जम्मू-कश्मीर में PSU बंद नहीं होंगे: उपमुख्यमंत्री सुरिंदर चौधरी का ऐलान, घाटे के जिम्मेदारों पर होगी कार्रवाई
सारांश
मुख्य बातें
जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री सुरिंदर चौधरी ने मंगलवार, 6 अक्टूबर 2026 को स्पष्ट किया कि केंद्र शासित प्रदेश सरकार के पास सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (PSU) को बंद करने की कोई नीति नहीं है। उन्होंने कहा कि PSU को घाटे में ले जाने वाले अधिकारियों और नेताओं दोनों को जवाबदेह ठहराया जाएगा। यह बयान ऐसे समय में आया है जब जम्मू-कश्मीर के PSU की वित्तीय स्थिति और उनके भविष्य को लेकर सार्वजनिक बहस तेज़ हो रही है।
PSU पर सरकार की स्पष्ट नीति
श्रीनगर में पत्रकारों से बातचीत में उपमुख्यमंत्री चौधरी ने कहा, 'उन्हें क्यों बंद किया जाए? हमें कारणों और वजहों का पता लगाना होगा। PSU घाटे में कैसे गया? जिन अधिकारियों ने इसे घाटे में डाला, उन्हें जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए और जिन नेताओं ने इसे घाटे में डाला, उन्हें भी जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए।' उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि PSU जम्मू-कश्मीर की विरासत का हिस्सा हैं और वित्तीय कठिनाइयों के आधार पर उन्हें बंद करना उचित नहीं होगा।
चौधरी ने यह भी बताया कि कुछ बंद पड़ी संस्थाओं को फिर से शुरू किया जा सकता है या नहीं, इसकी जाँच के लिए समितियाँ गठित की गई हैं। उन्होंने कहा, 'मैं आपके सामने खड़ा हूँ — उमर अब्दुल्ला की किसी भी PSU को बंद करने की कोई नीति नहीं है।'
CAG रिपोर्ट और जवाबदेही का ढाँचा
उपमुख्यमंत्री ने नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक (CAG) की रिपोर्ट का उल्लेख करते हुए कहा कि कोई भी अंतिम निर्णय लेने से पहले उसकी गहन समीक्षा की जाएगी। उन्होंने कहा, 'इस पर चर्चा होगी, बहस होगी। उसके बाद ही हम किसी नतीजे पर पहुँचेंगे।' गौरतलब है कि CAG रिपोर्टें अक्सर PSU के वित्तीय कुप्रबंधन पर गंभीर टिप्पणियाँ करती हैं, और इस बार सरकार ने उन्हें नज़रअंदाज़ करने के बजाय उन्हें नीति-निर्धारण का आधार बनाने का संकेत दिया है।
₹28,400 करोड़ के औद्योगिक पैकेज पर नई नीति
₹28,400 करोड़ के औद्योगिक पैकेज के क्रियान्वयन को लेकर उद्योगपतियों की चिंताओं पर चौधरी ने बताया कि एक नई औद्योगिक नीति अंतिम चरण में है। उन्होंने कहा, 'उद्योग विभाग ने मुख्यमंत्री के निर्देश पर बहुत मेहनत की है। अतीत में जो भी कमियाँ रही हैं — कथित भेदभाव और रुकावटें — उन्हें नई नीति के तहत नहीं दोहराया जाएगा।' यह नई इंडस्ट्रियल पॉलिसी पिछली नीति की खामियों को दूर कर उद्योगपतियों को पूरा लाभ दिलाने का प्रयास करेगी।
विपक्ष की आलोचना और चुनावी विवाद
भारतीय जनता पार्टी (BJP) और पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (PDP) की ओर से यह आरोप लगाया गया है कि उमर अब्दुल्ला सरकार ने चुनावी घोषणा-पत्र के वादों का बहुत कम हिस्सा पूरा किया है। इस पर चौधरी ने पलटवार करते हुए कहा कि दोनों दलों को पहले हाल ही में हुए विधानसभा सत्र में अपने कामकाज का हिसाब देना चाहिए।
वोटर लिस्ट विवाद पर उपमुख्यमंत्री ने कहा कि यह मामला सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष है और न्यायालय का निर्णय ही सच्चाई सामने लाएगा। उन्होंने लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं की महत्ता पर ज़ोर देते हुए कहा कि लोगों ने देश की संवैधानिक व्यवस्था के लिए बड़ी कुर्बानियाँ दी हैं।
आगे की राह
समितियों की जाँच रिपोर्ट और CAG समीक्षा के बाद PSU के भविष्य पर अंतिम निर्णय अपेक्षित है। साथ ही, नई औद्योगिक नीति के जल्द ही सार्वजनिक होने की उम्मीद है, जो जम्मू-कश्मीर के औद्योगिक परिदृश्य को नई दिशा दे सकती है।