राहुल गांधी पाकिस्तान की भाषा बोलते हैं — नितेश राणे का तीखा हमला
सारांश
मुख्य बातें
महाराष्ट्र सरकार के मंत्री नितेश राणे ने 9 जून 2026 को मुंबई में लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी पर कड़ा प्रहार किया। अमेरिका-ईरान संघर्ष को लेकर राहुल गांधी द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आलोचना के जवाब में राणे ने कहा कि कांग्रेस नेता की भाषा और पाकिस्तान की भाषा में कोई अंतर नहीं है।
राणे का सीधा आरोप
नितेश राणे ने कहा, 'मैं पहले भी यह बात कह चुका हूँ और आज फिर दोहरा रहा हूँ कि राहुल गांधी पाकिस्तान के एजेंट की तरह बोलते हैं। पाकिस्तान से जो स्क्रिप्ट उन्हें मिलती है, वही भाषा वह भारत में आकर बोलते हैं। इसलिए राहुल गांधी और पाकिस्तान की भाषा में कोई फर्क नहीं है।' यह बयान ऐसे समय में आया है जब अमेरिका-ईरान तनाव के बीच विपक्ष और सत्तापक्ष के बीच वाकयुद्ध तेज हो गया है।
निदा खान और एआईएमआईएम पर निशाना
टीसीएस मामले में निदा खान के बयान पर भी राणे ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि निदा खान ने जो कहा वह उनके अनुसार सच्चाई है और यह बयान 'जिहादियों की सोच' को उजागर करता है। राणे ने आरोप लगाया कि कुछ लोग भारत और महाराष्ट्र में 'जिहाद' की मंशा से आते हैं और सुविधाएँ मिलने के बावजूद देश के विरुद्ध काम करते हैं।
राणे ने कहा, 'हम उन्हें दूध पिलाते हैं, लेकिन वे हमें ही नुकसान पहुँचाते हैं। इसलिए हम उन्हें 'ग्रीन स्नेक' कहते हैं। जिन्होंने उनका समर्थन किया और उन्हें छिपाकर रखा, वे भी जिहादियों से अलग नहीं हैं।' उन्होंने ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) को 'आतंकवादी संगठन' बताते हुए उस पर प्रतिबंध लगाने की माँग दोहराई।
मोदी के ऐतिहासिक कार्यकाल पर बधाई
राणे ने 10 जून को प्रधानमंत्री मोदी के भारत के सबसे लंबे समय तक लगातार सेवा देने वाले प्रधानमंत्री बनने पर उन्हें बधाई दी। उन्होंने कहा कि पिछले 12 वर्षों में मोदी के नेतृत्व में भारत लगातार आगे बढ़ा है और आज एक बड़ी वैश्विक शक्ति के रूप में उभर रहा है। गौरतलब है कि अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत की छवि में आए बदलाव का श्रेय राणे ने मोदी की दूरदर्शी सोच और आत्मविश्वास को दिया।
राजनीतिक संदर्भ
नितेश राणे का यह बयान भारतीय जनता पार्टी (BJP) और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस / INC) के बीच चल रही तीखी नोकझोंक की कड़ी में नया अध्याय जोड़ता है। आलोचकों का कहना है कि इस तरह के बयान राजनीतिक ध्रुवीकरण को बढ़ावा देते हैं, जबकि सत्तापक्ष इसे राष्ट्रीय सुरक्षा के प्रति सजगता का प्रमाण बताता है। राहुल गांधी की ओर से अभी तक इस बयान पर कोई औपचारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।