रक्षाबंधन 2026: बिहार और राजस्थान में महिलाओं को मुफ्त बस यात्रा, पटना-जयपुर बस स्टैंडों पर उमड़ी भीड़
सारांश
मुख्य बातें
बिहार और राजस्थान सरकारों ने रक्षाबंधन 2026 के अवसर पर महिलाओं को राज्य रोडवेज बसों में मुफ्त यात्रा की सुविधा दी है, जिसके चलते पटना और जयपुर सहित दोनों राज्यों के प्रमुख बस स्टैंडों पर महिला यात्रियों की भारी भीड़ देखी जा रही है। यह पहल महिलाओं को त्योहार के दौरान अपने भाइयों से मिलने और मायके पहुँचने में आर्थिक राहत देने के उद्देश्य से शुरू की गई है।
बिहार में मुफ्त बस सेवा का विस्तार
बिहार सरकार ने रक्षाबंधन पर राज्य की सभी बसों — एसी और नॉन-एसी दोनों — में महिलाओं के लिए निःशुल्क यात्रा की व्यवस्था की। यह सुविधा 27 अगस्त से 28 अगस्त रात 10 बजे तक लागू रही। मुफ्त सेवा शुरू होते ही पटना सहित राज्यभर के बस स्टैंडों पर महिला यात्रियों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई।
एक महिला यात्री ने इस फैसले की सराहना करते हुए कहा, 'रक्षाबंधन पर मुफ्त यात्रा की सुविधा दी जा रही है। यह बहुत अच्छी बात है। इससे महिलाओं को काफी मदद मिल रही है।' महिलाएं इस अवसर का लाभ उठाकर अपने भाइयों के घर रक्षाबंधन मनाने निकल पड़ीं।
राजस्थान में भी बस स्टैंडों पर उमड़ा जनसैलाब
राजस्थान सरकार ने भी रक्षाबंधन के मौके पर राज्य रोडवेज की बसों में महिलाओं के लिए मुफ्त यात्रा की घोषणा की। जयपुर के सिंधी कैंप बस स्टैंड पर बड़ी संख्या में महिला यात्री नजर आईं और बसों में भीड़ देखी गई। कई यात्रियों ने सरकार के इस कदम का स्वागत किया, हालाँकि कुछ लोगों ने अत्यधिक भीड़ और व्यवस्थाओं को लेकर चिंता भी व्यक्त की।
एक महिला यात्री ने बताया, 'बस में मुझे अच्छी सुविधाएं मिलती हैं और आज सेवा मुफ्त है। इसलिए मैं अपने भाई से मिलने और रक्षाबंधन मनाने जा रही हूँ। आज कोई किराया नहीं लग रहा है। महिलाओं के लिए यह मुफ्त यात्रा सेवा बहुत फायदेमंद है।' एक अन्य यात्री ने कहा, 'मैं आज रक्षाबंधन मनाने अलवर जा रही हूँ। सरकार ने महिलाओं के लिए आज यात्रा मुफ्त कर दी है। यह अच्छी पहल है।'
आम जनता पर असर
परिवहन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, मुफ्त बस सेवा के चलते दोनों राज्यों में बड़ी संख्या में महिलाएं रक्षाबंधन पर अपने भाइयों से मिलने के लिए यात्रा कर सकीं। इस पहल से त्योहार के दौरान महिलाओं को आर्थिक राहत के साथ-साथ सुरक्षित और सुविधाजनक यात्रा का विकल्प भी मिला। गौरतलब है कि यह योजना उन महिलाओं के लिए विशेष रूप से लाभकारी रही जो किराए के बोझ के कारण त्योहार पर घर नहीं जा पाती थीं।
क्या होगा आगे
यह ऐसे समय में आया है जब कई राज्य सरकारें त्योहारी मौसम में महिला-केंद्रित कल्याण योजनाओं को बढ़ावा दे रही हैं। आलोचकों का कहना है कि एकदिवसीय मुफ्त सेवाओं के बजाय दीर्घकालिक सब्सिडी नीतियाँ अधिक प्रभावी होंगी। दोनों राज्यों में भविष्य के त्योहारों पर इसी तरह की सुविधा जारी रहेगी या नहीं, यह अभी स्पष्ट नहीं है।