रेलवन ऐप के 4.76 करोड़ डाउनलोड्स, प्रतिदिन 10 लाख टिकट बुकिंग का नया रिकॉर्ड
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय रेलवे के एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म रेलवन ऐप ने 4.76 करोड़ डाउनलोड्स का आँकड़ा पार कर लिया है और प्रतिदिन औसतन 10 लाख टिकट बुकिंग का रिकॉर्ड दर्ज किया गया है। केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बुधवार, 12 अगस्त 2026 को लोकसभा में एक प्रश्न के उत्तर में यह जानकारी साझा की। रेलवे की डिजिटल टिकटिंग में यह उछाल ऐसे समय आया है जब आरक्षित टिकटों में ऑनलाइन बुकिंग की हिस्सेदारी 2013-14 के 49 प्रतिशत से बढ़कर अब 89 प्रतिशत तक पहुँच गई है।
रेलवन ऐप: एक ही प्लेटफॉर्म, सभी सेवाएँ
रेलवे ने 1 जुलाई 2025 को रेलवन ऐप लॉन्च किया था, जिसका उद्देश्य आरक्षित और अनारक्षित दोनों प्रकार के टिकटों की डिजिटल खरीद को बढ़ावा देना था। यह ऐप भारतीय रेलवे की समस्त सार्वजनिक सेवाओं — आरक्षित टिकट, अनारक्षित टिकट, प्लेटफॉर्म टिकट, ट्रेन पूछताछ, पीएनआर स्थिति और रेल सहायता — को एकल मंच पर उपलब्ध कराता है।
ऐप में सिंगल-साइन-ऑन (SSO) सुविधा शामिल है, जिससे यात्रियों को अलग-अलग रेलवे एप्लिकेशन डाउनलोड करने या एकाधिक पासवर्ड याद रखने की आवश्यकता नहीं रहती। यह यात्री आरक्षण प्रणाली को सीधे मोबाइल स्क्रीन पर ले आता है।
एनटीईएस: रियल-टाइम ट्रेन जानकारी का भरोसेमंद स्रोत
राष्ट्रीय रेल पूछताछ प्रणाली (NTES) वर्ष 2000 से यात्रियों को लगभग वास्तविक समय में ट्रेनों की आगमन-प्रस्थान स्थिति और कार्यक्रम उपलब्ध करा रही है। इसका मोबाइल एप्लिकेशन अक्टूबर 2014 (एंड्रॉइड) और अक्टूबर 2015 (iOS) में लॉन्च हुआ था।
1 अगस्त 2026 तक एनटीईएस ऐप के एंड्रॉइड पर 4.5 करोड़ से अधिक और iOS पर 16 लाख से अधिक डाउनलोड दर्ज हो चुके हैं। वर्तमान में यह प्रणाली प्रतिदिन लगभग 80,000 सक्रिय उपयोगकर्ताओं को सेवा देती है और 6 करोड़ से अधिक पूछताछों का निष्पादन करती है। 'अपनी ट्रेन ढूंढें', 'लाइव स्टेशन', 'ट्रेन कार्यक्रम' और 'स्टेशनों के बीच ट्रेनें' इसकी प्रमुख विशेषताएँ हैं।
स्वचालित रिफंड: डिजिटल यात्रियों को अतिरिक्त सुविधा
नेक्स्ट जेनरेशन ई-टिकटिंग (NGET) प्रणाली के अंतर्गत ट्रेन रद्द होने की स्थिति में ऑनलाइन बुक किए गए ई-टिकटों पर रिफंड की प्रक्रिया ट्रेन के निर्धारित प्रस्थान समय के तुरंत बाद स्वतः आरंभ हो जाती है और राशि सीधे यात्री के बैंक खाते में जमा कर दी जाती है।
गौरतलब है कि यह स्वचालित रिफंड सुविधा फिलहाल केवल ऑनलाइन ई-टिकटों के लिए उपलब्ध है। काउंटर टिकटधारक यात्रियों को रिफंड के लिए निकटतम पीआरएस काउंटर पर जाना होगा।
डिजिटल टिकटिंग में तेज़ी से बढ़ती हिस्सेदारी
आँकड़ों के अनुसार, वर्तमान में आरक्षित टिकटों में से लगभग 89 प्रतिशत ऑनलाइन माध्यम से बुक किए जाते हैं, जो 2013-14 में मात्र 49 प्रतिशत थे। इसी प्रकार, काउंटर के अलावा अन्य माध्यमों से बुक होने वाले अनारक्षित टिकटों की हिस्सेदारी भी बढ़कर लगभग 39 प्रतिशत हो गई है। यह रेलवे के डिजिटल रूपांतरण की व्यापक तस्वीर को रेखांकित करता है।
रेलवे की यह डिजिटल यात्रा आगे भी जारी रहने की उम्मीद है, क्योंकि रेलवन जैसे एकीकृत ऐप यात्रियों के अनुभव को और सरल बनाने की दिशा में काम कर रहे हैं।