16 अक्टूबर 2026
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मानसा में परविंदर झोटा के अंतिम संस्कार पर गतिरोध जारी, परिवार की CBI जांच और CM इस्तीफे की मांग बरकरार

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मानसा में परविंदर झोटा के अंतिम संस्कार पर गतिरोध जारी, परिवार की CBI जांच और CM इस्तीफे की मांग बरकरार

सारांश

मानसा में नशा-विरोधी कार्यकर्ता परविंदर सिंह झोटा की हत्या के बाद उपजा गुस्सा थमने का नाम नहीं ले रहा। परिवार CBI जांच और CM इस्तीफे से कम पर अंतिम संस्कार नहीं करने पर अडिग है, और अकाल तख्त के जत्थेदार की मौजूदगी ने आंदोलन को एक बड़ा नैतिक बल दे दिया है।

मुख्य बातें

परविंदर सिंह झोटा की हत्या के बाद मानसा में परिजनों और प्रशासन के बीच बैठक 16 अक्टूबर 2026 को बेनतीजा रही।
परिजन CBI जांच , PGI पैनल से पोस्टमार्टम और मुख्यमंत्री व DGP के इस्तीफे की माँग पर अडिग हैं।
मानसा सिविल अस्पताल और तिकोनी चौक पर चौथे दिन भी धरना जारी; अंतिम संस्कार अनिश्चितकाल के लिए टला।
श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गढ़गाज धरने में शामिल हुए, नशे को 'बड़ी समस्या' बताया।
इंसाफ कमेटी ने SGPC से परविंदर सिंह को शहीद का दर्जा देने और हत्या स्थल पर प्रतिमा लगाने की माँग की।

मानसा में एंटी-ड्रग एक्टिविस्ट परविंदर सिंह झोटा की हत्या के बाद उनके परिजनों और पंजाब के जिला प्रशासन के बीच 16 अक्टूबर 2026 को हुई बैठक में मांगों पर सहमति नहीं बन सकी। परिजन केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) से जांच और मुख्यमंत्री के इस्तीफे की माँग पर अड़े हैं, जिसके चलते अंतिम संस्कार अनिश्चितकाल के लिए टल गया है और धरना-प्रदर्शन चौथे दिन भी जारी रहा।

धरने का विस्तार और स्वरूप

परविंदर सिंह के समर्थक एवं परिजन मानसा सिविल अस्पताल के बाहर धरने पर बैठे हैं। इसके साथ ही मानसा डिप्टी कमिश्नर की रेजिडेंसी के निकट तिकोनी चौक पर भी प्रदर्शन जारी है। परविंदर को इंसाफ दिलाने के लिए गठित कमेटी अपनी माँगों से पीछे हटने को तैयार नहीं है।

एक्टिविस्ट अवतार सिंह ने कहा, 'चौथे दिन धरना शुरू हो चुका है। कमेटी की मांग है कि राज्य के मुख्यमंत्री और डीजीपी को अपने पदों से इस्तीफा देना चाहिए, लेकिन अभी तक कोई इस्तीफा नहीं हुआ है। इस्तीफा होने के बाद ही परविंदर सिंह का अंतिम संस्कार किया जाएगा।'

इंसाफ कमेटी की प्रमुख माँगें

परविंदर को इंसाफ के लिए बनाई गई कमेटी ने तीन प्रमुख माँगें रखी हैं। पहली — मामले की CBI से जांच। दूसरी — पोस्टमार्टम PGI के डॉक्टरों के पैनल से कराया जाए। तीसरी — शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) परविंदर सिंह को शहीद का दर्जा प्रदान करे।

इसके अतिरिक्त, परविंदर की ओर से गठित एंटी-ड्रग टास्क फोर्स के सदस्यों की माँग है कि जिस स्थान पर उनकी हत्या हुई, वहाँ उनकी प्रतिमा स्थापित की जाए।

अकाल तख्त जत्थेदार का बयान

शुक्रवार को तिकोनी चौक पर हुए धरने में श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गढ़गाज भी शामिल हुए। उन्होंने कहा, 'नशा धर्म के आधार पर भेदभाव नहीं करता। जो कोई भी नशे की लत का शिकार होता है, वह प्रभावित होता है और चिट्टा एक बहुत बड़ी समस्या है।'

जत्थेदार गढ़गाज ने आगे कहा, 'परविंदर सिंह की आवाज हर घर तक पहुंच रही थी, जिसमें वे लोगों से अपने बच्चों को मेडिकल और सिंथेटिक नशीले पदार्थों से बचाने की अपील कर रहे थे। परिवार ने बताया कि नशीले पदार्थों की सप्लाई करने वाले दुकानदार के यहां कई बार छापेमारी हुई और नशीले पदार्थ जब्त भी किए गए, फिर भी वह उन्हें बेचना जारी रखते थे।'

उन्होंने यह भी बताया कि परिवार के अनुसार परविंदर सिंह छह-सात दिनों से इस मुद्दे को उठा रहे थे, किंतु सरकार ने कोई कार्रवाई नहीं की, और अंततः उन्हें गोली का शिकार बना दिया गया। जत्थेदार ने पंजाब में नशे की समस्या पर चिंता जताते हुए कहा कि नशे के खिलाफ लड़ने वाले परविंदर सिंह नौजवानों को बचाते हुए शहीद हुए हैं, और इस जंग में सभी को एकजुट होना चाहिए।

आम जनता और आंदोलन पर असर

यह ऐसे समय में आया है जब पंजाब में नशे की समस्या एक गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य और कानून-व्यवस्था के मुद्दे के रूप में बार-बार सुर्खियाँ बटोरती है। गौरतलब है कि एक एंटी-ड्रग कार्यकर्ता की हत्या के बाद उपजा यह गुस्सा, नागरिक समाज और धार्मिक संस्थाओं — दोनों को एक मंच पर ले आया है। अकाल तख्त के जत्थेदार की मौजूदगी इस प्रदर्शन को व्यापक सामाजिक समर्थन देती है।

प्रदर्शनकारियों और प्रशासन के बीच बातचीत का दौर फिलहाल थमा हुआ है। जब तक राज्य सरकार की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं होती, धरना जारी रहने और मामला और उलझने की आशंका है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जिसे सरकार आसानी से नजरअंदाज नहीं कर सकती। CM इस्तीफे जैसी अधिकतम माँगें अक्सर वार्ता की रणनीति होती हैं, लेकिन CBI जांच और पोस्टमार्टम पैनल की माँग ठोस और जायज लगती है — खासकर जब परिवार का दावा है कि सरकार को पहले से सचेत किया गया था पर कार्रवाई नहीं हुई। असली परीक्षा यह होगी कि राज्य सरकार इस मामले को कानून-व्यवस्था की समस्या के रूप में देखती है या नागरिक सुरक्षा की विफलता के रूप में।
RashtraPress
16 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

परविंदर सिंह झोटा कौन थे और उनकी हत्या क्यों हुई?
परविंदर सिंह झोटा पंजाब के मानसा जिले के एंटी-ड्रग एक्टिविस्ट थे, जो नशीले पदार्थों की सप्लाई के खिलाफ सक्रिय रूप से आवाज उठा रहे थे। परिवार और अकाल तख्त जत्थेदार के अनुसार, वे हत्या से पहले छह-सात दिनों से एक नशा विक्रेता के बारे में शिकायत कर रहे थे, लेकिन सरकार ने कोई कार्रवाई नहीं की।
परविंदर झोटा के परिजनों की मुख्य माँगें क्या हैं?
परिजन और इंसाफ कमेटी मामले की CBI जांच, PGI डॉक्टरों के पैनल से पोस्टमार्टम, मुख्यमंत्री और DGP का इस्तीफा, SGPC से शहीद का दर्जा और हत्या स्थल पर प्रतिमा स्थापना की माँग कर रहे हैं। जब तक ये माँगें नहीं मानी जातीं, अंतिम संस्कार नहीं किया जाएगा।
मानसा में धरना कहाँ और कितने समय से जारी है?
धरना मानसा सिविल अस्पताल के बाहर और डिप्टी कमिश्नर की रेजिडेंसी के निकट तिकोनी चौक पर जारी है। 16 अक्टूबर 2026 को यह चौथा दिन था, और प्रशासन के साथ बैठक बेनतीजा रहने के बाद प्रदर्शन जारी है।
अकाल तख्त के जत्थेदार ने धरने में क्या कहा?
श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गढ़गाज ने तिकोनी चौक पर धरने में शामिल होते हुए कहा कि नशा धर्म के आधार पर भेदभाव नहीं करता और 'चिट्टा' एक बड़ी समस्या है। उन्होंने परविंदर सिंह को नौजवानों को बचाते हुए शहीद हुआ बताया और सभी को एकजुट होकर नशे के खिलाफ लड़ने की अपील की।
परविंदर झोटा मामले में प्रशासन ने क्या रुख अपनाया है?
जिला प्रशासन ने परिजनों के साथ बैठक की, लेकिन 16 अक्टूबर 2026 तक कोई सहमति नहीं बनी। परिवार की CBI जांच और मुख्यमंत्री के इस्तीफे जैसी माँगों पर प्रशासन की ओर से अभी तक कोई सकारात्मक आश्वासन नहीं मिला है।
राष्ट्र प्रेस
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