सेबी ने F&O हेरफेर मामले में ₹28.12 करोड़ फ्रीज किए, 6 लोगों और 2 कंपनियों पर प्रतिबंध
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) ने बुधवार, 16 सितंबर 2026 को स्टॉक फ्यूचर्स और ऑप्शंस से जुड़े एक कथित क्रॉस-सेगमेंट मार्केट मैनिपुलेशन मामले में कड़ी कार्रवाई की। नियामक ने ₹28.12 करोड़ के कथित अवैध लाभ को फ्रीज करते हुए दो कंपनियों और चार व्यक्तियों पर इक्विटी डेरिवेटिव्स में कारोबार करने पर तत्काल रोक लगा दी। यह अंतरिम आदेश सेबी के पूर्णकालिक सदस्य कमलेश चंद्र वार्ष्णेय द्वारा जारी किया गया है।
कार्रवाई किन पर हुई
सेबी के अंतरिम आदेश में जिन पक्षों को निर्देश दिए गए हैं, उनमें प्रसार संपदा प्राइवेट लिमिटेड, चौबारा ईट्स प्राइवेट लिमिटेड, और व्यक्तियों में वेद प्रकाश गुप्ता, प्रीति गुप्ता, सरोज गुप्ता तथा गौरव तोमर शामिल हैं। इन सभी छह पक्षों को संयुक्त रूप से ₹28.12 करोड़ फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) में जमा करने का निर्देश दिया गया है — जब तक जांच पूरी नहीं हो जाती। निर्धारित राशि जमा करने के बाद इन्हें कैश सेगमेंट में भाग लेने की अनुमति होगी, परंतु इक्विटी डेरिवेटिव्स में कारोबार पर पाबंदी बनी रहेगी।
मामला कैसे सामने आया
यह मामला तब नियामकीय रडार पर आया जब नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) और सेबी की निगरानी प्रणालियों ने असामान्य ट्रेडिंग गतिविधियों को लेकर अलर्ट जारी किए। जांच में सामने आया कि प्रसार संपदा — जो सेबी में पंजीकृत स्टॉकब्रोकर और डिपॉजिटरी प्रतिभागी है — ने उन्हीं शेयरों में स्टॉक ऑप्शंस से बड़ा मुनाफा कमाया, जिनमें स्टॉक फ्यूचर्स में नुकसान दर्ज किया गया था। गौरतलब है कि फरवरी और मार्च 2026 में NSE के संचार के बाद प्रसार ने अपने प्रोप्राइटरी खाते में यह गतिविधि बंद कर दी थी। इसके बावजूद बाद की जांच में चौबारा ईट्स के खातों में भी इसी तरह का ट्रेडिंग पैटर्न पाया गया।
कथित हेरफेर की रणनीति
सेबी के आरोपों के अनुसार, संबंधित संस्थाओं ने कथित तौर पर अपेक्षाकृत छोटे और कम लिक्विडिटी वाले शेयरों को निशाना बनाया — विशेष रूप से वे जो NSE में डेरिवेटिव्स ट्रेडिंग के लिए पात्र लगभग 211 सूचीबद्ध शेयरों में से बाजार पूंजीकरण के हिसाब से निचले 100 शेयरों में थे। कथित रणनीति में बाजार मूल्य से नीचे और ऊपर की कीमतों पर बड़ी मात्रा में नियर-द-मनी ऑप्शंस ऑर्डर लगाए जाते थे, जिन्हें ऑर्डर बुक में बिना निष्पादित हुए छोड़ दिया जाता था। इसके साथ-साथ, संबंधित संस्थाएं ट्रेडिंग दिवस के अलग-अलग समय में स्टॉक फ्यूचर्स में कभी शुद्ध खरीदार और कभी शुद्ध विक्रेता की भूमिका अपनाती थीं।
सेबी की जांच का दायरा
नियामक यह पड़ताल कर रहा है कि क्या ऑप्शंस ऑर्डर और फ्यूचर्स पोजीशन का इस्तेमाल अलग-अलग बाजार सेगमेंटों में मिलाकर इस प्रकार किया गया ताकि मूल शेयरों की कीमतों या बाजार परिस्थितियों को प्रभावित किया जा सके और डेरिवेटिव्स पोजीशनों के जरिए लाभ कमाया जा सके। यह ऐसे समय में आया है जब सेबी देश के डेरिवेटिव्स बाजार में बढ़ती खुदरा भागीदारी को लेकर पहले से ही नई नीतिगत कड़ाई लागू कर रहा है। मामले की जांच जारी है और आगे के निर्देश अंतिम आदेश के साथ जारी किए जाएंगे।