पंजाबी, पहाड़ी और गोजरी को आधिकारिक दर्जा: J&K उपमुख्यमंत्री सुरिंदर चौधरी का बजट सत्र में विधेयक का वादा
सारांश
मुख्य बातें
जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री सुरिंदर चौधरी ने 17 अक्टूबर को नौशेरा में विकास परियोजनाओं के निरीक्षण के दौरान स्पष्ट किया कि आगामी बजट सत्र में पंजाबी, पहाड़ी और गोजरी भाषाओं को आधिकारिक दर्जा दिलाने हेतु विधेयक लाया जाएगा। उन्होंने साथ ही भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर पंजाबी भाषा के मुद्दे पर राजनीति करने और जनता को गुमराह करने का आरोप लगाया।
मुख्य घटनाक्रम
चौधरी ने बताया कि मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने इस विषय पर राज्यसभा सांसद शमी ओबराय को ज़िम्मेदारी सौंपी थी। श्रीनगर में सिख नेताओं के साथ हुई बैठक में सरकार की ओर से आश्वासन दिया गया कि अगले बजट सत्र में तीनों भाषाओं — पंजाबी, पहाड़ी और गोजरी — को आधिकारिक भाषा का दर्जा देने के लिए विधेयक प्रस्तुत किया जाएगा।
उपमुख्यमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि कुछ तत्वों ने यह भ्रामक धारणा फैलाने की कोशिश की कि वे पंजाबी भाषा के विरोध में हैं। उन्होंने नौशेरा और जम्मू-कश्मीर के सिख समुदाय का आभार जताया, जिसने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर इन आरोपों का खंडन किया।
भाजपा पर सीधा हमला
चौधरी ने BJP पर कड़े सवाल दागते हुए कहा कि यदि उन्हें पंजाबी भाषा की वास्तव में चिंता थी, तो पिछले 12 वर्षों में इस दिशा में कोई ठोस कदम क्यों नहीं उठाया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि BJP के शासनकाल में पंजाबी को CBSE के पाठ्यक्रम से बाहर कर दिया गया था।
उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि हाल ही में आयोजित दस दिवसीय विधानसभा सत्र में BJP के 29 विधायक उपस्थित थे, फिर भी पंजाबी भाषा के लिए कोई प्रस्ताव या विधेयक नहीं लाया गया। उनके अनुसार, BJP के कुछ नेता अब पंजाबी भाषा के हितैषी बन रहे हैं, जबकि उनके दावों और कार्यों में स्पष्ट विरोधाभास है।
भाषा और समुदाय का व्यापक संदर्भ
चौधरी ने रेखांकित किया कि पंजाबी भाषा की माँग दशकों पुरानी है और इसे किसी एक धर्म या समुदाय तक सीमित करके नहीं देखा जाना चाहिए। उनके अनुसार, पंजाबी भाषा का महत्व देश की धर्मनिरपेक्ष परंपरा से भी जुड़ा है। उन्होंने कहा कि जहाँ सिख समुदाय पंजाबी पढ़ता है, वहीं अन्य समुदायों को भी यह भाषा सीखने का अवसर मिलना चाहिए।
यह ऐसे समय में आया है जब जम्मू-कश्मीर में नेशनल कॉन्फ्रेंस की नई सरकार अपनी प्राथमिकताएँ तय कर रही है और क्षेत्रीय पहचान के सवाल राजनीतिक विमर्श के केंद्र में हैं।
सरकार की प्रतिबद्धता और जनता से अपील
चौधरी ने मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और डॉ. फारूक अब्दुल्ला की सिख समुदाय के प्रति सकारात्मक सोच का उल्लेख करते हुए कहा कि अब्दुल्ला परिवार और सिख समुदाय के बीच लंबे समय से सौहार्दपूर्ण संबंध रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि नेशनल कॉन्फ्रेंस की सरकारों ने सिख समुदाय को प्रतिनिधित्व देने का सातत्यपूर्ण प्रयास किया है।
उपमुख्यमंत्री ने जनता से अपील की कि वे अपनी समस्याएँ सीधे मुख्यमंत्री और सरकार के समक्ष रखें। उन्होंने आश्वासन दिया कि सरकार के अधिकार क्षेत्र में आने वाली समस्याओं का समाधान किया जाएगा और जो मामले उसके दायरे से बाहर होंगे, उनके बारे में जनता को स्पष्ट जानकारी दी जाएगी।
आगे क्या होगा
अब सबकी नज़रें आगामी बजट सत्र पर टिकी हैं, जिसमें पंजाबी, पहाड़ी और गोजरी को आधिकारिक भाषा का दर्जा देने वाला विधेयक पेश होने की उम्मीद है। यदि यह विधेयक पारित होता है, तो यह जम्मू-कश्मीर की भाषाई विविधता को संवैधानिक मान्यता दिलाने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम होगा।