7 अक्टूबर 2026
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राजनाथ सिंह ने हथियार परीक्षण SOP को दी मंजूरी, IDEX-TDF परियोजनाओं का शुल्क माफ

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राजनाथ सिंह ने हथियार परीक्षण SOP को दी मंजूरी, IDEX-TDF परियोजनाओं का शुल्क माफ

सारांश

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने हथियार और रक्षा उपकरण परीक्षण की SOP में बड़े बदलाव को मंजूरी दी है — iDEX, TDF और Make परियोजनाओं का शुल्क माफ, हर तिमाही तीन दिन का स्लॉट आरक्षित और मध्यस्थता की जगह सुलह तंत्र। यह कदम स्वदेशी रक्षा तकनीक को परीक्षण की अड़चनों से मुक्त कर रक्षा निर्यात की राह आसान करेगा।

मुख्य बातें

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 7 अक्टूबर 2026 को रक्षा परीक्षण सुविधाओं के लिए संशोधित SOP को मंजूरी दी।
iDEX, TDF, Make और अन्य रक्षा मंत्रालय विकास परियोजनाओं का प्रूफ व परीक्षण शुल्क माफ किया गया।
हर तिमाही प्रूफ रेंज में तीन दिन का समय विकास परियोजनाओं की प्रूफ फायरिंग के लिए आरक्षित रहेगा।
DRDO , गुणवत्ता आश्वासन एजेंसियों और तीनों सेनाओं की परीक्षण सुविधाओं तक पहुँच के नियम स्पष्ट।
विवाद समाधान में मध्यस्थता की जगह सरल सुलह समझौते की व्यवस्था लागू।
नई प्रक्रिया से स्वदेशीकरण, नवाचार और रक्षा निर्यात को गति मिलने की उम्मीद।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 7 अक्टूबर 2026 को रक्षा मंत्रालय की प्रूफ रेंज, फील्ड फायरिंग रेंज और परीक्षण सुविधाओं के उपयोग हेतु संशोधित स्टैण्डर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) को स्वीकृति प्रदान की। इस नई व्यवस्था का मूल उद्देश्य यह है कि भारतीय कंपनियाँ यदि कोई नया हथियार, रक्षा उपकरण या सैन्य तकनीक विकसित करें, तो उसका परीक्षण सरल, पारदर्शी और त्वरित प्रक्रिया से संपन्न हो सके।

संशोधित SOP में क्या बदला

नई प्रक्रिया में स्पष्ट किया गया है कि भारतीय रक्षा उद्योग किन-किन प्रूफ रेंज, फील्ड फायरिंग रेंज और प्रयोगशाला परीक्षण सुविधाओं तक पहुँच सकता है। इनमें रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO), सरकारी गुणवत्ता आश्वासन एजेंसियों और तीनों सेनाओं के पास उपलब्ध सुविधाएँ शामिल हैं। जहाँ परीक्षण शुल्क लागू होगा, वहाँ उसके निर्धारण और भुगतान की प्रक्रिया भी अब पहले से कहीं अधिक स्पष्ट है।

IDEX और TDF परियोजनाओं को बड़ी राहत

संशोधित SOP के तहत सबसे बड़ी राहत iDEX (इनोवेशन फॉर डिफेंस एक्सेलेंस), TDF (टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट फंड), Make श्रेणी और रक्षा मंत्रालय की अन्य विकास परियोजनाओं को मिली है — इन सभी के लिए प्रूफ और परीक्षण शुल्क माफ कर दिया गया है। इसका सीधा अर्थ यह है कि स्वदेशी रक्षा तकनीक विकसित करने वाली परियोजनाएँ अब परीक्षण चरण में वित्तीय बाधाओं के बिना आगे बढ़ सकेंगी।

प्रूफ रेंज में तिमाही स्लॉट की गारंटी

संशोधित व्यवस्था में एक महत्त्वपूर्ण प्रावधान यह है कि हर तिमाही प्रूफ रेंज में तीन दिन का समय विकास परियोजनाओं की प्रूफ फायरिंग के लिए आरक्षित रखा जाएगा। इसमें iDEX, TDF, Make और रक्षा मंत्रालय की अन्य विकास परियोजनाओं के साथ-साथ उद्योग की स्वयं की पहल पर विकसित हो रही परियोजनाएँ भी सम्मिलित होंगी। यह व्यवस्था सुनिश्चित करती है कि निजी और सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों को परीक्षण के लिए प्रतीक्षा में महीनों न गँवाने पड़ें।

विवाद समाधान तंत्र में सुधार

पहले उद्योग और संबंधित सरकारी संस्थाओं के बीच विवाद की स्थिति में मध्यस्थता का प्रावधान था, जिसे अब हटाकर सरल सुलह समझौते की व्यवस्था लागू की गई है। इससे विवादों का त्वरित निपटारा संभव होगा और कंपनियों को लंबी कानूनी प्रक्रियाओं में उलझना नहीं पड़ेगा। गौरतलब है कि मध्यस्थता प्रक्रियाएँ अक्सर वर्षों तक खिंचती थीं, जो रक्षा परियोजनाओं की समयसीमा के लिए बड़ी बाधा बनती थीं।

आत्मनिर्भर भारत और रक्षा निर्यात पर असर

रक्षा मंत्रालय का कहना है कि इस संशोधित प्रक्रिया से प्रूफ रेंज, फील्ड फायरिंग रेंज और परीक्षण सुविधाओं तक पहुँच सरल, पारदर्शी और उद्योग-अनुकूल बनेगी। इससे स्वदेशीकरण और नवाचार को बढ़ावा मिलने के साथ-साथ रक्षा निर्यात को भी गति मिलने की उम्मीद है। यह कदम ऐसे समय में आया है जब भारत सरकार 2029 तक ₹50,000 करोड़ के रक्षा निर्यात लक्ष्य की दिशा में आगे बढ़ रही है। विशेषज्ञों के अनुसार परीक्षण प्रक्रिया में देरी अब तक उत्पाद प्रमाणन की सबसे बड़ी अड़चनों में से एक रही है — और इस SOP संशोधन से वह बाधा काफी हद तक दूर होने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल क्रियान्वयन का है। 'Make in India' रक्षा के एक दशक बाद भी निजी क्षेत्र की शिकायत रही है कि परीक्षण सुविधाओं तक पहुँच सैद्धांतिक रूप से उपलब्ध थी, व्यावहारिक रूप से नहीं। तिमाही तीन दिन का आरक्षित स्लॉट एक सकारात्मक शुरुआत है, किंतु यह देखना होगा कि DRDO और सेनाओं की प्रचालनगत ज़रूरतों के साथ यह प्राथमिकता टकराव की स्थिति में कितनी टिकाऊ साबित होती है। मध्यस्थता से सुलह की ओर बदलाव तेज़ निपटारे का वादा करता है, लेकिन उसकी स्वतंत्रता और पारदर्शिता सुनिश्चित किए बिना यह उद्योग को संस्थागत शक्ति-असंतुलन में और कमज़ोर भी कर सकता है।
RashtraPress
7 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

रक्षा मंत्रालय की संशोधित SOP क्या है और इसमें क्या बदला?
यह रक्षा मंत्रालय की प्रूफ रेंज, फील्ड फायरिंग रेंज और परीक्षण सुविधाओं के उपयोग की संशोधित प्रक्रिया है, जिसे रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 7 अक्टूबर 2026 को मंजूरी दी। इसमें शुल्क माफी, तिमाही आरक्षित स्लॉट और विवाद समाधान का सरलीकरण शामिल है।
iDEX और TDF परियोजनाओं को इस SOP से क्या फायदा होगा?
iDEX, TDF, Make और रक्षा मंत्रालय की अन्य विकास परियोजनाओं के लिए प्रूफ और परीक्षण शुल्क पूरी तरह माफ कर दिया गया है। इससे स्टार्टअप और छोटी कंपनियाँ जो सीमित बजट में रक्षा तकनीक विकसित करती हैं, वित्तीय बोझ के बिना अपने उत्पाद परख सकेंगी।
हर तिमाही प्रूफ रेंज में कितना समय आरक्षित रखा जाएगा?
संशोधित SOP के अनुसार हर तिमाही प्रूफ रेंज में तीन दिन का समय विकास परियोजनाओं की प्रूफ फायरिंग के लिए आरक्षित रखा जाएगा। इसमें iDEX, TDF, Make परियोजनाओं के अलावा भारतीय रक्षा उद्योग की स्वयं की पहल पर बनाई जा रही परियोजनाएँ भी शामिल हैं।
नई SOP में विवाद समाधान की प्रक्रिया कैसे बदली?
पहले उद्योग और सरकारी संस्थाओं के बीच विवाद होने पर मध्यस्थता का सहारा लेना पड़ता था, जो प्रायः वर्षों तक खिंचती थी। अब इसे हटाकर सरल सुलह समझौते की व्यवस्था लाई गई है, जिससे विवादों का तेज़ और कम खर्चीला निपटारा संभव होगा।
यह कदम रक्षा निर्यात और आत्मनिर्भरता के लिए क्यों महत्त्वपूर्ण है?
परीक्षण प्रक्रिया में देरी और अस्पष्ट नियम अब तक स्वदेशी रक्षा उत्पादों के प्रमाणन में सबसे बड़ी अड़चन रहे हैं। सरल और पारदर्शी SOP से कंपनियाँ तेज़ी से उत्पाद प्रमाणित कर सकेंगी, जिससे घरेलू रक्षा उत्पादन और निर्यात दोनों को गति मिलने की उम्मीद है।
राष्ट्र प्रेस
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