UP शिक्षा विभाग में बड़ा फेरबदल: प्रताप सिंह बघेल को माध्यमिक और अनिल भूषण चतुर्वेदी को बेसिक शिक्षा की जिम्मेदारी
सारांश
मुख्य बातें
उत्तर प्रदेश सरकार ने 1 जून 2026 को शिक्षा विभाग में अहम प्रशासनिक फेरबदल करते हुए दो वरिष्ठ अधिकारियों को नई जिम्मेदारियाँ सौंपी हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में जारी इस आदेश के तहत प्रताप सिंह बघेल को प्रभारी शिक्षा निदेशक (माध्यमिक) और अनिल भूषण चतुर्वेदी को प्रभारी शिक्षा निदेशक (बेसिक) का दायित्व सौंपा गया है। यह पुनर्विन्यास शिक्षा व्यवस्था को अधिक जवाबदेह और परिणामोन्मुख बनाने की दिशा में उठाया गया कदम माना जा रहा है।
किसे मिली कौन-सी जिम्मेदारी
जारी शासनादेश के अनुसार, प्रताप सिंह बघेल — जो अब तक प्रभारी शिक्षा निदेशक (बेसिक), लखनऊ के पद पर कार्यरत थे — को अब प्रभारी शिक्षा निदेशक (माध्यमिक), प्रयागराज/लखनऊ का दायित्व सौंपा गया है। वहीं, अनिल भूषण चतुर्वेदी — जो प्रभारी निदेशक, साक्षरता एवं वैकल्पिक शिक्षा, लखनऊ के पद पर थे — को प्रभारी शिक्षा निदेशक (बेसिक), लखनऊ की जिम्मेदारी दी गई है।
अधिकारियों का अनुभव और अपेक्षाएँ
दोनों अधिकारी शिक्षा प्रशासन में व्यापक अनुभव रखते हैं। बघेल बेसिक शिक्षा निदेशालय में कार्य कर चुके हैं, जिससे उन्हें माध्यमिक स्तर पर नीतिगत समन्वय में लाभ मिलने की उम्मीद है। चतुर्वेदी का साक्षरता एवं वैकल्पिक शिक्षा में अनुभव बेसिक शिक्षा के समावेशी ढाँचे को मजबूत करने में सहायक माना जा रहा है। शासन का मानना है कि इस पुनर्विन्यास से विभागीय योजनाओं का क्रियान्वयन और समयबद्ध अनुश्रवण दोनों बेहतर होंगे।
शिक्षा सुधारों की पृष्ठभूमि
यह प्रशासनिक बदलाव ऐसे समय में आया है जब उत्तर प्रदेश सरकार राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) के क्रियान्वयन, निपुण भारत मिशन, डिजिटल शिक्षा के विस्तार और विद्यालयी व्यवस्थाओं के सुदृढ़ीकरण पर एक साथ काम कर रही है। गौरतलब है कि बेसिक और माध्यमिक शिक्षा — दोनों स्तरों पर नेतृत्व की स्थिरता इन महत्वाकांक्षी कार्यक्रमों की सफलता के लिए अनिवार्य मानी जाती है।
प्रशासनिक दक्षता पर जोर
योगी सरकार ने पिछले कुछ वर्षों में शिक्षा विभाग में गुणवत्ता सुधार, पारदर्शिता और परिणाम-आधारित कार्यसंस्कृति को प्राथमिकता दी है। इस ताज़ा फेरबदल को उसी नीतिगत दिशा की अगली कड़ी के रूप में देखा जा रहा है। आने वाले महीनों में दोनों अधिकारियों के नेतृत्व में विभागीय समन्वय और जमीनी निगरानी की परीक्षा होगी।