पीपीएससी मेन्स धांधली विवाद: रवनीत बिट्टू, ढिल्लों, जाखड़ ने मांगी सीबीआई जांच
सारांश
मुख्य बातें
पंजाब पब्लिक सर्विस कमीशन (पीपीएससी) मेन्स परीक्षा के नतीजों को लेकर 5 नवंबर 2026 को पंजाब में तीव्र सियासी संग्राम छिड़ गया, जब केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू, भाजपा पंजाब प्रदेश अध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों और भाजपा नेता सुनील जाखड़ ने भगवंत मान सरकार पर गंभीर धांधली के आरोप लगाते हुए पूरे मामले की केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) से जांच कराने की माँग की। तीनों नेताओं ने परीक्षा केंद्रों के कमरेवार चयन आँकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि नतीजों में दिख रहा असामान्य पैटर्न महज संयोग नहीं हो सकता।
आँकड़ों में संदिग्ध पैटर्न
केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट करते हुए विस्तृत आँकड़े साझा किए। उनके अनुसार, सेंटर-7 के कमरा नंबर 8 से 24 में से 11 उम्मीदवार (45.8 प्रतिशत) शॉर्टलिस्ट हुए। इसी प्रकार सेंटर-11 और सेंटर-4 के कमरों से 10-10 उम्मीदवार (41.7 प्रतिशत) चुने गए।
बिट्टू ने बताया कि जहाँ सेंटर-8 में कुल शॉर्टलिस्टिंग दर 24.21 प्रतिशत रही, वहीं सेंटर-1 के कमरा नंबर 1 से 7 तक यह दर मात्र 2.89 प्रतिशत दर्ज की गई। एक ही परीक्षा में केंद्रों के बीच इतने बड़े अंतर को उन्होंने पूरी भर्ती व्यवस्था की विश्वसनीयता पर सवालिया निशान बताया।
ढिल्लों के गंभीर आरोप
भाजपा पंजाब प्रदेश अध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों ने एक्स पर पोस्ट करते हुए कई और चिंताजनक बिंदु उठाए। उनके अनुसार, कथित तौर पर 86 उम्मीदवार लगातार रोल नंबरों के क्रम में चुने गए, नतीजों में अनुपस्थित उम्मीदवारों के रोल नंबर भी शामिल पाए गए, और आरोप है कि आंसर शीट का मूल्यांकन विषय विशेषज्ञों के बजाय विश्वविद्यालयों के छात्रों से कराया गया।
ढिल्लों ने इसे नायब तहसीलदार भर्ती के बाद आप सरकार के कार्यकाल में कथित तौर पर सामने आया दूसरा बड़ा भर्ती घोटाला बताया। उन्होंने माँग की कि साक्षात्कार प्रक्रिया तत्काल रोकी जाए, किसी हाईकोर्ट के बैठे न्यायाधीश की निगरानी में जांच हो या सीबीआई जांच कराई जाए, और सीसीटीवी फुटेज, सीटिंग प्लान, हाजिरी रजिस्टर व आंसर शीट की फोरेंसिक जांच हो। दोषी पाए जाने वालों पर भ्रष्टाचार रोकथाम कानून के तहत एफआईआर दर्ज करने की भी माँग की गई।
जाखड़ ने नीट से की तुलना
भाजपा नेता सुनील जाखड़ ने इस विवाद को राष्ट्रीय स्तर पर हुए नीट पेपर लीक मामले से जोड़ा। उन्होंने एक्स पर पोस्ट कर सवाल उठाया कि पहले नायब तहसीलदार भर्ती परीक्षा, फिर बाबा फरीद मेडिकल यूनिवर्सिटी में पैरामेडिकल स्टाफ भर्ती परीक्षा, और अब पीपीएससी मेन्स — इन सभी मामलों में एक पैटर्न दिखता है।
जाखड़ ने यह भी सवाल उठाया कि क्या 86 उम्मीदवारों को 3 या 4 के लगातार समूह में रोल नंबर आवंटन पूर्व नियोजित साजिश के तहत किया गया था। उनका कहना था कि पीसीएस जैसी प्रतिष्ठित परीक्षा में किसी विशेष केंद्र के चुनिंदा कमरों से लगभग एक-चौथाई चयन केवल किसी 'विशेष तरीके' से ही संभव है।
युवाओं और सरकार पर असर
गौरतलब है कि यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब भगवंत मान सरकार 'बिना पैसे, बिना सिफारिश' नौकरियाँ देने का दावा करती रही है। विपक्षी नेताओं का कहना है कि यदि ये आरोप सही पाए जाते हैं, तो वर्षों की मेहनत करने वाले लाखों युवा उम्मीदवारों के साथ सीधा अन्याय हुआ है।
भाजपा ने ऐलान किया है कि वह पंजाब के युवाओं के हक के लिए सड़क से लेकर अदालत तक लड़ाई जारी रखेगी। फिलहाल सरकार की ओर से इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, और आगे की घटनाक्रम पर सभी की नजरें टिकी हैं।