बिहार एमएलसी मतगणना 2026: नीरज कुमार के आवास पर जश्न, दिव्या ज्योति व राजद ने उठाए सीसीटीवी पर सवाल
सारांश
मुख्य बातें
पटना में बिहार विधान परिषद (एमएलसी) चुनाव 2026 की मतगणना के दौरान राजनीतिक माहौल गर्म है। जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) के एमएलसी उम्मीदवार और पार्टी के मुख्य प्रवक्ता नीरज कुमार के आवास के बाहर समर्थक डमरू और शंख लेकर पहुँचने लगे और जीत का जश्न मनाना शुरू कर दिया। वहीं, जन सुराज की प्रत्याशी दिव्या ज्योति और राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के उम्मीदवार डॉ. संजीव ने मतगणना कक्ष में सीसीटीवी कैमरे नहीं लगाए जाने पर गंभीर सवाल उठाए हैं।
नीरज कुमार का आत्मविश्वास और आवास पर उत्साह
पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से जेडीयू प्रत्याशी नीरज कुमार ने कहा कि जिसे 'हॉट सीट' बताया जा रहा है, वह दरअसल 'कूल सीट' है। उन्होंने मतदाताओं के रुझान, पार्टी कार्यकर्ताओं के संयम और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के नेतृत्व की गंभीरता का हवाला देते हुए जीत का भरोसा जताया।
नीरज कुमार ने बताया कि मतगणना केंद्र जाने से पहले उन्होंने दादी माँ के मंदिर में माथा टेका, चूड़ा-दही-चीनी ग्रहण किया और मंदिर में पूजा-अर्चना की। उन्होंने कहा कि मतगणना स्थल पर भी माता का मंदिर और बजरंग बली का मंदिर है, जहाँ परिजन एवं अधिकारी पूजा कर रहे हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें उन क्षेत्रों के कार्यकर्ताओं का भी समर्थन मिल रहा है जहाँ चुनाव नहीं हो रहे हैं, और यह स्नेह उनके लिए बड़ी ताकत है।
दिव्या ज्योति की आपत्ति — सीसीटीवी की अनुपस्थिति
पटना शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से जन सुराज की प्रत्याशी दिव्या ज्योति ने मतगणना कक्ष में सीसीटीवी कैमरे नहीं लगाए जाने पर कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि सुरक्षा व्यवस्था सामान्यतः ठीक है, लेकिन जिस कमरे में मतों की गिनती हो रही है वहाँ कैमरे न होना चिंताजनक है और इस पर चुनाव आयोग को जवाब देना चाहिए।
दिव्या ज्योति ने कहा कि निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए मतगणना की निगरानी ज़रूरी है। उन्होंने इस संबंध में शिकायत दर्ज कराए जाने की जानकारी दी और कहा कि यदि परिणाम को प्रभावित करने का प्रयास नहीं हुआ, तो जन सुराज के पक्ष में नतीजे आने की उन्हें उम्मीद है।
राजद प्रत्याशी डॉ. संजीव के आरोप
राजद के शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के उम्मीदवार डॉ. संजीव ने भी सीसीटीवी की अनुपस्थिति को लेकर सवाल उठाए। उनका कहना है कि वार्ड सदस्य से लेकर विधायक और सांसद तक के चुनावों में मतगणना कक्षों में कैमरे लगाए जाते हैं, इसलिए यहाँ कैमरे न लगाने का कारण स्पष्ट किया जाना चाहिए।
डॉ. संजीव ने जिला प्रशासन की भूमिका पर भी आरोप लगाए और जिलाधिकारी की निष्पक्षता पर सवाल उठाए। हालाँकि, उनके इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
मतगणना का संदर्भ और महत्त्व
यह ऐसे समय में आया है जब बिहार में विधान परिषद की सीटें राजनीतिक दृष्टि से महत्त्वपूर्ण मानी जाती हैं और स्नातक तथा शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों में कड़ा मुकाबला देखा जाता है। गौरतलब है कि मतगणना प्रक्रिया की पारदर्शिता पर विपक्षी दलों की आपत्तियाँ बिहार में एक बारंबार दोहराई जाने वाली चुनौती बनती जा रही है।
आगामी घंटों में आने वाले आधिकारिक परिणाम तय करेंगे कि नीरज कुमार का आत्मविश्वास और समर्थकों का उत्साह सही साबित होता है या नहीं, और विपक्षी दलों की पारदर्शिता संबंधी माँगों का क्या हश्र होता है।