बैंड भी लागू होगा। NCLAT ने दिवालियापन कार्यवाही पर रोक लगाई है, लेकिन एक्सचेंज की कार्रवाई जारी है।

मुख्य बातें

पॉलीकैब इंडिया का शेयर 14 अक्टूबर 2026 को BSE पर 5.02 प्रतिशत गिरकर ₹7,845 पर आया।
NSE ने घोषणा की कि 30 दिसंबर 2026 के बाद पॉलीकैब के लिए कोई नया F&O कॉन्ट्रैक्ट जारी नहीं होगा।
अक्टूबर, नवंबर और दिसंबर 2026 एक्सपायरी के मौजूदा कॉन्ट्रैक्ट अपनी तय तारीखों तक ट्रेड होते रहेंगे।
1 जनवरी 2027 से IBC फ्रेमवर्क के तहत प्राइस बैंड और ग्रॉस सेटलमेंट लागू होगा।
NCLAT ने एसियर मेटल्स द्वारा ₹2.79 करोड़ के बकाए पर शुरू दिवालियापन कार्यवाही पर रोक लगाई।

पॉलीकैब इंडिया के शेयरों में बुधवार, 14 अक्टूबर 2026 को तेज बिकवाली देखी गई और स्टॉक 5.02 प्रतिशत तक फिसलकर ₹7,845 पर पहुँच गया। इसकी प्रमुख वजह नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) द्वारा जारी वह नोटिफिकेशन है, जिसमें पॉलीकैब को फ्यूचर एंड ऑप्शंस (F&O) सेगमेंट से बाहर करने की घोषणा की गई है। दिन के दौरान शेयर में कुछ रिकवरी आई, लेकिन बाज़ार में दबाव बना रहा।

मुख्य घटनाक्रम

बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) पर पॉलीकैब का शेयर शुरुआती कारोबार में ₹7,845 तक लुढ़का, जो पिछले बंद भाव से करीब 5.02 प्रतिशत कम था। इससे एक दिन पहले, मंगलवार के सत्र में भी कंपनी के शेयर में 5 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई थी। यानी दो कारोबारी दिनों में शेयर लगातार दबाव में रहा।

NSE ने स्पष्ट किया है कि 30 दिसंबर 2026 से पॉलीकैब के लिए कोई नया F&O कॉन्ट्रैक्ट जारी नहीं किया जाएगा। हालाँकि, अक्टूबर 2026, नवंबर 2026 और दिसंबर 2026 की एक्सपायरी वाले मौजूदा कॉन्ट्रैक्ट अपनी-अपनी तय एक्सपायरी तारीखों तक ट्रेडिंग के लिए उपलब्ध रहेंगे। मौजूदा कॉन्ट्रैक्ट महीनों में नई स्ट्राइक कीमतें भी पेश की जाएंगी।

IBC फ्रेमवर्क और निगरानी उपाय

रिपोर्टों के अनुसार, मौजूदा कॉन्ट्रैक्ट्स की समाप्ति के बाद 1 जनवरी 2027 से IBC (इन्सॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड) फ्रेमवर्क के तहत पॉलीकैब पर प्राइस बैंड और ग्रॉस सेटलमेंट समेत अतिरिक्त निगरानी उपाय लागू किए जाएंगे। यह कदम 7 अगस्त और 9 अक्टूबर 2026 को जारी एक्सचेंज सर्कुलर के अनुपालन में उठाया गया है, जो IBC फ्रेमवर्क के तहत सिक्योरिटीज से संबंधित थे।

गौरतलब है कि यह एफएंडओ से निष्कासन सीधे तौर पर कंपनी के उस कानूनी विवाद से जुड़ा है, जो पिछले कुछ महीनों से चर्चा में है।

NCLAT ने दिवालियापन कार्यवाही पर लगाई रोक

इससे पहले, पॉलीकैब इंडिया ने बताया था कि नेशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्रिब्यूनल (NCLAT) ने नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT), अहमदाबाद बेंच के 7 अक्टूबर 2026 के उस आदेश पर रोक लगा दी है, जिसमें एसियर मेटल्स प्राइवेट लिमिटेड द्वारा कथित तौर पर ₹2.79 करोड़ के परिचालन संबंधी बकाए के लिए कंपनी के विरुद्ध दिवालियापन कार्यवाही शुरू करने की अनुमति दी गई थी। NCLAT की इस अंतरिम राहत से कंपनी को फिलहाल कुछ कानूनी राहत मिली है, लेकिन एक्सचेंज-स्तरीय कार्रवाई जारी है।

निवेशकों पर असर

F&O से बाहर होने का सीधा असर उन ट्रेडर्स और निवेशकों पर पड़ता है, जो हेजिंग या सट्टेबाजी के लिए डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट का उपयोग करते थे। IBC फ्रेमवर्क के तहत प्राइस बैंड लागू होने से 1 जनवरी 2027 के बाद स्टॉक की इंट्राडे वोलेटिलिटी सीमित हो सकती है, जो दीर्घकालिक निवेशकों के लिए आंशिक रूप से राहत का संकेत है। हालाँकि, डेरिवेटिव बाज़ार में लिक्विडिटी घटने से शेयर की ट्रेडिंग वॉल्यूम पर भी असर पड़ सकता है।

आगे क्या होगा

दिसंबर 2026 के अंत तक मौजूदा F&O कॉन्ट्रैक्ट अपनी एक्सपायरी तक चलते रहेंगे। इसके बाद पॉलीकैब का शेयर केवल कैश सेगमेंट में उपलब्ध रहेगा। बाज़ार विश्लेषकों की नज़र अब NCLAT में चल रही कानूनी सुनवाई और कंपनी के अगले तिमाही नतीजों पर रहेगी, जो शेयर की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो दिवालियापन कार्यवाही की छाया में आए शेयरों पर निगरानी कड़ी कर रही है। ₹2.79 करोड़ का विवाद अपेक्षाकृत छोटा है, लेकिन NCLT का शुरुआती आदेश और उसके बाद एक्सचेंज की त्वरित प्रतिक्रिया यह दर्शाती है कि कानूनी अनिश्चितता बाज़ार में किस तेज़ी से असर डालती है। NCLAT की रोक से कंपनी को अस्थायी राहत मिली है, लेकिन जब तक यह मामला पूरी तरह निपटता नहीं, निवेशकों का भरोसा दबाव में रहेगा।
RashtraPress
14 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पॉलीकैब इंडिया को F&O सेगमेंट से क्यों बाहर किया जा रहा है?
NSE ने IBC फ्रेमवर्क से जुड़े 7 अगस्त और 9 अक्टूबर 2026 के सर्कुलर के आधार पर पॉलीकैब को F&O सेगमेंट से बाहर करने का फैसला किया है। इस फैसले की पृष्ठभूमि में कंपनी के विरुद्ध NCLT में दिवालियापन कार्यवाही का आदेश है, जिस पर NCLAT ने अभी रोक लगाई है।
पॉलीकैब के मौजूदा F&O कॉन्ट्रैक्ट का क्या होगा?
अक्टूबर, नवंबर और दिसंबर 2026 की एक्सपायरी वाले मौजूदा कॉन्ट्रैक्ट अपनी-अपनी तय तारीखों तक ट्रेडिंग के लिए उपलब्ध रहेंगे। 30 दिसंबर 2026 के बाद कोई नया एक्सपायरी कॉन्ट्रैक्ट जारी नहीं होगा।
1 जनवरी 2027 से पॉलीकैब पर क्या बदलाव आएंगे?
रिपोर्टों के अनुसार, 1 जनवरी 2027 से IBC फ्रेमवर्क के तहत पॉलीकैब पर प्राइस बैंड और ग्रॉस सेटलमेंट जैसे अतिरिक्त निगरानी उपाय लागू होंगे। इससे शेयर की इंट्राडे वोलेटिलिटी पर लगाम लगेगी और ट्रेडिंग सेटलमेंट की प्रक्रिया बदल जाएगी।
पॉलीकैब और एसियर मेटल्स का विवाद क्या है?
एसियर मेटल्स प्राइवेट लिमिटेड ने पॉलीकैब इंडिया के खिलाफ कथित तौर पर ₹2.79 करोड़ के परिचालन संबंधी बकाए के लिए NCLT, अहमदाबाद बेंच में दिवालियापन याचिका दायर की थी। NCLT ने 7 अक्टूबर 2026 को इस याचिका को मंजूरी दी, लेकिन NCLAT ने इस आदेश पर रोक लगा दी है।
F&O से बाहर होने से पॉलीकैब के निवेशकों पर क्या असर पड़ेगा?
F&O से बाहर होने के बाद निवेशक हेजिंग के लिए डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट का उपयोग नहीं कर पाएंगे। शेयर केवल कैश सेगमेंट में उपलब्ध रहेगा, जिससे लिक्विडिटी और ट्रेडिंग वॉल्यूम में कमी आ सकती है।
राष्ट्र प्रेस
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