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राजनाथ सिंह: मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर ही देश का मजबूत भविष्य, BRO संगोष्ठी में बोले रक्षा मंत्री

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राजनाथ सिंह: मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर ही देश का मजबूत भविष्य, BRO संगोष्ठी में बोले रक्षा मंत्री

सारांश

राजनाथ सिंह ने BRO संगोष्ठी में साफ कहा — सड़क बनाने वाला भी उतना ही बड़ा सुरक्षा प्रहरी है जितना सीमा पर तैनात सैनिक। सीमावर्ती गाँवों को 'अंतिम' से 'प्रथम' बनाने की यह सोच, विकास और राष्ट्रीय सुरक्षा को एक ही पटरी पर लाने का सरकार का स्पष्ट संकल्प है।

मुख्य बातें

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 16 जुलाई को नई दिल्ली में BRO तकनीकी संगोष्ठी को संबोधित किया।
उन्होंने कहा — 'जिस देश का इंफ्रास्ट्रक्चर मजबूत होगा, उसी देश का भविष्य सबसे मजबूत होगा।' वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम के तहत सीमावर्ती गाँवों को 'अंतिम गाँव' से 'प्रथम गाँव' के रूप में विकसित किया जा रहा है।
BRO के अनुभवी इंजीनियरों का ज्ञान प्रशिक्षण संस्थानों तक पहुँचाने का सुझाव दिया।
इंफ्रास्ट्रक्चर विकास को सामूहिक प्रयास बताया — उद्योग, शिक्षा, इंजीनियर और प्रशासन सबकी साझा जिम्मेदारी।
पोर्ट, एयरफील्ड, सड़क और सुरंगों की रणनीतिक प्रासंगिकता को अपरिवर्तनीय बताया।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने गुरुवार, 16 जुलाई को नई दिल्ली में बॉर्डर रोड ऑर्गेनाइजेशन (BRO) की तकनीकी संगोष्ठी को संबोधित करते हुए कहा कि जिस देश का बुनियादी ढाँचा जितना सुदृढ़ होगा, उस देश का भविष्य उतना ही उज्ज्वल होगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार का उद्देश्य केवल मानचित्र पर सड़कें खींचना नहीं, बल्कि हर नागरिक के मन में यह विश्वास जगाना है कि देश का कोई भी कोना अब पहुँच से बाहर नहीं है।

मुख्य घोषणाएँ और संदेश

राजनाथ सिंह ने संगोष्ठी में कहा, 'हमारा प्रयास हो कि हम ऐसा भारत बनाएँ, जहाँ सीमाएँ केवल सुरक्षित ही न हों, बल्कि सबसे जुड़ी हुई भी हों। जहाँ विकास और राष्ट्रीय सुरक्षा एक ही मार्ग पर एक साथ चले।' उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि हर निर्माण कार्य राष्ट्रनिर्माण का पर्याय बनना चाहिए।

रक्षा मंत्री ने यह भी रेखांकित किया कि सड़क, रेल, हवाई मार्ग और डिजिटल कनेक्टिविटी के साथ-साथ वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम के अंतर्गत सीमावर्ती गाँवों को — जिन्हें कभी 'अंतिम गाँव' कहा जाता था — अब 'देश के प्रथम गाँव' के रूप में विकसित किया जा रहा है।

BRO की भूमिका और रणनीतिक महत्व

राजनाथ सिंह ने कहा कि BRO ने देश के दूरस्थ और कठिन क्षेत्रों में सड़कों के साथ-साथ एयरफील्ड भी निर्मित किए हैं। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि युद्ध का पहला मोर्चा कभी-कभी सीमा पर नहीं, बल्कि उस सड़क पर बनता है जो सैनिक को सीमा तक पहुँचाती है — इसलिए सड़क बनाने वाला भी राष्ट्र सुरक्षा का उतना ही बड़ा प्रहरी है।

उन्होंने यह भी जोड़ा कि पोर्ट, एयरफील्ड, सड़क और सुरंगों की भूमिका तकनीक के किसी भी स्तर पर कम नहीं होगी। युद्ध का स्वरूप चाहे जितना भी बदल जाए, इस बुनियादी ढाँचे का महत्व अपरिवर्तित रहेगा।

ज्ञान-साझाकरण और सामूहिक प्रयास पर जोर

रक्षा मंत्री ने सुझाव दिया कि BRO के अनुभवी इंजीनियरों का संचित ज्ञान प्रशिक्षण संस्थानों तक पहुँचाया जाए, ताकि नई पीढ़ी के इंजीनियर और शोधकर्ता पहले की गलतियों और सफलताओं दोनों से सीख सकें। उन्होंने कहा कि यह जरूरी नहीं कि हर इंजीनियर शून्य से शुरू करे — पूर्ववर्ती अनुभव ही सबसे बड़ी पाठशाला है।

राजनाथ सिंह ने इंफ्रास्ट्रक्चर विकास को केवल सरकारी दायित्व मानने से इनकार करते हुए कहा, 'इसके लिए एक सामूहिक प्रयास की आवश्यकता होती है। उद्योग को इनोवेशन करना होगा, शिक्षा को रिसर्च में आगे बढ़ना होगा, इंजीनियर्स को समाधान विकसित करने होंगे, और प्रशासकों को उन्हें जमीन पर उतारना होगा।'

आगे की राह

रक्षा मंत्री ने भरोसा जताया कि BRO आने वाले दशकों में भी राष्ट्र की अनिवार्य शक्ति बना रहेगा, बशर्ते वह निरंतर नई तकनीक को आत्मसात करता रहे। उन्होंने संगोष्ठी के प्रतिभागियों से आह्वान किया कि वे एक ऐसा इकोसिस्टम बनाएँ जो उत्कृष्टता को प्रोत्साहित करे और जिसमें हर हितधारक पूरी निष्ठा से अपनी भूमिका निभाए।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन जमीनी क्रियान्वयन की गति और बजट आवंटन पर पारदर्शी आँकड़े अभी भी सार्वजनिक नहीं हैं। 'सामूहिक प्रयास' की अपील सही दिशा में है, परंतु बिना जवाबदेही तंत्र के यह केवल प्रेरक भाषण बनकर रह जाती है। BRO की क्षमता और उसके परिणामों का स्वतंत्र मूल्यांकन ही यह तय करेगा कि यह दृष्टि वास्तव में जमीन पर उतरती है या नहीं।
RashtraPress
16 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राजनाथ सिंह ने BRO संगोष्ठी में क्या कहा?
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 16 जुलाई को नई दिल्ली में BRO तकनीकी संगोष्ठी में कहा कि जिस देश का इंफ्रास्ट्रक्चर मजबूत होगा, उसी देश का भविष्य सबसे मजबूत होगा। उन्होंने विकास और राष्ट्रीय सुरक्षा को एक ही मार्ग पर चलाने की बात कही।
वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम क्या है और इसमें BRO की क्या भूमिका है?
वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम केंद्र सरकार की वह पहल है जिसके तहत सीमावर्ती गाँवों को — जिन्हें कभी 'अंतिम गाँव' कहा जाता था — 'देश के प्रथम गाँव' के रूप में विकसित किया जा रहा है। BRO इन क्षेत्रों में सड़क, एयरफील्ड और कनेक्टिविटी बुनियादी ढाँचा तैयार करने में केंद्रीय भूमिका निभाता है।
राजनाथ सिंह ने BRO के इंजीनियरों को क्या सुझाव दिया?
रक्षा मंत्री ने सुझाव दिया कि BRO के अनुभवी इंजीनियरों का संचित ज्ञान प्रशिक्षण संस्थानों तक पहुँचाया जाए ताकि नई पीढ़ी पूर्व के अनुभवों — सफलताओं और संघर्षों दोनों — से सीख सके। उनका कहना था कि हर इंजीनियर को शून्य से शुरू करने की जरूरत नहीं होनी चाहिए।
इंफ्रास्ट्रक्चर और राष्ट्रीय सुरक्षा के बीच क्या संबंध है?
राजनाथ सिंह ने स्पष्ट किया कि युद्ध का पहला मोर्चा कभी-कभी सीमा पर नहीं, बल्कि उस सड़क पर बनता है जो सैनिक को सीमा तक पहुँचाती है। इसलिए पोर्ट, एयरफील्ड, सड़क और सुरंगों का रणनीतिक महत्व तकनीक के किसी भी युग में कम नहीं होगा।
BRO तकनीकी संगोष्ठी का उद्देश्य क्या था?
यह संगोष्ठी बॉर्डर रोड ऑर्गेनाइजेशन द्वारा नई दिल्ली में आयोजित की गई थी, जिसका उद्देश्य सीमावर्ती और कठिन क्षेत्रों में इंफ्रास्ट्रक्चर निर्माण की नई तकनीकों, अनुभवों और भविष्य की रणनीतियों पर विचार-विमर्श करना था। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इसे मुख्य रूप से संबोधित किया।
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