चीनी रक्षा मंत्रालय ने सैन्य मुद्दों पर दी महत्वपूर्ण जानकारी
सारांश
Key Takeaways
- चीन की दक्षिण चीन सागर में संप्रभुता निर्विवाद है।
- फिलीपीन तटरक्षक द्वारा उल्लंघनों पर चीन की प्रतिक्रिया गंभीर है।
- चीन का रक्षा बजट जीडीपी के 1.5 प्रतिशत से कम है।
- बजट में वृद्धि तर्कसंगत और विवेकपूर्ण नीति का संकेत है।
- चीनी सेना की मजबूती से विश्व शांति को सुरक्षित रखा जा सकता है।
बीजिंग, 18 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। चीनी रक्षा मंत्रालय के सूचना ब्यूरो के उप निदेशक और प्रवक्ता, वरिष्ठ कर्नल च्यांग पिन ने हाल ही में सैन्य मुद्दों पर आधिकारिक जानकारी प्रस्तुत की।
रिपोर्टों के अनुसार, 7 मार्च को हुआंगयेन द्वीप के पास गश्त कर रहे फिलीपीन तटरक्षक बल के एक टोही विमान, जिसमें मीडिया के लोग भी शामिल थे, को एक चीनी युद्धपोत द्वारा रेडियो संदेश भेजकर उस क्षेत्र से हटने के लिए कहा गया। इस घटना पर टिप्पणी करते हुए च्यांग पिन ने कहा कि दक्षिण चीन सागर के द्वीपों, जिनमें हुआंगयेन द्वीप भी शामिल है, और उनके आस-पास के जलक्षेत्रों पर चीन की निर्विवाद संप्रभुता है।
उन्होंने आगे कहा कि संबंधित जलक्षेत्रों पर चीन के संप्रभु अधिकार और क्षेत्राधिकार स्थापित हैं और अपने जलक्षेत्र में नियमित अधिकार संरक्षण और कानून प्रवर्तन गतिविधियां करना पूरी तरह से वैध है। च्यांग पिन ने यह भी कहा कि फिलीपीन तटरक्षक बल द्वारा किए गए उल्लंघनों और उकसावे के मामलों में चीन की प्रतिक्रिया पेशेवर, संयमित, तर्कसंगत और कानूनसम्मत रही है।
वहीं, वर्ष 2026 के रक्षा व्यय बजट पर चर्चा करते हुए च्यांग पिन ने कहा कि सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के अनुपात में चीन का रक्षा व्यय लंबे समय से 1.5 प्रतिशत से कम रहा है, जो अमेरिका जैसी प्रमुख सैन्य शक्तियों, वैश्विक औसत और नाटो देशों की तुलना में काफी कम है, जहां रक्षा खर्च सामान्यतः जीडीपी के 2 प्रतिशत से अधिक होता है। उन्होंने कहा कि चीन के रक्षा बजट में वृद्धि उसकी तर्कसंगत, संयमित और विवेकपूर्ण नीति का प्रतिबिंब है।
च्यांग पिन के अनुसार, राष्ट्रीय संप्रभुता, सुरक्षा और विकास हितों की रक्षा करने तथा विश्व शांति और स्थिरता बनाए रखने के लिए यह आवश्यक है। उन्होंने कहा कि चीनी सेना जितनी मजबूत होगी, विश्व शांति उतनी ही अधिक सुरक्षित रहेगी।
(साभार- चाइना मीडिया ग्रुप, पेइचिंग)