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आरआरपी डिफेंस और इज़रायली कंपनी ESC BAZ का टाई-अप, डायमंड सिस्टम से सीमाओं पर मिलेगी रात में दिन जैसी निगरानी

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आरआरपी डिफेंस और इज़रायली कंपनी ESC BAZ का टाई-अप, डायमंड सिस्टम से सीमाओं पर मिलेगी रात में दिन जैसी निगरानी

सारांश

आरआरपी डिफेंस और इज़रायली कंपनी ईएससी बीएजेड ने मुंबई में एक रणनीतिक टाई-अप किया है। उनका 'डायमंड सिस्टम' कम लागत और न्यूनतम ऊर्जा में एक किलोमीटर तक रात में भी स्पष्ट निगरानी देगा — जो भारत की लंबी और विविध सीमाओं की सुरक्षा के लिए एक किफायती और बहु-मौसमी समाधान बन सकता है।

मुख्य बातें

आरआरपी डिफेंस और ईएससी बीएजेड प्राइवेट लिमिटेड (इज़रायल) ने 1 सितंबर को मुंबई में थर्मल और नाइट-विजन सिस्टम के लिए रणनीतिक टाई-अप की घोषणा की।
'डायमंड सिस्टम' कम लागत और न्यूनतम बिजली खपत में 1 किलोमीटर तक रात में दिन जैसी निगरानी करने में सक्षम बताया गया है।
पहले चरण में इज़रायली इंजीनियर भारत आकर इलेक्ट्रो-ऑप्टिक नॉलेज ट्रांसफर करेंगे; भविष्य में AI क्षमता का हस्तांतरण भी प्रस्तावित है।
यह सिस्टम भीषण सर्दी, बारिश और रेगिस्तानी परिस्थितियों में भी काम करता है; रडार और सिग्नल तकनीक के साथ एकीकृत है।
भारतीय सेना के साथ मिलकर काम जारी है; ऑपरेशन सिंदूर के बाद उन्नत निगरानी प्रणालियों की माँग और बढ़ी है।

आरआरपी डिफेंस और इज़रायल की रक्षा-तकनीक कंपनी ईएससी बीएजेड प्राइवेट लिमिटेड ने 1 सितंबर को मुंबई में एडवांस्ड थर्मल और नाइट-विजन सिस्टम के विकास एवं आपूर्ति के लिए एक रणनीतिक टाई-अप की घोषणा की। दोनों कंपनियों का दावा है कि उनका संयुक्त 'डायमंड सिस्टम' कम लागत और न्यूनतम ऊर्जा खपत में एक किलोमीटर तक रात में भी दिन के समान स्पष्ट निगरानी करने में सक्षम है, जिससे भारत की सीमा सुरक्षा को नई ताकत मिलेगी।

साझेदारी की मुख्य विशेषताएँ

आरआरपी एस4ई इनोवेशन लिमिटेड के संस्थापक, अध्यक्ष एवं सीईओ राजेंद्र चोडांकर ने कहा, 'हम एक बिल्कुल नई तकनीक ला रहे हैं, जो अपने आप में अनूठी है। यह एक ऐसा उत्पाद है जहाँ हम रात में भी दिन की तरह देख सकते हैं — एक प्रतिस्पर्धी मूल्य वाले सेंसर का उपयोग करके, जो ईएससी बीएजेड का सबसे अनूठा मालिकाना डिज़ाइन है।' उन्होंने जोड़ा कि अधिकांश सीमाएँ असुरक्षित होती हैं और इसीलिए अधिक संख्या में तैनात किए जा सकने वाले किफायती सिस्टम की ज़रूरत है।

चोडांकर के अनुसार, थर्मल इमेजिंग में लागत की बाधा एक बड़ी चुनौती रही है और 'डायमंड सिस्टम' इसी का समाधान प्रस्तुत करता है। उन्होंने यह भी बताया कि भारतीय सेना के साथ मिलकर काम जारी है और MELI2 जैसे मंचों पर इस प्रणाली को प्रदर्शित किया गया है। ड्रोन-संबंधी चुनौतियों के समाधान पर भी एक समझौता हुआ है।

इज़रायली कंपनी की तकनीकी क्षमता

ईएससी बीएजेड के सीईओ असफ मचलेव ने बताया कि पहले चरण में इलेक्ट्रो-ऑप्टिक समाधान के लिए नॉलेज ट्रांसफर किया जाएगा, जिसमें इज़रायली इंजीनियर भारत आकर असेंबली प्रक्रिया की जानकारी देंगे। भविष्य में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) क्षमता का भी हस्तांतरण प्रस्तावित है — जो केवल ज़मीनी निगरानी तक सीमित नहीं, बल्कि ड्रोन, सिग्नल इंटरसेप्ट और पहाड़ी इलाकों में संचार-पहचान के लिए भी उपयोगी होगी।

मचलेव ने कहा कि उनका सिस्टम भीषण सर्दी और भारी बारिश में भी कार्यशील रहता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रतिकूल मौसम में इलेक्ट्रो-ऑप्टिक की सीमाओं की भरपाई के लिए रडार और सिग्नल तकनीक को एकीकृत किया जाता है, जिससे यह एक बहु-तकनीकी (multi-sensor) प्रणाली बन जाती है।

भारत की सीमाओं पर प्रासंगिकता

कार्यक्रम में उपस्थित एक विशेषज्ञ ने बताया कि गुजरात के कच्छ के रण, राजस्थान के रेगिस्तानी क्षेत्र और बीकानेर जैसे इलाकों की परिस्थितियाँ इज़रायल के परिचालन वातावरण से काफी मिलती-जुलती हैं। उन्होंने कहा कि 'डायमंड सिस्टम' को बेहद कम बिजली की ज़रूरत होती है, इसलिए घने जंगलों या दुर्गम इलाकों में भी पोस्ट स्थापित करना संभव है।

विशेषज्ञ ने यह भी रेखांकित किया कि 'ऑपरेशन सिंदूर' एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुआ है, जिसने विभिन्न प्रकार की हथियार एवं प्रति-हथियार प्रणालियों की आवश्यकता को और स्पष्ट कर दिया है।

आत्मनिर्भर भारत और रक्षा विनिर्माण

चोडांकर ने रक्षा क्षेत्र में भारत की प्रगति का उल्लेख करते हुए कहा कि जीडीपी वृद्धि और रक्षा विनिर्माण में विस्तार रातोंरात नहीं होता। उन्होंने 2014 से शुरू हुई इस यात्रा का ज़िक्र करते हुए कहा कि सरकार के सतत प्रयासों से अवसर बढ़े हैं और राजस्व सृजन में सुधार हो रहा है। आने वाले समय में बेहतर आँकड़ों की उम्मीद है।

आगे की राह

यह साझेदारी भारत के रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में एक और कदम है। नॉलेज ट्रांसफर और स्थानीय असेंबली के ज़रिए 'मेक इन इंडिया' के तहत इस तकनीक को भारत में ही विकसित करने की योजना है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह प्रणाली बड़े पैमाने पर तैनात की जाती है, तो सीमा सुरक्षा में एक गुणात्मक बदलाव आ सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

और यदि डायमंड सिस्टम इसे सच में हल करता है तो यह बड़े पैमाने पर तैनाती का रास्ता खोल सकता है। हालाँकि, नॉलेज ट्रांसफर से लेकर स्थानीय उत्पादन तक की यात्रा में भारत के पिछले रक्षा सौदों में देरी और क्रियान्वयन की खामियाँ एक चेतावनी हैं। ऑपरेशन सिंदूर के बाद उन्नत निगरानी की माँग राजनीतिक और सैन्य दोनों स्तरों पर तीव्र हुई है — यह साझेदारी उसी दबाव की प्रतिक्रिया भी है।
RashtraPress
2 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

आरआरपी डिफेंस और ईएससी बीएजेड का टाई-अप किस लिए हुआ है?
यह टाई-अप एडवांस्ड थर्मल और नाइट-विजन सिस्टम — विशेषतः 'डायमंड सिस्टम' — के विकास और आपूर्ति के लिए हुआ है, जो भारतीय सेना की सीमा निगरानी क्षमता को मज़बूत करेगा। इसकी घोषणा 1 सितंबर को मुंबई में की गई।
डायमंड सिस्टम क्या है और यह कैसे काम करता है?
डायमंड सिस्टम एक थर्मल और नाइट-विजन आधारित निगरानी प्रणाली है जो एक किलोमीटर तक रात में भी दिन के समान स्पष्ट तस्वीर देती है। यह कम बिजली खपत पर काम करती है और पर्यावरणीय प्रतिकूलताओं — जैसे भारी बारिश, कड़ाके की सर्दी और रेगिस्तानी गर्मी — से अप्रभावित रहती है।
इस साझेदारी में नॉलेज ट्रांसफर की क्या योजना है?
पहले चरण में इज़रायली इंजीनियर भारत आकर इलेक्ट्रो-ऑप्टिक असेंबली की जानकारी देंगे। भविष्य में AI क्षमता, ड्रोन-निगरानी और सिग्नल इंटरसेप्ट तकनीक का भी हस्तांतरण प्रस्तावित है।
क्या यह सिस्टम भारत की सभी प्रकार की सीमाओं के लिए उपयुक्त है?
कंपनियों के अनुसार, डायमंड सिस्टम बहु-मौसमी और बहु-भूगोलीय है। कच्छ के रण और राजस्थान के रेगिस्तान जैसे इलाकों में यह इज़रायल के परिचालन वातावरण जैसी परिस्थितियों में कारगर साबित हुआ है। उत्तर की ओर पहाड़ी इलाकों में रडार और सिग्नल तकनीक के साथ इसे एकीकृत किया जाता है।
ऑपरेशन सिंदूर के बाद इस तकनीक की प्रासंगिकता क्यों बढ़ी है?
ऑपरेशन सिंदूर के बाद सीमा निगरानी, ड्रोन-रोधी प्रणालियों और बहु-स्तरीय हथियार प्रणालियों की आवश्यकता स्पष्ट रूप से रेखांकित हुई है। डायमंड सिस्टम जैसी किफायती और बहु-तकनीकी प्रणाली इसी रणनीतिक ज़रूरत को पूरा करने का प्रयास है।
राष्ट्र प्रेस
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