राजस्थान पंचायत चुनाव 2026: भाजपा-कांग्रेस में तीखी बयानबाजी, EVM-SIR पर भी घमासान
सारांश
मुख्य बातें
राजस्थान में आगामी पंचायत चुनावों को लेकर सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (BJP) और विपक्षी भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) के बीच सियासी बयानबाजी 30 सितंबर 2026 को और तेज हो गई। मंत्री जोगाराम पटेल, डिप्टी मुख्यमंत्री प्रेमचंद बैरवा और विपक्ष के नेता टीकाराम जूली ने न केवल पंचायत चुनाव की तैयारियों पर, बल्कि इंडिया गठबंधन की बैठक, चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली, एसआईआर (SIR) और इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) जैसे विवादित मुद्दों पर भी अपनी-अपनी राय सामने रखी।
भाजपा का दावा: पंचायत चुनाव में ऐतिहासिक जीत होगी
मंत्री जोगाराम पटेल ने कहा कि भाजपा केवल चुनाव के मौसम में सक्रिय होने वाली पार्टी नहीं है — उसके कार्यकर्ता लगातार जनता के बीच काम करते हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में प्रदेश विकास और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'सबका साथ, सबका विकास' के संकल्प का उल्लेख करते हुए दावा किया कि पंचायत चुनावों में भी भाजपा को ऐतिहासिक सफलता मिलेगी।
पटेल ने हालिया निकाय चुनावों में भाजपा की जीत को जनता का जनादेश बताया और कहा कि यही मिशन पंचायत चुनावों में भी आगे बढ़ाया जाएगा। उन्होंने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि पार्टी के पास न कोई विजन है, न संकल्प, और आंतरिक खींचतान जारी है।
डिप्टी सीएम बैरवा की प्रतिक्रिया
डिप्टी मुख्यमंत्री प्रेमचंद बैरवा ने इंडिया गठबंधन की बैठक और पंचायत चुनावों पर कहा कि भाजपा का कार्यकर्ता हमेशा जनता के बीच उपस्थित रहता है। उन्होंने कांग्रेस के रोड शो संबंधी बयानों पर तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि अगर कांग्रेस अब भाजपा की कार्यशैली का अनुसरण कर रही है, तो यह उसकी वर्तमान स्थिति का प्रमाण है।
बैरवा ने जोर देकर कहा कि हालिया निकाय चुनावों में भाजपा को स्पष्ट बहुमत मिला और पार्टी का संगठन जमीन पर सक्रिय है।
विपक्ष का पलटवार: वोट शेयर में भाजपा पिछड़ी
विपक्ष के नेता टीकाराम जूली ने भाजपा के दावों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि निकाय चुनावों में भाजपा को करारी हार मिली है। उन्होंने दावा किया कि पिछले नगर निकाय, विधानसभा और लोकसभा चुनावों की तुलना में भाजपा का वोट प्रतिशत करीब 14-15 प्रतिशत तक घटा है, जबकि कांग्रेस के वोट शेयर में बढ़ोतरी हुई है। उनके अनुसार दोनों दलों के वोट शेयर में अंतर एक प्रतिशत से भी कम रह गया।
जूली ने बताया कि 1 अक्टूबर 2026 से वे और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा नागौर में पंचायती राज कार्यकर्ता सम्मेलन के जरिए अभियान की शुरुआत करेंगे। गौरतलब है कि भारत में पंचायती राज व्यवस्था की शुरुआत राजस्थान के नागौर से ही हुई थी, और कांग्रेस उसी ऐतिहासिक महत्व को अपने अभियान का केंद्र बनाने की कोशिश कर रही है।
EVM और SIR पर विवाद
जूली ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी के आरोपों का हवाला देते हुए कहा कि 'वोट चोरी' का मुद्दा सबूतों के साथ जनता के सामने रखा गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ स्थानों पर मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाए गए, जिससे नागरिकों के मतदान के अधिकार पर प्रतिकूल असर पड़ा।
दूसरी ओर, मंत्री जोगाराम पटेल ने EVM और SIR जैसे मुद्दों को विपक्ष की चुनावी हार के बाद की प्रतिक्रिया बताते हुए कहा कि जब विपक्ष चुनाव हारता है तो इन मुद्दों को उठाना उसकी स्थायी राजनीति का हिस्सा बन गया है।
आगे क्या होगा
कांग्रेस ने नागौर से अभियान शुरू कर पंचायत चुनावों में जमीनी संगठन को मजबूत करने का संकल्प लिया है। भाजपा भी अपने निकाय चुनावों की जीत की गति को आगे बढ़ाने की रणनीति पर काम कर रही है। राजस्थान में पंचायत चुनावों की तारीखों की घोषणा अभी बाकी है, लेकिन दोनों दलों की सियासी तैयारी यह स्पष्ट करती है कि मुकाबला कड़ा होगा।