जनसुराज का भविष्य दांव पर: जदयू नेता राजीव रंजन का प्रशांत किशोर पर सीधा हमला
सारांश
मुख्य बातें
जनता दल (यूनाइटेड) के नेता राजीव रंजन ने 16 जुलाई 2026 को पटना में कहा कि प्रशांत किशोर ने आगामी उपचुनाव में अपनी पार्टी जनसुराज के भविष्य को दांव पर लगा दिया है। यह बयान उस समय आया जब जनसुराज के कई नेता पार्टी छोड़कर भारतीय जनता पार्टी (BJP) में शामिल हो गए।
जनसुराज में टूट और उपचुनाव की चुनौती
राजीव रंजन ने कहा कि जनसुराज छोड़कर जाने वाले नेताओं में से दो उम्मीदवार बांकीपुर के आसपास के निर्वाचन क्षेत्रों से थे। उनके अनुसार, इन नेताओं को यह एहसास हो गया कि प्रशांत किशोर 'जबरन फैसले थोपने के आदी' हो चुके हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि भाजपा और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) का भारी मतों से जीतना तय है।
'इंडिया गठबंधन' में आंतरिक मतभेद
आर्टिकल 370 पर कांग्रेस नेता सैफुद्दीन सोज के बयानों पर प्रतिक्रिया देते हुए राजीव रंजन ने कहा कि 'इंडिया गठबंधन' केवल नेतृत्व के सवाल पर नहीं, बल्कि अहम मुद्दों पर भी बंटा हुआ है। उन्होंने स्वीकार किया कि जनता दल (यूनाइटेड) शुरू में आर्टिकल 370 हटाने के खिलाफ थी, लेकिन उनका कहना है कि NDA सरकार की विकास रणनीति लागू होने के बाद जम्मू-कश्मीर में उल्लेखनीय प्रगति हुई है — पर्यटन से लेकर पारंपरिक शिल्प क्षेत्र तक।
पटना एनकाउंटर पर जदयू का रुख
पटना एनकाउंटर मामले पर राजीव रंजन ने कहा कि संबंधित व्यक्ति आपराधिक पृष्ठभूमि का था और पुलिस उसे बंटी यादव हत्याकांड में मुख्य आरोपी मानती थी। उन्होंने कहा, 'अगर अपराधी पुलिस के अधिकार को चुनौती देने की कोशिश करते हैं या ड्यूटी के दौरान उन्हें सीमा पार करने के लिए मजबूर करते हैं, तो ऐसी स्थितियां पैदा होना स्वाभाविक हैं।' उन्होंने यह भी बताया कि उस घटना के बाद कई पुलिस अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की गई थी।
पंजाब कांग्रेस की अंदरूनी कलह
पंजाब में कांग्रेस के आंतरिक विवाद पर राजीव रंजन ने कहा कि लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी 'अक्सर तब जागते हैं जब नुकसान हो चुका होता है।' उन्होंने कहा कि पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी अनुसूचित जाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के मतदाताओं में काफी लोकप्रिय हैं, और राहुल गांधी को इन मतभेदों को सुलझाने में व्यक्तिगत रुचि लेनी चाहिए। भूपेश बघेल की पंजाब में बार-बार की कोशिशों को भी कई लोगों ने स्वीकार नहीं किया है।
तृणमूल कांग्रेस में उत्तराधिकार का संकट
तृणमूल कांग्रेस (TMC) प्रमुख ममता बनर्जी पर टिप्पणी करते हुए राजीव रंजन ने कहा कि यदि वे अभिषेक बनर्जी को राजनीतिक उत्तराधिकारी बनाने पर अड़ी रहती हैं और पार्टी कार्यकर्ताओं की बात नहीं सुनतीं, तो और भी नेता पार्टी छोड़ सकते हैं। उन्होंने याद दिलाया कि मदन मित्रा समेत कई नेता पहले भी पार्टी से दूर हो चुके हैं और संसदीय दल में बड़ी फूट पड़ चुकी है। आगे भी पार्टी में स्थिरता की कोई गारंटी नहीं है।