27 अक्टूबर 2026
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राजनाथ सिंह फिलीपींस रवाना, ADMM-Plus में भारत रखेगा हिंद-प्रशांत सुरक्षा का पक्ष

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राजनाथ सिंह फिलीपींस रवाना, ADMM-Plus में भारत रखेगा हिंद-प्रशांत सुरक्षा का पक्ष

सारांश

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह फिलीपींस के सेबू पहुँचे हैं — ADMM-Plus के मंच पर भारत 19 देशों के सामने हिंद-प्रशांत सुरक्षा, आतंकवाद-रोधी सहयोग और एक्ट ईस्ट नीति का पक्ष रखेगा। 2024-27 कार्यकाल में भारत-मलेशिया आतंकवाद-रोधी कार्यसमूह की सह-अध्यक्षता इस यात्रा को रणनीतिक रूप से और वजनदार बनाती है।

मुख्य बातें

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह 27 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली से फिलीपींस के सेबू रवाना हुए।
28-29 अक्टूबर को ADMM-Plus (आसियान रक्षा मंत्रियों की 13वीं बैठक-प्लस) में भाग लेंगे।
बैठक में 11 आसियान देश तथा भारत, अमेरिका, चीन, रूस, जापान, दक्षिण कोरिया, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड शामिल।
भारत और मलेशिया 2024-2027 तक आतंकवाद-रोधी विशेषज्ञ कार्यसमूह की सह-अध्यक्षता कर रहे हैं।
राजनाथ सिंह विभिन्न देशों के रक्षा मंत्रियों के साथ द्विपक्षीय वार्ता भी करेंगे।
यह यात्रा भारत की एक्ट ईस्ट नीति और हिंद-प्रशांत में रणनीतिक भूमिका को मजबूत करने की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण कदम है।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह 27 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली से फिलीपींस के सेबू के लिए रवाना हुए, जहाँ वह 28 और 29 अक्टूबर को आयोजित आसियान रक्षा मंत्रियों की 13वीं बैठक-प्लस (ADMM-Plus) में भाग लेंगे। इस महत्त्वपूर्ण बहुपक्षीय मंच पर क्षेत्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े साझा मुद्दों पर विचार-विमर्श होगा और भारत की रणनीतिक साझेदारियों को नई दिशा दी जाएगी।

बैठक का महत्त्व और भागीदार देश

ADMM-Plus एक प्रमुख क्षेत्रीय मंच है जो दक्षिण-पूर्व एशिया के 11 आसियान सदस्य देशों के साथ-साथ भारत, अमेरिका, चीन, रूस, जापान, दक्षिण कोरिया, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड को एक मेज पर लाता है। यह ऐसे समय में आया है जब हिंद-प्रशांत क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा और रणनीतिक प्रतिस्पर्धा को लेकर तनाव बढ़ रहा है।

इस बैठक की विशेषता यह है कि यह केवल कूटनीतिक संवाद तक सीमित नहीं — यह संवाद साझेदारों के बीच ठोस रक्षा सहयोग की रूपरेखा तय करता है। गौरतलब है कि भारत इस मंच का एक संस्थापक संवाद साझेदार है।

राजनाथ सिंह का पक्ष और एक्ट ईस्ट नीति

रवानगी से पहले राजनाथ सिंह ने कहा कि ADMM-Plus क्षेत्र में रक्षा और रणनीतिक मामलों पर विचार-विमर्श का प्रमुख मंच है। उन्होंने कहा कि वह इस मंच पर क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े साझा मुद्दों पर भारत का पक्ष रखने के लिए उत्सुक हैं।

रक्षा मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि भारत अपनी एक्ट ईस्ट नीति के तहत आसियान की केंद्रीय भूमिका तथा हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति, स्थिरता और सामूहिक विकास के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। यह नीति भारत की पूर्व-केंद्रित विदेश एवं रक्षा रणनीति की धुरी बन चुकी है।

आतंकवाद-रोधी सहयोग में भारत की अहम भूमिका

भारत इस मंच पर केवल भागीदार देश के रूप में नहीं, बल्कि आतंकवाद के विरुद्ध सहयोग बढ़ाने में सक्रिय नेतृत्वकारी भूमिका में है। वर्ष 2024 से 2027 के कार्यकाल के लिए भारत और मलेशिया मिलकर आतंकवाद-रोधी विशेषज्ञ कार्यसमूह की सह-अध्यक्षता कर रहे हैं।

यह ऐसे समय में और भी प्रासंगिक है जब इंडो-पैसिफिक में साइबर खतरे, समुद्री सुरक्षा उल्लंघन और गैर-पारंपरिक सुरक्षा चुनौतियाँ तेजी से बढ़ रही हैं।

द्विपक्षीय बैठकें और रणनीतिक साझेदारियाँ

सेबू प्रवास के दौरान राजनाथ सिंह विभिन्न भागीदार देशों के रक्षा मंत्रियों के साथ द्विपक्षीय बैठकें भी करेंगे। इन बैठकों में भारत के मौजूदा रक्षा सहयोग की समीक्षा की जाएगी और रणनीतिक साझेदारी को नई दिशा देने के अवसरों पर विचार होगा।

विशेषज्ञों के अनुसार यह यात्रा ऐसे समय में विशेष महत्त्व रखती है जब भारत अपने पड़ोसी देशों के साथ रक्षा निर्यात और संयुक्त अभ्यास के क्षेत्र में सक्रिय रूप से अपनी उपस्थिति बढ़ा रहा है। आने वाले महीनों में इन द्विपक्षीय चर्चाओं के ठोस परिणाम सामने आने की उम्मीद है।

संपादकीय दृष्टिकोण

चीन और रूस की मौजूदगी के बीच भारत की 'स्वायत्त रणनीतिक आवाज़' बनाए रखना असली कूटनीतिक परीक्षा है। आतंकवाद-रोधी कार्यसमूह की सह-अध्यक्षता एक महत्त्वपूर्ण संस्थागत पैठ है, लेकिन द्विपक्षीय बैठकों के ठोस नतीजे — विशेषकर रक्षा निर्यात और संयुक्त अभ्यास पर — ही यात्रा की वास्तविक सफलता तय करेंगे। मुख्यधारा की कवरेज अक्सर इस तथ्य को नज़रअंदाज़ करती है कि आसियान देशों के साथ भारत के रक्षा व्यापार में अभी भी उसकी वास्तविक क्षमता और भू-राजनीतिक महत्त्वाकांक्षा के बीच बड़ा अंतर है।
RashtraPress
27 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ADMM-Plus बैठक क्या है और भारत इसमें क्यों शामिल होता है?
ADMM-Plus यानी आसियान रक्षा मंत्रियों की बैठक-प्लस, एक प्रमुख बहुपक्षीय मंच है जिसमें 11 आसियान देश और 8 संवाद साझेदार देश — भारत, अमेरिका, चीन, रूस, जापान, दक्षिण कोरिया, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड — शामिल होते हैं। भारत इसमें अपनी एक्ट ईस्ट नीति के तहत हिंद-प्रशांत क्षेत्र में रणनीतिक साझेदारियाँ मजबूत करने और सुरक्षा सहयोग बढ़ाने के लिए भाग लेता है।
राजनाथ सिंह की फिलीपींस यात्रा में क्या होगा?
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह 28 और 29 अक्टूबर 2026 को सेबू, फिलीपींस में ADMM-Plus की 13वीं बैठक में भाग लेंगे। इसके साथ ही वह विभिन्न देशों के रक्षा मंत्रियों के साथ द्विपक्षीय वार्ता भी करेंगे, जिसमें मौजूदा रक्षा सहयोग की समीक्षा और रणनीतिक साझेदारी को नई दिशा देना शामिल है।
भारत और मलेशिया आतंकवाद-रोधी कार्यसमूह में क्या भूमिका निभा रहे हैं?
वर्ष 2024 से 2027 के कार्यकाल के लिए भारत और मलेशिया मिलकर ADMM-Plus के आतंकवाद-रोधी विशेषज्ञ कार्यसमूह की सह-अध्यक्षता कर रहे हैं। यह भारत की क्षेत्रीय सुरक्षा वास्तुकला में संस्थागत भूमिका को दर्शाता है।
भारत की एक्ट ईस्ट नीति और आसियान के बीच क्या संबंध है?
एक्ट ईस्ट नीति भारत की वह विदेश और रक्षा रणनीति है जो आसियान देशों के साथ राजनीतिक, आर्थिक और सुरक्षा सहयोग को प्राथमिकता देती है। राजनाथ सिंह ने स्पष्ट किया है कि भारत इस नीति के तहत आसियान की केंद्रीय भूमिका और हिंद-प्रशांत में शांति एवं स्थिरता के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
इस बैठक में कौन-से प्रमुख सुरक्षा मुद्दों पर चर्चा होगी?
बैठक में क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े साझा मुद्दे — जिनमें समुद्री सुरक्षा, आतंकवाद-रोध, साइबर खतरे और गैर-पारंपरिक सुरक्षा चुनौतियाँ शामिल हैं — केंद्र में रहेंगे। भारत इस मंच पर हिंद-प्रशांत में सामूहिक सुरक्षा हितों को आगे बढ़ाने का पक्ष रखेगा।
राष्ट्र प्रेस
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