प्रज्वल रेवन्ना मामले में एसआईटी ने 13,712 पन्नों की चार्जशीट प्रस्तुत की, 39 नामजद आरोपी
सारांश
Key Takeaways
- प्रज्वल रेवन्ना के खिलाफ गंभीर आरोप हैं।
- एसआईटी ने 13,712 पन्नों की चार्जशीट दायर की है।
- 39 आरोपी नामजद किए गए हैं।
- जांच में 277 गवाहों के बयान शामिल हैं।
- राजनीतिक प्रभाव संभावित है।
बेंगलुरु, 18 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। पूर्व सांसद प्रज्वल रेवन्ना से संबंधित अश्लील वीडियो मामले की जांच कर रही विशेष जांच दल (एसआईटी) ने बुधवार को 13,712 पन्नों की एक व्यापक चार्जशीट पेश की। इस मामले में कुल 39 आरोपियों को नामजद किया गया है।
यह चार्जशीट हासन की वरिष्ठ सिविल अदालत में दायर की गई है। एसआईटी के अनुसार, जांच प्रक्रिया के दौरान कुल 52 व्यक्तियों के नाम उजागर हुए थे, लेकिन पर्याप्त सबूतों के आधार पर केवल 39 के खिलाफ आरोप तय किए गए हैं। इन आरोपियों में भाजपा और कांग्रेस से जुड़े कुछ कार्यकर्ता भी शामिल हैं।
जांच की शुरुआत 2024 लोकसभा चुनाव के दौरान जेडी(एस) के एजेंट रहे अधिवक्ता पूर्णचंद्र द्वारा की गई शिकायत पर हुई थी।
एसआईटी ने अपनी चार्जशीट में उल्लेख किया है कि आरोपियों ने हासन में लगभग 70 पेन ड्राइव खरीदी थीं, जिनके माध्यम से कथित अश्लील वीडियो फैलाए गए। जांच के दौरान 277 गवाहों के बयान दर्ज किए गए हैं।
अधिकारियों का कहना है कि आरोप तकनीकी साक्ष्यों और फॉरेंसिक साइंस लैब (एफएसएल) की रिपोर्ट के आधार पर स्थापित किए गए हैं।
चार्जशीट में आरोपी नंबर-1 नवीन, आरोपी नंबर-2 कार्तिक एन (जो प्रज्वल रेवन्ना के चालक थे), आरोपी नंबर-3 चेतन बी.सी., आरोपी नंबर-4 चेतन वाई.एस., आरोपी नंबर-5 लीकिथ गौड़ा, और आरोपी नंबर-6 देवराजेगौड़ा शामिल हैं।
एसआईटी के अनुसार, ये वीडियो कथित रूप से महिलाओं की सहमति के बिना मोबाइल फोन से रिकॉर्ड किए गए और बाद में पेन ड्राइव और मोबाइल के माध्यम से प्रसारित किए गए। कुछ आरोपियों ने इन्हें अपने फोन से दूसरों के साथ साझा किया, जिससे लोकसभा चुनाव के दौरान ये वीडियो तेजी से फैल गए।
महत्वपूर्ण है कि प्रज्वल रेवन्ना के खिलाफ दुष्कर्म और यौन उत्पीड़न के चार अलग-अलग मामले दर्ज हैं, जिनकी जांच एसआईटी को सौंपी गई थी। यह मामला तब उजागर हुआ जब 26 अप्रैल 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले हासन में कथित रूप से अश्लील वीडियो से भरे पेन ड्राइव बांटे गए थे।
कर्नाटक हाईकोर्ट ने पहले ही इस मामले में दोषी ठहराए गए प्रज्वल रेवन्ना की उम्रकैद की सजा को निलंबित करने से इनकार कर दिया था। अदालत ने अपराध की गंभीरता, लंबित मामलों और गवाहों को प्रभावित करने की आशंका को आधार बनाया।
प्रज्वल रेवन्ना, जिन्हें मई 2024 में जर्मनी से लौटने के बाद गिरफ्तार किया गया था, ने अदालत के फैसले को चुनौती दी है। उन्होंने पीड़िता के बयान में कथित विरोधाभास और सबूतों में असंगतियों का हवाला दिया है।
विशेष अदालत ने चार में से एक मामले में उन्हें उम्रभर की कैद की सजा सुनाई है और जुर्माना भी लगाया है।