पुणे में वोटर कार्ड फ्रॉड: 80 वर्षीय बुजुर्ग से ₹5 लाख की ठगी; लुधियाना वोटर लिस्ट में भगत सिंह की फोटो
सारांश
मुख्य बातें
चुनावी दस्तावेज़ों से जुड़े दो गंभीर मामले 11 अक्टूबर 2026 को सामने आए हैं — एक पुणे में साइबर ठगी का और दूसरा लुधियाना में वोटर लिस्ट में फोटो की गड़बड़ी का। पुणे में एक जालसाज़ ने खुद को भारत निर्वाचन आयोग का अधिकारी बताकर 80 वर्षीय रिटायर्ड कर्मचारी से ₹5 लाख की ठगी की, जबकि लुधियाना ईस्ट विधानसभा क्षेत्र की वोटर लिस्ट में एक मतदाता के स्थान पर शहीद भगत सिंह की फोटो लगी मिली।
पुणे साइबर ठगी: कैसे हुई वारदात
पुणे के येरवडा इलाके के निवासी और टाटा मोटर्स के सेवानिवृत्त कर्मचारी कांजाशेरी वैद्यनाथन वेंकटेशन (उम्र 80 वर्ष) को अज्ञात आरोपी ने फोन किया और खुद को भारत निर्वाचन आयोग कार्यालय का अधिकारी बताया। आरोपी ने कहा कि उनका वोटर कार्ड अपडेट कराना अनिवार्य है, अन्यथा कार्ड रद्द हो सकता है।
पुलिस के अनुसार, आरोपी ने बुजुर्ग को एक एपीके फाइल डाउनलोड करने के लिए कहा। फाइल डाउनलोड होते ही उसने मोबाइल की स्क्रीन शेयर करवाई और बैंक से जुड़े पासवर्ड हैक कर खाते से ₹5 लाख निकाल लिए। यह रकम तत्काल स्थानांतरित कर दी गई।
कानूनी कार्रवाई और जांच की स्थिति
इस मामले में लक्ष्मीनगर पुलिस थाने में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 308, 318(4), 319(2) तथा आईटी एक्ट की धारा 66(डी) और 66(सी) के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई है। पुलिस ने बताया कि आरोपी का पूरा नाम और पता अभी तक ज्ञात नहीं हो पाया है और जांच जारी है।
गौरतलब है कि यह घटना उस बढ़ते पैटर्न का हिस्सा है जिसमें साइबर अपराधी सरकारी एजेंसियों — चुनाव आयोग, आयकर विभाग या पुलिस — का नाम लेकर बुजुर्गों को निशाना बनाते हैं। एपीके-आधारित स्क्रीन-शेयर फ्रॉड पिछले कुछ वर्षों में तेज़ी से बढ़ा है।
लुधियाना: वोटर लिस्ट में भगत सिंह की फोटो
लुधियाना ईस्ट विधानसभा क्षेत्र के बूथ नंबर 38 की वोटर लिस्ट में सीरियल नंबर 422 पर दर्ज मतदाता अमन कुमार की फोटो की जगह शहीद भगत सिंह की तस्वीर लगी मिली। यह गड़बड़ी सामने आने के बाद विपक्ष ने चुनावी प्रक्रिया में लापरवाही पर तीखे सवाल उठाए हैं।
मामले पर डिप्टी कमिश्नर ने कहा है कि पूरे प्रकरण की जांच कराई जाएगी। यह स्पष्ट नहीं है कि यह चूक तकनीकी त्रुटि है या जानबूझकर की गई गड़बड़ी — जांच के बाद ही वास्तविक कारण सामने आएगा।
आम मतदाताओं पर असर और सावधानी
दोनों मामले मतदाता सूची की विश्वसनीयता और साइबर सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े करते हैं। भारत निर्वाचन आयोग कभी भी फोन पर वोटर कार्ड अपडेट करने के लिए नहीं कहता और न ही किसी एपीके फाइल को डाउनलोड करने का अनुरोध करता है। नागरिकों को सलाह दी जाती है कि ऐसे किसी भी कॉल पर भरोसा न करें और संदेह होने पर तुरंत पुलिस साइबर सेल को सूचित करें।
लुधियाना मामले में चुनाव आयोग के डेटाबेस प्रबंधन और फोटो सत्यापन प्रक्रिया पर नए सिरे से ध्यान देने की ज़रूरत उजागर होती है। विशेषज्ञों का कहना है कि वोटर लिस्ट की तृतीय-पक्ष ऑडिटिंग समय की माँग है।