राजनाथ सिंह बोले — मोदी के 12 साल में अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत का कद बढ़ा, दुनिया मानती है ताकत
सारांश
मुख्य बातें
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 5 जून 2026 को लखनऊ में मीडिया से बातचीत के दौरान कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 12 वर्षों के कार्यकाल में भारत की वैश्विक स्थिति में आमूल परिवर्तन आया है। उन्होंने कहा कि यह केवल उनकी व्यक्तिगत राय नहीं, बल्कि पूरी दुनिया इस तथ्य को स्वीकार करती है कि भारत अब कमज़ोर नहीं, बल्कि एक ताकतवर राष्ट्र बन चुका है।
राजनाथ सिंह का बयान
राजनाथ सिंह ने कहा, 'प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने निश्चित रूप से एक रिकॉर्ड बनाया है। इससे पहले वे लगभग 13 वर्षों तक गुजरात के मुख्यमंत्री रहे और अब 12 साल से देश के प्रधानमंत्री के रूप में सेवा कर रहे हैं।' उन्होंने यह भी जोड़ा कि अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत का कद काफी बढ़ा है और यह बात सारी दुनिया मानती है।
10 जून का ऐतिहासिक रिकॉर्ड
10 जून 2026 को प्रधानमंत्री मोदी भारत के सबसे लंबे समय तक सेवारत निर्वाचित प्रधानमंत्री बनने का रिकॉर्ड स्थापित करने वाले हैं, जब वे पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के कार्यकाल का रिकॉर्ड पार कर लेंगे। भारतीय जनता पार्टी (BJP) के वरिष्ठ नेता शाहनवाज हुसैन ने इस अवसर को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि 'देश खुशकिस्मत है कि नरेंद्र दामोदरदास मोदी जैसे नेता ने इतिहास रचा है।'
BJP नेताओं की प्रतिक्रिया
पश्चिम बंगाल के BJP नेता दिलीप घोष ने कहा कि दुनिया में पीएम नरेंद्र मोदी जैसा कोई नहीं है और जनता का आशीर्वाद उनके साथ है। BJP सांसद मनन मिश्रा ने कहा कि प्रधानमंत्री पहले ही कई रिकॉर्ड बना चुके हैं और भविष्य में भी अनेक रिकॉर्ड बनाएंगे। गौरतलब है कि ये सभी बयान 10 जून की तिथि से पहले आए हैं, जब यह रिकॉर्ड आधिकारिक रूप से दर्ज होगा।
भारत की बदलती वैश्विक छवि
राजनाथ सिंह के अनुसार, पिछले 12 वर्षों में भारत की तकदीर संवारने का काम हुआ है। यह ऐसे समय में आया है जब भारत G20 की अध्यक्षता, वैश्विक रक्षा निर्यात में वृद्धि और बहुपक्षीय मंचों पर सक्रिय भागीदारी के ज़रिये अपनी उपस्थिति दर्ज करा चुका है। आलोचकों का कहना है कि इस दावे की परख के लिए नीतिगत परिणामों और स्वतंत्र मूल्यांकन की ज़रूरत है।
आगे की राह
BJP नेताओं ने दावा किया है कि प्रधानमंत्री मोदी 2029 और 2034 में भी देश की सेवा करते रहेंगे। हालांकि, ये राजनीतिक आकांक्षाएं हैं और इनका निर्धारण आगामी चुनावी प्रक्रिया के ज़रिये होगा। 10 जून का रिकॉर्ड भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में एक महत्वपूर्ण पड़ाव माना जा रहा है।