टीकाराम जूली का भाजपा सरकार पर हमला: ₹3,000 करोड़ पंचायत फंड रोकने और वोटर लिस्ट से 13 करोड़ नाम काटने के आरोप
सारांश
मुख्य बातें
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं राजस्थान विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने 1 अक्टूबर 2026 को जयपुर में भाजपा सरकार पर गंभीर आरोप लगाए — पंचायती राज चुनाव दो साल से न कराना, पंचायतों तक ₹3,000 करोड़ का फंड न पहुँचाना और वोटर लिस्ट से नाम काटने की साजिश उनके आरोपों के केंद्र में रही। राजस्थान में आसन्न पंचायती राज चुनावों की पृष्ठभूमि में कांग्रेस ने नागौर से चुनाव अभियान की शुरुआत कर यह सियासी आक्रमण तेज किया है।
नागौर से अभियान की शुरुआत: ऐतिहासिक प्रतीक
टीकाराम जूली ने बताया कि कांग्रेस ने पंचायती राज चुनाव के अभियान का आगाज नागौर से किया है, जो ऐतिहासिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा, राजस्थान के नागौर में ही पंडित जवाहरलाल नेहरू ने पंचायती राज की नींव रखी थी और वहीं से हम आज इस चुनाव का आगाज कर रहे हैं। पंचायती राज राजनीति के विकेंद्रीकरण के रूप में एक तीसरी शक्ति है।
जूली ने यह भी याद दिलाया कि पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने 73वें और 74वें संविधान संशोधन के ज़रिए पंचायती राज को संवैधानिक मजबूती प्रदान की थी, जिसका मूल उद्देश्य था — गाँव की सरकार गाँव के लोग खुद चलाएँ और अपना विकास-एजेंडा स्वयं तय करें।
भाजपा सरकार पर आरोप: दो साल में ₹3,000 करोड़ फंड अटका
जूली ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार के आने के बाद पिछले दो वर्षों से प्रदेश में पंचायती राज चुनाव नहीं कराए गए, जिसके कारण गाँवों की प्रशासनिक व्यवस्था चरमरा गई है। उनके अनुसार, इस अवधि में करीब ₹3,000 करोड़ का फंड पंचायतों तक नहीं पहुँचा।
उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में पेंशन समय पर नहीं मिल रही, पालनहार योजना की राशि नहीं आ रही, छात्रवृत्ति और सब्सिडी अटकी हुई है तथा किसानों को न खाद मिल रही है और न बीज। जूली ने दावा किया कि इन विफलताओं के चलते आने वाले पंचायती राज चुनाव में जनता कांग्रेस के पक्ष में ऐतिहासिक फैसला सुनाएगी।
वोटर लिस्ट और एसआईआर पर गंभीर सवाल
टीकाराम जूली ने वोटर लिस्ट से नाम काटने और वोटर डिटेल्स मांगने के मामले में भाजपा सरकार पर सीधा आरोप लगाया। उन्होंने दावा किया कि उनके पास इसके पुख्ता सबूत हैं, जिन्हें उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर भी साझा किया है।
जूली ने सरकार को चुनौती देते हुए कहा कि सरकार में हिम्मत हो तो जवाब दे कि किसके निर्देश पर वोटर डिटेल्स मांगी जा रही थीं। उन्होंने बताया कि नगर निकाय चुनावों के दौरान भी ऐसी डिटेल्स मांगी गई थीं, परंतु उस समय सबूत उपलब्ध नहीं था।
कांग्रेस नेता ने एसआईआर (SIR) और फॉर्म नंबर-6 में किए गए बदलावों पर भी सवाल उठाए। उन्होंने पूछा कि फॉर्म नंबर-6 में वह कॉलम क्यों हटाया गया जो पहले अनिवार्य था। उनका आरोप था कि यह बदलाव सत्ता हथियाने के लिए असली मतदाताओं के नाम हटाने की साजिश का हिस्सा है।
देशभर में 13 करोड़ वोटर नाम काटे जाने का दावा
जूली ने दावा किया कि देशभर में करीब 13 करोड़ मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट से काटे गए हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि इन नामों को किस आधार पर हटाया गया और क्या इन लोगों को सुनवाई का मौका दिया जाएगा, जैसा कि सर्वोच्च न्यायालय भी कह चुका है।
गौरतलब है कि वोटर लिस्ट संशोधन का मुद्दा हाल के महीनों में राष्ट्रीय स्तर पर विपक्षी दलों के बीच चिंता का विषय बना हुआ है। जूली के ये आरोप ऐसे समय में आए हैं जब राजस्थान में पंचायती राज चुनावों की तारीखों का ऐलान होने वाला है।
नगर निकाय चुनाव परिणाम का हवाला
टीकाराम जूली ने भाजपा पर तानाशाही और लोकतंत्र के हनन का आरोप लगाते हुए कहा कि पिछले नगर निकाय चुनाव में भाजपा को विधानसभा और लोकसभा चुनावों से भी कम मत मिले। उनके अनुसार, भाजपा ने वोट चोरी और अन्य हथकंडों के बावजूद जनादेश नहीं जीता।
आने वाले पंचायती राज चुनावों में कांग्रेस इन मुद्दों को बड़े स्तर पर उठाने और एसआईआर तथा फॉर्म नंबर-6 में बदलाव के खिलाफ व्यापक अभियान चलाने की घोषणा कर चुकी है।