11 अक्टूबर 2026
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पुणे में ECI अधिकारी बनकर ₹8 लाख की ठगी, एक ही दिन में दो बुजुर्गों से साइबर फ्रॉड

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पुणे में ECI अधिकारी बनकर ₹8 लाख की ठगी, एक ही दिन में दो बुजुर्गों से साइबर फ्रॉड

सारांश

पुणे में एक ही दिन दो बुज़ुर्गों को निशाना बनाया गया — दोनों बार आरोपी ने ECI अधिकारी बनकर मोबाइल का एक्सेस लिया और बैंक खाते खाली किए। कुल नुकसान ₹13 लाख से ज़्यादा; आरोपी की पहचान अब तक नहीं।

मुख्य बातें

पुणे में 11 अक्टूबर 2026 को ECI अधिकारी बनकर ठगी के दो अलग मामले सामने आए।
घोरपड़ी निवासी जितेंद्र कुमार आहूजा (78) से ₹8 लाख की ठगी; केस मुंधवा थाने में दर्ज।
येरवडा निवासी कंजाशेरी वैद्यनाथन वेंकटेशन (80) से वोटर कार्ड अपडेट के बहाने ₹5 लाख की ठगी; केस लक्ष्मीनगर थाने में दर्ज।
आरोपी ने संदिग्ध लिंक और APK फाइल के ज़रिए मोबाइल का रिमोट एक्सेस लेकर बैंकिंग पासवर्ड चुराए।
आरोपी का नाम और पता अभी तक अज्ञात; दोनों मामलों की जाँच जारी।

पुणे में 11 अक्टूबर 2026 को साइबर ठगी के दो गंभीर मामले सामने आए, जिनमें अज्ञात आरोपियों ने भारत निर्वाचन आयोग (ECI) के अधिकारी बनकर दो बुजुर्गों — एक 78 वर्षीय और एक 80 वर्षीय — से कुल ₹13 लाख से अधिक की धोखाधड़ी की। पुलिस के अनुसार, दोनों मामलों में आरोपी ने मोबाइल एक्सेस हासिल कर बैंक खातों से राशि उड़ा ली। दोनों मामलों में अलग-अलग थानों में प्राथमिकी दर्ज की गई है और जाँच जारी है।

मुंधवा मामला: ₹8 लाख की ठगी

पहले मामले में, पुणे के घोरपड़ी निवासी जितेंद्र कुमार आहूजा (78) ने 10 अक्टूबर 2026 को मुंधवा थाने में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस के अनुसार, 1 से 3 अक्टूबर के बीच आरोपी ने ECI अधिकारी के रूप में आहूजा से संपर्क किया और कहा कि उनके दस्तावेज़ मेल नहीं खा रहे। इसके बाद आरोपी ने उन्हें एक संदिग्ध लिंक भेजा और जानकारी भरने को कहा।

पुलिस का कहना है कि उस लिंक के ज़रिए आरोपी ने आहूजा के मोबाइल फोन का रिमोट एक्सेस हासिल कर लिया और उनके खाते से ₹8 लाख से अधिक की धनराशि निकाल ली।

लक्ष्मीनगर मामला: ₹5 लाख का वोटर कार्ड अपडेट घोटाला

उसी दिन, पुणे के येरवडा निवासी और एक ऑटोमोटिव मैन्युफैक्चरिंग कंपनी के सेवानिवृत्त कर्मचारी कंजाशेरी वैद्यनाथन वेंकटेशन (80) के साथ भी इसी तर्ज पर ठगी हुई। आरोपी ने उन्हें फोन पर बताया कि चुनाव आयोग कार्यालय से उनके वोटर कार्ड को अपडेट करना ज़रूरी है।

इसके बाद आरोपी ने उन्हें एक APK फाइल डाउनलोड कराई, जिससे उनकी मोबाइल स्क्रीन का एक्सेस हासिल कर लिया गया। पुलिस के अनुसार, आरोपी ने इस तरह बैंकिंग पासवर्ड चुराकर ₹5 लाख का फर्जीवाड़ा किया। इस मामले में लक्ष्मीनगर पुलिस स्टेशन में प्राथमिकी दर्ज है।

आरोपी की पहचान अभी नहीं

अधिकारियों ने बताया कि दोनों मामलों में आरोपी का पूरा नाम और पता अभी तक स्थापित नहीं हो पाया है। दोनों थानों की पुलिस टीमें तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर जाँच कर रही हैं। यह ऐसे समय में सामने आया है जब भारत में 'डिजिटल अरेस्ट' और सरकारी अधिकारी बनकर ठगी के मामले लगातार बढ़ रहे हैं।

साइबर ठगी का यह पैटर्न क्यों है ख़तरनाक

गौरतलब है कि इस किस्म की ठगी में सरकारी संस्थाओं — जैसे ECI, TRAI, CBI — के नाम का उपयोग किया जाता है ताकि पीड़ित का भरोसा जीता जा सके। बुज़ुर्ग नागरिक, जो डिजिटल साक्षरता में कमज़ोर होते हैं, इस तरह के फ्रॉड का आसान निशाना बन जाते हैं। APK फाइल या संदिग्ध लिंक के ज़रिए रिमोट एक्सेस देना आजकल एक प्रचलित तरीका है, जिसे 'रिमोट एक्सेस स्कैम' कहा जाता है।

सावधानी बरतने की अपील

पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि वे अनजान नंबरों से आए किसी भी लिंक पर क्लिक न करें और न ही किसी APK फाइल को डाउनलोड करें। किसी भी सरकारी विभाग के नाम से आई संदिग्ध कॉल की जानकारी तुरंत साइबर क्राइम हेल्पलाइन 1930 पर दी जानी चाहिए। दोनों मामलों में आगे की जाँच के परिणाम आने अभी बाकी हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

क्योंकि पीड़ित सरकारी अनुपालन के डर से लिंक या फाइल डाउनलोड कर लेते हैं। साइबर क्राइम हेल्पलाइन 1930 के बावजूद इस तरह के मामलों में आरोपी की पहचान अक्सर नहीं हो पाती — यह कानून प्रवर्तन की तकनीकी क्षमता और डिजिटल जागरूकता अभियानों की सीमाओं पर गंभीर सवाल उठाता है।
RashtraPress
11 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पुणे में ECI अधिकारी बनकर ठगी के मामले में क्या हुआ?
पुणे में 11 अक्टूबर 2026 को दो अलग-अलग मामलों में अज्ञात आरोपी ने ECI अधिकारी बनकर एक 78 वर्षीय और एक 80 वर्षीय बुजुर्ग को ठगा। दोनों मामलों में संदिग्ध लिंक या APK फाइल के ज़रिए मोबाइल एक्सेस लेकर कुल ₹13 लाख से अधिक उड़ाए गए।
आरोपी ने ठगी के लिए कौन-सा तरीका अपनाया?
आरोपी ने दोनों पीड़ितों को ECI कार्यालय से फोन करने का नाटक किया और दस्तावेज़ या वोटर कार्ड अपडेट का बहाना बनाया। इसके बाद संदिग्ध लिंक या APK फाइल डाउनलोड कराकर मोबाइल स्क्रीन का रिमोट एक्सेस ले लिया और बैंकिंग पासवर्ड चुराकर राशि निकाल ली।
इस साइबर ठगी में कितने रुपए की धोखाधड़ी हुई और कहाँ केस दर्ज है?
घोरपड़ी निवासी जितेंद्र कुमार आहूजा से ₹8 लाख की ठगी हुई और केस मुंधवा थाने में दर्ज है। येरवडा निवासी कंजाशेरी वैद्यनाथन वेंकटेशन से ₹5 लाख की ठगी हुई और केस लक्ष्मीनगर पुलिस स्टेशन में दर्ज है।
क्या आरोपी की पहचान हो पाई है?
पुलिस के अनुसार अब तक दोनों मामलों में आरोपी का पूरा नाम और पता स्थापित नहीं हो पाया है। दोनों थानों की पुलिस टीमें तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर जाँच कर रही हैं।
ऐसी साइबर ठगी से कैसे बचें?
पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि अनजान नंबरों से आए किसी भी लिंक पर क्लिक न करें और न ही कोई APK फाइल डाउनलोड करें। किसी भी संदिग्ध सरकारी अधिकारी की कॉल की सूचना तुरंत साइबर क्राइम हेल्पलाइन 1930 पर दें।
राष्ट्र प्रेस
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