क्या जो जैसा करेगा, वैसा भरेगा? उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत खारिज होने पर राकेश सिन्हा का बयान

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क्या जो जैसा करेगा, वैसा भरेगा? उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत खारिज होने पर राकेश सिन्हा का बयान

सारांश

दिल्ली दंगा मामलों में उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत खारिज होने के बाद राकेश सिन्हा ने न्यायपालिका पर भरोसा जताया। उन्होंने आईपीएल के संबंध में बीसीसीआई के निर्णय पर भी सवाल उठाए। जानें इस मुद्दे पर उनकी प्रतिक्रिया।

मुख्य बातें

न्यायपालिका का स्वतंत्र होना लोकतंत्र के लिए आवश्यक है।
कानून के दायरे में निर्णय सभी को स्वीकार्य होने चाहिए।
खेल में पारदर्शिता और समय पर निर्णय जरूरी हैं।
आईपीएल में खिलाड़ियों के चयन में स्पष्टता की आवश्यकता है।
राजनीतिक दलों को न्यायालय के आदेशों का सम्मान करना चाहिए।

रांची, 5 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। दिल्ली दंगा मामलों में उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत याचिकाएं सुप्रीम कोर्ट द्वारा खारिज किए जाने के बाद और आईपीएल से संबंधित एक महत्वपूर्ण कार्रवाई पर कांग्रेस की प्रतिक्रिया सामने आई है। झारखंड में कांग्रेस के मीडिया प्रभारी राकेश सिन्हा ने इन दोनों मुद्दों पर बयान देते हुए अपनी पार्टी का पक्ष स्पष्ट किया।

उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत खारिज होने पर राकेश सिन्हा ने राष्ट्र प्रेस से कहा कि न्यायपालिका स्वतंत्र है और वह अपने संवैधानिक दायित्वों का निर्वहन करती है।

उन्होंने कहा, "इस देश में न्यायपालिका है और स्वाभाविक रूप से न्यायपालिका अपना काम करती है। हमें न्यायालय पर पूरा सम्मान और भरोसा है। न्यायालय ने जो फैसला दिया है, वह इस बात का प्रमाण है कि जो जैसा करेगा, वैसा ही भरेगा।"

कांग्रेस नेता ने स्पष्ट किया कि कानून के दायरे में रहकर जो भी निर्णय लिया जाता है, वह सभी को स्वीकार्य होना चाहिए। लोकतंत्र की मजबूती न्यायपालिका की स्वतंत्रता और निष्पक्षता से ही संभव है और अदालत के आदेशों का सम्मान करना हर नागरिक और राजनीतिक दल का कर्तव्य है।

इसके साथ ही राकेश सिन्हा ने भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) द्वारा आईपीएल फ्रेंचाइजी कोलकाता नाइट राइडर्स (केकेआर) को बांग्लादेशी खिलाड़ी मुस्तफिजुर रहमान को अपनी टीम से हटाने के निर्देश देने पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि यह फैसला काफी देर से लिया गया प्रतीत होता है।

राकेश सिन्हा ने कहा, "ऐसा लगता है कि न तो आईसीसी और न ही बीसीसीआई ने पहले इस पर गंभीरता से विचार किया। जब पाकिस्तानी खिलाड़ियों को नीलामी से बाहर रखा गया था, तो उसी समय बांग्लादेशी खिलाड़ियों को भी क्यों नहीं रोका गया? तब यह निर्णय क्यों नहीं लिया गया कि पाकिस्तानी खिलाड़ियों की तरह बांग्लादेशी खिलाड़ियों को भी नीलामी में शामिल नहीं किया जाएगा?''

उन्होंने आगे कहा कि यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि उस समय बीसीसीआई और आईसीसी क्या कर रहे थे। ऐसा प्रतीत होता है कि फैसले और रणनीतियां तब सामने आती हैं, जब सबकुछ हो चुका होता है। पहले स्पष्ट नीति क्यों नहीं बनाई गई?

कांग्रेस नेता ने कहा कि खेल जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्र में पारदर्शिता और समय पर निर्णय बेहद जरूरी हैं। उन्होंने मांग की कि भविष्य में ऐसे मामलों में पहले से स्पष्ट दिशानिर्देश तय किए जाएं, ताकि खिलाड़ियों, फ्रेंचाइजियों और प्रशंसकों के बीच भ्रम की स्थिति न बने।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत कब खारिज हुई?
उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत याचिकाएं 5 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट द्वारा खारिज की गईं।
राकेश सिन्हा ने न्यायपालिका के बारे में क्या कहा?
राकेश सिन्हा ने कहा कि न्यायपालिका स्वतंत्र है और वह अपने संवैधानिक दायित्वों का निर्वहन करती है।
आईपीएल में बांग्लादेशी खिलाड़ियों को लेकर राकेश सिन्हा का क्या बयान था?
राकेश सिन्हा ने बीसीसीआई के निर्णय पर सवाल उठाते हुए कहा कि यह फैसला काफी देर से लिया गया प्रतीत होता है।
राष्ट्र प्रेस
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