राजनाथ सिंह फिलीपींस रवाना, ADMM-Plus में भारत रखेगा हिंद-प्रशांत सुरक्षा का पक्ष
सारांश
मुख्य बातें
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह 27 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली से फिलीपींस के सेबू के लिए रवाना हुए, जहाँ वह 28 और 29 अक्टूबर को आयोजित आसियान रक्षा मंत्रियों की 13वीं बैठक-प्लस (ADMM-Plus) में भाग लेंगे। इस महत्त्वपूर्ण बहुपक्षीय मंच पर क्षेत्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े साझा मुद्दों पर विचार-विमर्श होगा और भारत की रणनीतिक साझेदारियों को नई दिशा दी जाएगी।
बैठक का महत्त्व और भागीदार देश
ADMM-Plus एक प्रमुख क्षेत्रीय मंच है जो दक्षिण-पूर्व एशिया के 11 आसियान सदस्य देशों के साथ-साथ भारत, अमेरिका, चीन, रूस, जापान, दक्षिण कोरिया, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड को एक मेज पर लाता है। यह ऐसे समय में आया है जब हिंद-प्रशांत क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा और रणनीतिक प्रतिस्पर्धा को लेकर तनाव बढ़ रहा है।
इस बैठक की विशेषता यह है कि यह केवल कूटनीतिक संवाद तक सीमित नहीं — यह संवाद साझेदारों के बीच ठोस रक्षा सहयोग की रूपरेखा तय करता है। गौरतलब है कि भारत इस मंच का एक संस्थापक संवाद साझेदार है।
राजनाथ सिंह का पक्ष और एक्ट ईस्ट नीति
रवानगी से पहले राजनाथ सिंह ने कहा कि ADMM-Plus क्षेत्र में रक्षा और रणनीतिक मामलों पर विचार-विमर्श का प्रमुख मंच है। उन्होंने कहा कि वह इस मंच पर क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े साझा मुद्दों पर भारत का पक्ष रखने के लिए उत्सुक हैं।
रक्षा मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि भारत अपनी एक्ट ईस्ट नीति के तहत आसियान की केंद्रीय भूमिका तथा हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति, स्थिरता और सामूहिक विकास के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। यह नीति भारत की पूर्व-केंद्रित विदेश एवं रक्षा रणनीति की धुरी बन चुकी है।
आतंकवाद-रोधी सहयोग में भारत की अहम भूमिका
भारत इस मंच पर केवल भागीदार देश के रूप में नहीं, बल्कि आतंकवाद के विरुद्ध सहयोग बढ़ाने में सक्रिय नेतृत्वकारी भूमिका में है। वर्ष 2024 से 2027 के कार्यकाल के लिए भारत और मलेशिया मिलकर आतंकवाद-रोधी विशेषज्ञ कार्यसमूह की सह-अध्यक्षता कर रहे हैं।
यह ऐसे समय में और भी प्रासंगिक है जब इंडो-पैसिफिक में साइबर खतरे, समुद्री सुरक्षा उल्लंघन और गैर-पारंपरिक सुरक्षा चुनौतियाँ तेजी से बढ़ रही हैं।
द्विपक्षीय बैठकें और रणनीतिक साझेदारियाँ
सेबू प्रवास के दौरान राजनाथ सिंह विभिन्न भागीदार देशों के रक्षा मंत्रियों के साथ द्विपक्षीय बैठकें भी करेंगे। इन बैठकों में भारत के मौजूदा रक्षा सहयोग की समीक्षा की जाएगी और रणनीतिक साझेदारी को नई दिशा देने के अवसरों पर विचार होगा।
विशेषज्ञों के अनुसार यह यात्रा ऐसे समय में विशेष महत्त्व रखती है जब भारत अपने पड़ोसी देशों के साथ रक्षा निर्यात और संयुक्त अभ्यास के क्षेत्र में सक्रिय रूप से अपनी उपस्थिति बढ़ा रहा है। आने वाले महीनों में इन द्विपक्षीय चर्चाओं के ठोस परिणाम सामने आने की उम्मीद है।