मानसा में परविंदर झोटा के अंतिम संस्कार पर गतिरोध जारी, परिवार की CBI जांच और CM इस्तीफे की मांग बरकरार
सारांश
मुख्य बातें
मानसा में एंटी-ड्रग एक्टिविस्ट परविंदर सिंह झोटा की हत्या के बाद उनके परिजनों और पंजाब के जिला प्रशासन के बीच 16 अक्टूबर 2026 को हुई बैठक में मांगों पर सहमति नहीं बन सकी। परिजन केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) से जांच और मुख्यमंत्री के इस्तीफे की माँग पर अड़े हैं, जिसके चलते अंतिम संस्कार अनिश्चितकाल के लिए टल गया है और धरना-प्रदर्शन चौथे दिन भी जारी रहा।
धरने का विस्तार और स्वरूप
परविंदर सिंह के समर्थक एवं परिजन मानसा सिविल अस्पताल के बाहर धरने पर बैठे हैं। इसके साथ ही मानसा डिप्टी कमिश्नर की रेजिडेंसी के निकट तिकोनी चौक पर भी प्रदर्शन जारी है। परविंदर को इंसाफ दिलाने के लिए गठित कमेटी अपनी माँगों से पीछे हटने को तैयार नहीं है।
एक्टिविस्ट अवतार सिंह ने कहा, 'चौथे दिन धरना शुरू हो चुका है। कमेटी की मांग है कि राज्य के मुख्यमंत्री और डीजीपी को अपने पदों से इस्तीफा देना चाहिए, लेकिन अभी तक कोई इस्तीफा नहीं हुआ है। इस्तीफा होने के बाद ही परविंदर सिंह का अंतिम संस्कार किया जाएगा।'
इंसाफ कमेटी की प्रमुख माँगें
परविंदर को इंसाफ के लिए बनाई गई कमेटी ने तीन प्रमुख माँगें रखी हैं। पहली — मामले की CBI से जांच। दूसरी — पोस्टमार्टम PGI के डॉक्टरों के पैनल से कराया जाए। तीसरी — शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) परविंदर सिंह को शहीद का दर्जा प्रदान करे।
इसके अतिरिक्त, परविंदर की ओर से गठित एंटी-ड्रग टास्क फोर्स के सदस्यों की माँग है कि जिस स्थान पर उनकी हत्या हुई, वहाँ उनकी प्रतिमा स्थापित की जाए।
अकाल तख्त जत्थेदार का बयान
शुक्रवार को तिकोनी चौक पर हुए धरने में श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गढ़गाज भी शामिल हुए। उन्होंने कहा, 'नशा धर्म के आधार पर भेदभाव नहीं करता। जो कोई भी नशे की लत का शिकार होता है, वह प्रभावित होता है और चिट्टा एक बहुत बड़ी समस्या है।'
जत्थेदार गढ़गाज ने आगे कहा, 'परविंदर सिंह की आवाज हर घर तक पहुंच रही थी, जिसमें वे लोगों से अपने बच्चों को मेडिकल और सिंथेटिक नशीले पदार्थों से बचाने की अपील कर रहे थे। परिवार ने बताया कि नशीले पदार्थों की सप्लाई करने वाले दुकानदार के यहां कई बार छापेमारी हुई और नशीले पदार्थ जब्त भी किए गए, फिर भी वह उन्हें बेचना जारी रखते थे।'
उन्होंने यह भी बताया कि परिवार के अनुसार परविंदर सिंह छह-सात दिनों से इस मुद्दे को उठा रहे थे, किंतु सरकार ने कोई कार्रवाई नहीं की, और अंततः उन्हें गोली का शिकार बना दिया गया। जत्थेदार ने पंजाब में नशे की समस्या पर चिंता जताते हुए कहा कि नशे के खिलाफ लड़ने वाले परविंदर सिंह नौजवानों को बचाते हुए शहीद हुए हैं, और इस जंग में सभी को एकजुट होना चाहिए।
आम जनता और आंदोलन पर असर
यह ऐसे समय में आया है जब पंजाब में नशे की समस्या एक गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य और कानून-व्यवस्था के मुद्दे के रूप में बार-बार सुर्खियाँ बटोरती है। गौरतलब है कि एक एंटी-ड्रग कार्यकर्ता की हत्या के बाद उपजा यह गुस्सा, नागरिक समाज और धार्मिक संस्थाओं — दोनों को एक मंच पर ले आया है। अकाल तख्त के जत्थेदार की मौजूदगी इस प्रदर्शन को व्यापक सामाजिक समर्थन देती है।
प्रदर्शनकारियों और प्रशासन के बीच बातचीत का दौर फिलहाल थमा हुआ है। जब तक राज्य सरकार की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं होती, धरना जारी रहने और मामला और उलझने की आशंका है।