जम्मू-कश्मीर विधानसभा अध्यक्ष का आदेश: 15 दिनों में अधिसूचित हो 'एक अधिकारी, एक कार' नीति
सारांश
मुख्य बातें
जम्मू-कश्मीर विधानसभा के अध्यक्ष अब्दुल रहीम राथर ने बुधवार, 30 सितंबर 2026 को श्रीनगर में सरकार को स्पष्ट निर्देश दिया कि संशोधित कार नीति को 15 दिनों के भीतर अधिसूचित किया जाए। विधानसभा में 'एक अधिकारी, एक कार' नीति के क्रियान्वयन पर हुई चर्चा के दौरान राथर ने सरकारी संसाधनों के संभावित दुरुपयोग पर कड़ी नाराज़गी जताई।
विधानसभा अध्यक्ष की सख्त चेतावनी
अध्यक्ष राथर ने कहा कि यह मुद्दा सीधे तौर पर सार्वजनिक संपत्ति और सरकारी संसाधनों के उपयोग से जुड़ा है और इसे अब और अधिक समय तक लंबित नहीं रखा जा सकता। उन्होंने परिवहन मंत्री सतीश शर्मा को व्यक्तिगत रूप से यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया कि नीति तय समयसीमा में अधिसूचित हो।
राथर ने तीखे स्वर में यह भी सवाल उठाया कि इस मामले में कार्रवाई करने में करीब पाँच साल क्यों लग गए। उनके अनुसार, इतनी लंबी देरी सरकारी संसाधनों के अनावश्यक दोहन को बढ़ावा देती है।
क्या है 'एक अधिकारी, एक कार' नीति
केंद्र सरकार के वित्त मंत्रालय के व्यय विभाग ने यह नीति वरिष्ठ नौकरशाहों को एक से अधिक सरकारी वाहन रखने से रोकने के लिए शुरू की थी। संशोधित नीति के अंतर्गत योग्य अधिकारी को केवल एक आधिकारिक स्टाफ कार मिलेगी — भले ही उसके पास किसी अन्य विभाग, मंत्रालय, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम (PSU) या स्वायत्त संस्था का अतिरिक्त प्रभार हो।
इसके अलावा, केंद्र सरकार के अधिकारी किसी PSU या अर्ध-सरकारी संस्था की स्टाफ कार अपने नियमित उपयोग के लिए नहीं रख सकते — केवल मंजूर आधिकारिक दौरों के दौरान ऐसा संभव होगा।
वित्तीय नुकसान की तस्वीर
आधिकारिक वित्तीय आकलन के अनुसार, एक सरकारी वाहन के रखरखाव और सर्विस पर सालाना करीब ₹3.37 लाख खर्च होते हैं। पहले की व्यवस्था में एक ही अधिकारी के पास एक साथ दो या तीन सरकारी वाहन तक हो सकते थे, जिससे हर माह तय 250 लीटर की ईंधन सीमा के बजाय 750 लीटर तक की खपत हो जाती थी।
गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब जम्मू-कश्मीर प्रशासन वित्तीय अनुशासन और पारदर्शिता को लेकर सख्त कदम उठाने की बात कर रहा है।
नीति के प्रमुख प्रावधान
आधिकारिक ज्ञापन के ज़रिए लागू इस नीति में निम्नलिखित प्रमुख प्रावधान किए गए हैं: यदि कोई अधिकारी अपने नियमित पद के लिए पहले से सरकारी कार का उपयोग कर रहा है और उसे किसी अन्य विभाग का अतिरिक्त प्रभार मिलता है, तो उसे दूसरी कार नहीं दी जाएगी। विभागों को सभी अतिरिक्त और अनुपयोगी सरकारी वाहनों को सुरक्षित स्थान पर रखना होगा ताकि अनधिकृत उपयोग पर अंकुश लगाया जा सके।
साथ ही, नीति में पुराने वाहनों के स्थान पर विभागों को इलेक्ट्रिक वाहन लीज पर लेने के लिए भी प्रोत्साहित किया गया है, जो सरकार की हरित परिवहन प्राथमिकता के अनुरूप है।
आगे क्या होगा
विधानसभा अध्यक्ष के निर्देश के बाद अब परिवहन मंत्री सतीश शर्मा पर दबाव है कि वे 15 अक्टूबर 2026 तक नीति अधिसूचित करें। यदि समयसीमा में अधिसूचना नहीं होती, तो विधानसभा में इस मुद्दे पर और तीखी बहस की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।