21 अक्टूबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

मानसा एंटी-ड्रग एक्टिविस्ट परविंदर सिंह झोटा हत्याकांड: सीबीआई ने जांच अपने हाथ में ली

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
मानसा एंटी-ड्रग एक्टिविस्ट परविंदर सिंह झोटा हत्याकांड: सीबीआई ने जांच अपने हाथ में ली

सारांश

मानसा में एंटी-ड्रग एक्टिविस्ट परविंदर सिंह झोटा की हत्या सिर्फ एक अपराध नहीं — यह पंजाब में नशे की खुली बिक्री और उसकी जड़ों की परत दर परत पड़ताल का मोड़ है। सीबीआई के हस्तक्षेप से साफ है कि मामला अब स्थानीय दायरे से बाहर निकल चुका है।

मुख्य बातें

सीबीआई ने पंजाब के मानसा में एंटी-ड्रग एक्टिविस्ट परविंदर सिंह झोटा की हत्या की जांच अपने हाथ में ली।
13 अक्टूबर 2026 को झोटा को गोली मारकर हत्या की गई थी; वह प्रतिबंधित दवाओं की अवैध बिक्री के खिलाफ अभियान चला रहे थे।
सीबीआई पंजाब पुलिस से मामले के दस्तावेज लेगी और केमिस्ट अश्विनी कुमार सहित अन्य की हिरासत माँग सकती है।
हत्या से पहले झोटा का एक फेसबुक लाइव वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें वह मेडिकल स्टोर संचालक से नशीली दवाओं की बिक्री पर सवाल कर रहे थे।
हत्याकांड में मेडिकल स्टोर संचालक की भूमिका की जांच अभी शेष है।

केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने पंजाब के मानसा में 13 अक्टूबर 2026 को हुई एंटी-ड्रग एक्टिविस्ट परविंदर सिंह झोटा की हत्या की जांच औपचारिक रूप से अपने हाथ में ले ली है। एजेंसी से जुड़े सूत्रों के अनुसार, सीबीआई अधिकारी अब यह पता लगाएंगे कि प्रतिबंधित नशीले और साइकोट्रोपिक पदार्थ मानसा की केमिस्ट दुकानों पर खुलेआम किस तरह बेचे जा रहे थे।

जांच का दायरा और अगले कदम

सूत्रों के मुताबिक, सीबीआई जांच के क्रम में पंजाब पुलिस से मामले से संबंधित सभी दस्तावेज अपने कब्जे में लेगी। इसके अतिरिक्त, भ्रष्टाचार-रोधी जांच एजेंसी केमिस्ट अश्विनी कुमार सहित अन्य संदिग्धों की हिरासत की माँग भी कर सकती है। हत्याकांड में मेडिकल स्टोर संचालक की संभावित भूमिका की जांच अभी शेष है।

कौन थे परविंदर सिंह झोटा

परविंदर सिंह झोटा मानसा और आसपास के क्षेत्रों में मेडिकल स्टोरों पर प्रतिबंधित और नशे की लत लगाने वाली दवाओं की कथित अवैध बिक्री के खिलाफ अभियान चलाते थे। वह एंटी-ड्रग टास्क फोर्स से भी जुड़े थे और सोशल मीडिया पर 'झोटा' नाम से जाने जाते थे। उनके नेतृत्व में कई ग्राम पंचायतों ने नशे के खिलाफ प्रस्ताव पारित किए थे।

हत्या से पहले का घटनाक्रम

कथित तौर पर हत्या से ठीक पहले परविंदर सिंह झोटा की एक मेडिकल स्टोर संचालक से नशीली दवाओं की बिक्री को लेकर तीखी बहस हुई थी। सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक फेसबुक लाइव वीडियो में उन्हें उस केमिस्ट दुकान के बाहर संचालक से सवाल करते हुए देखा गया था। 13 अक्टूबर 2026 को उन्हें गोली मारकर हत्या कर दी गई।

मामले का व्यापक संदर्भ

यह ऐसे समय में आया है जब पंजाब में नशे की समस्या एक दीर्घकालिक संकट का रूप ले चुकी है और राज्य में ड्रग-विरोधी अभियानकर्ताओं की सुरक्षा को लेकर सवाल उठते रहे हैं। गौरतलब है कि यह मामला महज एक व्यक्तिगत हत्या तक सीमित नहीं — सीबीआई की जांच के दायरे में नशीली दवाओं की खुली बिक्री और संभावित प्रशासनिक मिलीभगत भी है। सीबीआई का जांच में उतरना इस बात का संकेत है कि केंद्रीय एजेंसियाँ अब इस मामले में गहराई से पड़ताल करने को तैयार हैं। आगे की कार्रवाई में यह स्पष्ट होगा कि नशे की आपूर्ति श्रृंखला कितनी गहरी जड़ें जमाए हुए है।

संपादकीय दृष्टिकोण

तो स्थानीय प्रशासन और पुलिस की क्या भूमिका थी। एक जमीनी कार्यकर्ता को खुलेआम गोली मारने की हिम्मत तब आती है जब अपराधी को लगे कि सिस्टम उनके साथ है। सीबीआई की जांच तभी सार्थक होगी जब वह आपूर्ति श्रृंखला के ऊपरी सिरों तक पहुँचे — केवल केमिस्ट की दुकान तक रहे तो यह भी अधूरी कहानी बनकर रह जाएगी।
RashtraPress
21 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

परविंदर सिंह झोटा कौन थे और उनकी हत्या कैसे हुई?
परविंदर सिंह झोटा पंजाब के मानसा में एंटी-ड्रग एक्टिविस्ट थे, जो मेडिकल स्टोरों पर प्रतिबंधित दवाओं की कथित अवैध बिक्री के खिलाफ अभियान चलाते थे। 13 अक्टूबर 2026 को उन्हें गोली मारकर हत्या कर दी गई।
सीबीआई इस मामले में क्या जांच करेगी?
सीबीआई यह पता लगाएगी कि मानसा की केमिस्ट दुकानों पर प्रतिबंधित साइकोट्रोपिक पदार्थ खुलेआम कैसे बेचे जा रहे थे। एजेंसी पंजाब पुलिस से दस्तावेज लेगी और केमिस्ट अश्विनी कुमार सहित अन्य संदिग्धों की हिरासत माँग सकती है।
हत्याकांड में मेडिकल स्टोर संचालक की क्या भूमिका बताई जा रही है?
कथित तौर पर हत्या से पहले झोटा की एक मेडिकल स्टोर संचालक से नशीली दवाओं की बिक्री को लेकर बहस हुई थी, जो फेसबुक लाइव वीडियो में भी दिखी। हालांकि, हत्याकांड में उस संचालक की सीधी भूमिका की जांच अभी जारी है।
क्या पंजाब में नशे के खिलाफ काम करने वाले कार्यकर्ताओं पर खतरा पहले भी रहा है?
पंजाब में नशे की समस्या दीर्घकालिक संकट का रूप ले चुकी है और ड्रग-विरोधी अभियानकर्ताओं की सुरक्षा को लेकर सवाल पहले भी उठते रहे हैं। झोटा की हत्या ने इस खतरे को एक बार फिर उजागर किया है।
सीबीआई जांच से मामले में क्या बदलाव आएगा?
सीबीआई के हस्तक्षेप से जांच का दायरा राज्य पुलिस से आगे बढ़कर केंद्रीय स्तर पर पहुँचेगा। एजेंसी नशीली दवाओं की आपूर्ति श्रृंखला, संभावित प्रशासनिक मिलीभगत और हत्या के पीछे की साजिश की गहन पड़ताल कर सकती है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम कल
  2. 4 दिन पहले
  3. 5 दिन पहले
  4. 5 दिन पहले
  5. 6 दिन पहले
  6. 6 दिन पहले
  7. 1 सप्ताह पहले
  8. 1 सप्ताह पहले