पॉलीकैब इंडिया एफएंडओ से बाहर, शेयर 5% गिरकर ₹7,845 पर; 30 दिसंबर से नए कॉन्ट्रैक्ट बंद
सारांश
मुख्य बातें
पॉलीकैब इंडिया के शेयरों में बुधवार, 14 अक्टूबर 2026 को तेज बिकवाली देखी गई और स्टॉक 5.02 प्रतिशत तक फिसलकर ₹7,845 पर पहुँच गया। इसकी प्रमुख वजह नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) द्वारा जारी वह नोटिफिकेशन है, जिसमें पॉलीकैब को फ्यूचर एंड ऑप्शंस (F&O) सेगमेंट से बाहर करने की घोषणा की गई है। दिन के दौरान शेयर में कुछ रिकवरी आई, लेकिन बाज़ार में दबाव बना रहा।
मुख्य घटनाक्रम
बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) पर पॉलीकैब का शेयर शुरुआती कारोबार में ₹7,845 तक लुढ़का, जो पिछले बंद भाव से करीब 5.02 प्रतिशत कम था। इससे एक दिन पहले, मंगलवार के सत्र में भी कंपनी के शेयर में 5 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई थी। यानी दो कारोबारी दिनों में शेयर लगातार दबाव में रहा।
NSE ने स्पष्ट किया है कि 30 दिसंबर 2026 से पॉलीकैब के लिए कोई नया F&O कॉन्ट्रैक्ट जारी नहीं किया जाएगा। हालाँकि, अक्टूबर 2026, नवंबर 2026 और दिसंबर 2026 की एक्सपायरी वाले मौजूदा कॉन्ट्रैक्ट अपनी-अपनी तय एक्सपायरी तारीखों तक ट्रेडिंग के लिए उपलब्ध रहेंगे। मौजूदा कॉन्ट्रैक्ट महीनों में नई स्ट्राइक कीमतें भी पेश की जाएंगी।
IBC फ्रेमवर्क और निगरानी उपाय
रिपोर्टों के अनुसार, मौजूदा कॉन्ट्रैक्ट्स की समाप्ति के बाद 1 जनवरी 2027 से IBC (इन्सॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड) फ्रेमवर्क के तहत पॉलीकैब पर प्राइस बैंड और ग्रॉस सेटलमेंट समेत अतिरिक्त निगरानी उपाय लागू किए जाएंगे। यह कदम 7 अगस्त और 9 अक्टूबर 2026 को जारी एक्सचेंज सर्कुलर के अनुपालन में उठाया गया है, जो IBC फ्रेमवर्क के तहत सिक्योरिटीज से संबंधित थे।
गौरतलब है कि यह एफएंडओ से निष्कासन सीधे तौर पर कंपनी के उस कानूनी विवाद से जुड़ा है, जो पिछले कुछ महीनों से चर्चा में है।
NCLAT ने दिवालियापन कार्यवाही पर लगाई रोक
इससे पहले, पॉलीकैब इंडिया ने बताया था कि नेशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्रिब्यूनल (NCLAT) ने नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT), अहमदाबाद बेंच के 7 अक्टूबर 2026 के उस आदेश पर रोक लगा दी है, जिसमें एसियर मेटल्स प्राइवेट लिमिटेड द्वारा कथित तौर पर ₹2.79 करोड़ के परिचालन संबंधी बकाए के लिए कंपनी के विरुद्ध दिवालियापन कार्यवाही शुरू करने की अनुमति दी गई थी। NCLAT की इस अंतरिम राहत से कंपनी को फिलहाल कुछ कानूनी राहत मिली है, लेकिन एक्सचेंज-स्तरीय कार्रवाई जारी है।
निवेशकों पर असर
F&O से बाहर होने का सीधा असर उन ट्रेडर्स और निवेशकों पर पड़ता है, जो हेजिंग या सट्टेबाजी के लिए डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट का उपयोग करते थे। IBC फ्रेमवर्क के तहत प्राइस बैंड लागू होने से 1 जनवरी 2027 के बाद स्टॉक की इंट्राडे वोलेटिलिटी सीमित हो सकती है, जो दीर्घकालिक निवेशकों के लिए आंशिक रूप से राहत का संकेत है। हालाँकि, डेरिवेटिव बाज़ार में लिक्विडिटी घटने से शेयर की ट्रेडिंग वॉल्यूम पर भी असर पड़ सकता है।
आगे क्या होगा
दिसंबर 2026 के अंत तक मौजूदा F&O कॉन्ट्रैक्ट अपनी एक्सपायरी तक चलते रहेंगे। इसके बाद पॉलीकैब का शेयर केवल कैश सेगमेंट में उपलब्ध रहेगा। बाज़ार विश्लेषकों की नज़र अब NCLAT में चल रही कानूनी सुनवाई और कंपनी के अगले तिमाही नतीजों पर रहेगी, जो शेयर की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे।