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क्यूबेक मंत्री क्रिस्टोफर स्कीट का ऐलान: एआई, एयरोस्पेस और निवेश में भारत के साथ गहरी साझेदारी की तैयारी

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क्यूबेक मंत्री क्रिस्टोफर स्कीट का ऐलान: एआई, एयरोस्पेस और निवेश में भारत के साथ गहरी साझेदारी की तैयारी

सारांश

क्यूबेक के मंत्री क्रिस्टोफर स्कीट ने भारत के साथ एआई, एयरोस्पेस और शिक्षा में ठोस साझेदारी का खाका खींचा है — लंबे वादों से नहीं, बल्कि तत्काल व्यावसायिक नतीजों पर जोर देते हुए। यह कदम ऐसे समय आया है जब भारत-कनाडा संबंध नई दिशा तलाश रहे हैं।

मुख्य बातें

क्यूबेक मंत्री क्रिस्टोफर स्कीट ने 7 जुलाई 2026 को भारत के साथ एआई, एयरोस्पेस, शिक्षा और क्लीन टेक्नोलॉजी में सहयोग गहरा करने की प्रतिबद्धता जताई।
क्यूबेक और भारत के विश्वविद्यालयों के बीच मौजूदा शैक्षणिक सहयोग को और विस्तार देने की योजना है।
स्कीट ने भारतीय कंपनियों को क्यूबेक में निवेश और कारोबार के लिए खुला आमंत्रण दिया।
मंत्री ने सुरक्षित सप्लाई चेन और भरोसेमंद साझेदारियों को वैश्विक प्राथमिकता बताया।
स्कीट ने यात्रा के दौरान राज्य और केंद्र सरकार दोनों स्तर के अधिकारियों से मुलाकात की।

कनाडा के क्यूबेक प्रांत के अंतरराष्ट्रीय संबंध एवं ला फ्रैंकोफोनी मंत्री क्रिस्टोफर स्कीट ने 7 जुलाई 2026 को स्पष्ट किया कि क्यूबेक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), एयरोस्पेस, शिक्षा और क्लीन टेक्नोलॉजी जैसे रणनीतिक क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाकर भारत के साथ अपने आर्थिक संबंधों को नई ऊँचाई देना चाहता है। उन्होंने दोनों पक्षों के बीच निवेश और व्यावसायिक साझेदारी को तत्काल प्राथमिकता बताया।

मुख्य घोषणाएँ और प्राथमिकता क्षेत्र

स्कीट ने कहा कि क्यूबेक अपनी अर्थव्यवस्था में विविधता लाने और भारत के साथ दीर्घकालिक, स्थिर साझेदारी विकसित करने पर ध्यान केंद्रित कर रहा है। उन्होंने एआई, एयरोस्पेस और शिक्षा को सर्वाधिक संभावनाओं वाले क्षेत्र बताया।

उन्होंने कहा, "एयरोस्पेस एक बेहतरीन क्षेत्र है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस भी एक महत्वपूर्ण क्षेत्र है और शिक्षा भी। हमारे विश्वविद्यालयों के बीच काफी करीबी सहयोग है, जिसे और मजबूत करने की जरूरत है।"

विश्वविद्यालयों के बीच सहयोग पर जोर

स्कीट ने रेखांकित किया कि क्यूबेक और भारत के विश्वविद्यालयों के बीच पहले से ही मजबूत शैक्षणिक तालमेल मौजूद है। उनके अनुसार इस आधार को और विस्तार देकर अनुसंधान, नवाचार और प्रतिभा-विनिमय के नए रास्ते खोले जा सकते हैं।

यह ऐसे समय में आया है जब भारत वैश्विक उच्च-शिक्षा साझेदारियों को तेज़ी से प्रोत्साहित कर रहा है और कई प्रमुख विश्वविद्यालय विदेशी कैंपस की संभावनाएँ तलाश रहे हैं।

सुरक्षित सप्लाई चेन और भरोसेमंद साझेदारी

मंत्री ने कहा कि दुनिया तेज़ी से बदल रही है और सुरक्षित सप्लाई चेन तथा भरोसेमंद साझेदारियाँ विकसित करने के लिए देशों को मिलकर काम करना होगा। उनके अनुसार भारत और क्यूबेक इस दिशा में प्रभावी साझेदारी कर सकते हैं।

उन्होंने कहा, "आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस भविष्य तय करता है और क्यूबेक इस मामले में बहुत अच्छी स्थिति में है। हम मिलकर बहुत कुछ कर सकते हैं। एयरोस्पेस एक और प्राथमिकता है जहाँ दोनों पक्षों के पास बड़े मौके हैं।"

भारतीय निवेशकों को आमंत्रण

स्कीट ने भारतीय कंपनियों को क्यूबेक में निवेश और कारोबार के अवसर तलाशने का खुला आमंत्रण दिया। उन्होंने कहा कि यह प्रांत उद्यमिता और नवाचार-आधारित व्यवसायों के लिए अनुकूल माहौल उपलब्ध कराता है।

उन्होंने कहा, "भारतीय निवेशकों के लिए यहाँ अनेक अवसर हैं। हमें भारतीय उद्यमियों की सोच और उद्यमिता का अनुभव पसंद है। भारतीय कंपनियों के लिए क्यूबेक में निवेश और कारोबार की अच्छी संभावनाएँ हैं, वहीं क्यूबेक की कंपनियों के लिए भारत में भी व्यापक अवसर मौजूद हैं।"

ठोस नतीजों पर नज़र, दीर्घकालिक लक्ष्य

स्कीट ने स्पष्ट किया कि लंबे समय के लक्ष्य तय करने के बजाय अभी का ध्यान ठोस व्यावसायिक नतीजे बनाने पर है। उन्होंने कहा, "हमें भारत से बिज़नेस को क्यूबेक लाने की जरूरत है, हमें क्यूबेक से बिज़नेस को यहाँ लाने की जरूरत है, और हमें उन कनेक्शन को अभी से बढ़ावा देने की जरूरत है ताकि 10 साल में हम कह सकें कि यह एक बड़ी सफलता थी।"

गौरतलब है कि स्कीट ने अपनी यात्रा के दौरान राज्य और केंद्र सरकार, दोनों स्तर के अधिकारियों से मुलाकात की और संस्थागत सहयोग को और मजबूत करने की इच्छा जताई। आने वाले महीनों में दोनों पक्षों के बीच व्यापारिक प्रतिनिधिमंडलों की आवाजाही और तेज़ होने की उम्मीद है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली परीक्षा क्रियान्वयन की होगी — खासकर तब जब भारत-कनाडा संबंध हाल के वर्षों में राजनयिक तनाव से गुज़रे हैं। स्कीट का 'ठोस नतीजों पर अभी ध्यान' वाला रुख व्यावहारिक है, पर संस्थागत सहयोग के लिए केंद्र सरकार की सक्रिय भागीदारी अनिवार्य है। एआई में क्यूबेक की मॉन्ट्रियल-केंद्रित ताकत और भारत की तकनीकी प्रतिभा का संयोजन वास्तविक संभावनाएँ रखता है, बशर्ते वीज़ा, डेटा-साझाकरण और बौद्धिक संपदा जैसी बाधाओं को दूर किया जाए — जिनका स्कीट के बयान में कोई उल्लेख नहीं है।
RashtraPress
7 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

क्यूबेक मंत्री क्रिस्टोफर स्कीट ने भारत के साथ किन क्षेत्रों में सहयोग की बात कही है?
स्कीट ने एआई, एयरोस्पेस, शिक्षा और क्लीन टेक्नोलॉजी को प्रमुख सहयोग क्षेत्र बताया है। उन्होंने कहा कि इन क्षेत्रों में दोनों पक्षों के पास अपार संभावनाएँ हैं और विश्वविद्यालयों के बीच मौजूदा सहयोग को और मजबूत किया जाएगा।
क्यूबेक भारत के साथ आर्थिक संबंध क्यों बढ़ाना चाहता है?
क्यूबेक अपनी अर्थव्यवस्था में विविधता लाना चाहता है और भारत को एक दीर्घकालिक, भरोसेमंद साझेदार के रूप में देखता है। स्कीट के अनुसार, बदलती वैश्विक परिस्थितियों में सुरक्षित सप्लाई चेन और मज़बूत द्विपक्षीय व्यापार दोनों देशों के हित में है।
भारतीय कंपनियों के लिए क्यूबेक में क्या अवसर हैं?
स्कीट ने कहा कि क्यूबेक उद्यमिता और नवाचार-आधारित व्यवसायों के लिए अनुकूल माहौल देता है। भारतीय निवेशकों को विशेष रूप से एआई, एयरोस्पेस और क्लीन टेक्नोलॉजी क्षेत्रों में कारोबार के अवसर उपलब्ध हैं।
क्यूबेक-भारत शिक्षा सहयोग की क्या स्थिति है?
स्कीट के अनुसार, दोनों देशों के विश्वविद्यालयों के बीच पहले से मजबूत शैक्षणिक तालमेल है। इसे अनुसंधान, नवाचार और प्रतिभा-विनिमय के नए रास्तों तक विस्तारित करने की योजना है।
क्यूबेक और भारत के बीच साझेदारी के अगले कदम क्या होंगे?
स्कीट ने संकेत दिया कि संस्थागत सहयोग को मजबूत करने और व्यापारिक प्रतिनिधिमंडलों की आवाजाही बढ़ाने पर ध्यान दिया जाएगा। उन्होंने केंद्र और राज्य सरकार दोनों स्तर के अधिकारियों से मुलाकात की और तत्काल ठोस व्यावसायिक नतीजे बनाने को प्राथमिकता बताया।
राष्ट्र प्रेस
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