रेलवे बोर्ड चेयरमैन सतीश कुमार ने तारकेश्वर-सेओराफुली सेक्शन का निरीक्षण किया, बंगाल में यात्री सुविधाओं पर जोर
सारांश
मुख्य बातें
रेलवे बोर्ड के चेयरमैन एवं सीईओ सतीश कुमार ने रविवार, 14 जून को ईस्टर्न रेलवे (ER) के तारकेश्वर-सेओराफुली सेक्शन का विस्तृत निरीक्षण किया। इस दौरे का मुख्य उद्देश्य यात्री सेवाओं की गुणवत्ता सुधारना और पश्चिम बंगाल में रेलवे बुनियादी ढाँचे को सुदृढ़ करना था। उनके साथ ईस्टर्न रेलवे और साउथ ईस्टर्न रेलवे (SER) के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे।
निरीक्षण का दायरा और मुख्य घटनाक्रम
चेयरमैन कुमार ने तारकेश्वर और सेओराफुली स्टेशनों का व्यक्तिगत रूप से मुआयना किया। उन्होंने सेक्शन में यात्री प्रबंधन व्यवस्था, ट्रेन परिचालन की दक्षता और सेवा की समग्र गुणवत्ता का जायजा लिया। इसके अलावा, उन्होंने तारकेश्वर से हावड़ा तक 'विंडो-ट्रेलिंग' निरीक्षण भी किया, जिससे ज़मीनी स्थिति का प्रत्यक्ष आकलन किया जा सके।
बांकुरा तक विस्तार की योजना
ईस्टर्न रेलवे के अधिकारियों के अनुसार, इस सेक्शन को बांकुरा तक बढ़ाने का कार्य पहले से प्रगति पर है। कुछ कानूनी अड़चनों के कारण एक छोटे हिस्से का काम अभी रुका हुआ है। परियोजना पूरी होने पर यह हावड़ा से बांकुरा और पुरुलिया के दक्षिणी जिलों के बीच एक छोटा और सुगम मार्ग उपलब्ध कराएगी। यह क्षेत्र के सामाजिक-आर्थिक विकास को नई गति देने की दृष्टि से महत्त्वपूर्ण मानी जा रही है।
राज्य सरकार के साथ समन्वय बैठक
चेयरमैन ने तारकेश्वर में हुगली के जिला मजिस्ट्रेट और पश्चिम बंगाल सरकार के लोक निर्माण विभाग (PWD) के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ एक समन्वय बैठक आयोजित की। इस बैठक में क्षेत्र में चल रही और प्रस्तावित रेलवे परियोजनाओं को निर्धारित समय-सीमा के भीतर पूरा करने के लिए रेलवे और राज्य सरकार के बीच बेहतर तालमेल सुनिश्चित करने पर विशेष बल दिया गया।
इंफ्रास्ट्रक्चर और कनेक्टिविटी पर जोर
कुमार ने बैठक में स्पष्ट किया कि बुनियादी ढाँचे की परियोजनाओं को तय समय-सीमा में पूरा करना न केवल यात्री सुविधाओं के लिए, बल्कि क्षेत्रीय आर्थिक विकास के लिए भी अनिवार्य है। उन्होंने रेल कनेक्टिविटी को आर्थिक प्रगति और आम यात्रियों के जीवन-स्तर में सुधार का एक प्रमुख साधन बताया।
आगे क्या
इस निरीक्षण और समन्वय बैठक के बाद अपेक्षा है कि तारकेश्वर-बांकुरा विस्तार परियोजना में अटकी कानूनी बाधाओं को शीघ्र सुलझाने की प्रक्रिया तेज होगी। रेलवे और राज्य प्रशासन के बीच बेहतर समन्वय से क्षेत्र के लंबित रेल प्रोजेक्ट समय पर पूरे होने की उम्मीद जताई जा रही है।