सेबी ने भारतीय बाजार को अमेरिका से ज़्यादा पारदर्शी बनाया: नितिन कामथ और दीपक शेनॉय का स्पेसएक्स IPO पर विश्लेषण
सारांश
मुख्य बातें
जेरोधा के संस्थापक नितिन कामथ और कैपिटलमाइंड म्यूचुअल फंड के सीईओ दीपक शेनॉय ने स्पेसएक्स IPO में शेयर पाने वाले निवेशकों पर अमेरिकी ब्रोकरेज कंपनी फिडेलिटी द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों की तुलना भारत के नियामकीय ढाँचे से की है। दोनों विशेषज्ञों का कहना है कि भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) तथा घरेलू स्टॉक एक्सचेंजों ने भारतीय पूँजी बाजार को निवेशक-हित की दृष्टि से अमेरिकी बाजार से अधिक सुरक्षित और पारदर्शी बना दिया है।
फिडेलिटी की 'फ्लिपिंग' नीति क्या है
फिडेलिटी की मौजूदा नीति के अनुसार, स्पेसएक्स IPO में जिन निवेशकों को शेयर आवंटित हुए हैं, यदि वे लिस्टिंग के 15 कैलेंडर दिनों के भीतर उन शेयरों को बेच देते हैं — जिसे 'फ्लिपिंग' कहा जाता है — तो उन्हें भविष्य में फिडेलिटी के ज़रिये IPO आवंटन पाने का अधिकार खोना पड़ सकता है। ब्रोकरेज के दिशा-निर्देशों के मुताबिक, पहली बार नियम तोड़ने पर छह महीने तक नए इक्विटी ऑफर में भाग लेने पर रोक लग सकती है, दूसरी बार उल्लंघन पर एक वर्ष का प्रतिबंध और तीसरी बार पर स्थायी प्रतिबंध का प्रावधान है।
फिडेलिटी ने निवेशकों को भेजे संदेश में स्पष्ट किया, 'IPO की लिस्टिंग के बाद 16वें कैलेंडर दिन से निवेशक अपने शेयर बेच सकते हैं और उन्हें फ्लिपर नहीं माना जाएगा।'
नितिन कामथ की प्रतिक्रिया
इस नीति पर टिप्पणी करते हुए नितिन कामथ ने एक्स पर पोस्ट किया, 'निश्चित रूप से अभी भी सुधार की गुंजाइश है, लेकिन यह देखकर हैरानी होती है कि सेबी और एक्सचेंजों की वजह से भारतीय बाजार अमेरिका की तुलना में कितने अधिक पारदर्शी और सुरक्षित हैं।' कामथ ने यह भी रेखांकित किया कि ऐसी प्रतिबंधात्मक शर्तें केवल फिडेलिटी तक सीमित नहीं हैं — अमेरिका की अन्य प्रमुख ब्रोकरेज कंपनियों में भी इसी तरह के नियम प्रचलित हैं।
दीपक शेनॉय का नज़रिया
कैपिटलमाइंड के संस्थापक और पोर्टफोलियो प्रबंधक दीपक शेनॉय ने भी एक्स पर इस व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा, 'यह कानूनी कैसे हो सकता है? सोचिए, कोई ब्रोकर आपसे कहे कि IPO में मिले शेयरों को आप पहले 15 दिनों तक बेच नहीं सकते। भारत में सेबी ऐसी स्थिति में तुरंत कार्रवाई कर देगी।' शेनॉय के अनुसार, भारत के नियामकीय ढाँचे में ऐसी एकतरफा शर्तों को वैध ठहराना मुश्किल होगा।
स्पेसएक्स IPO और बाज़ार में हलचल
गौरतलब है कि नैस्डैक पर लिस्टिंग के दौरान स्पेसएक्स के शेयरों में 19 प्रतिशत की तेज बढ़त दर्ज की गई। इसके साथ ही कंपनी का बाजार मूल्य 2 ट्रिलियन डॉलर से अधिक हो गया, जिससे यह अमेरिका की छठी सबसे मूल्यवान कंपनी बन गई। इसी के साथ एलन मस्क दुनिया के पहले ट्रिलियनेयर — यानी एक ट्रिलियन डॉलर से अधिक की व्यक्तिगत संपत्ति रखने वाले व्यक्ति — बन गए।
भारतीय निवेशकों के लिए क्या मायने रखता है
यह बहस ऐसे समय में उठी है जब भारतीय रिटेल निवेशकों की विदेशी बाजारों में रुचि तेज़ी से बढ़ रही है। विशेषज्ञों का यह विश्लेषण दर्शाता है कि वैश्विक बाजारों में निवेश से पहले वहाँ के नियामकीय जोखिमों को समझना ज़रूरी है। सेबी के मौजूदा ढाँचे में IPO आवंटन के बाद शेयर बेचने पर ऐसा कोई ब्रोकर-स्तरीय प्रतिबंध नहीं है, जो भारतीय निवेशकों को अपेक्षाकृत अधिक स्वतंत्रता देता है।